अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْكِتَابَ (अल-किताब): यहाँ इससे तात्पर्य तौरात (तोराह) से है, जो हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) पर उतारी गई।
- الْفُرْقَانَ (अल-फ़ुरक़ान): इसका अर्थ है सत्य और असत्य, हक़ और बातिल के बीच अंतर करने वाला। यह भी तौरात का ही एक नाम है, क्योंकि यह सत्य और असत्य को अलग करती है।
- لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ (लअल्लकुम तह्तदून): ताकि तुम हिदायत पाओ और सीधे मार्ग पर चलो।
आयत की तफ़सीर:
अल्लाह तआला बनी इस्राईल को उनकी उन नेअमतों की याद दिला रहा है जो उसने उन पर कीं। उनमें से एक बड़ी नेअमत यह थी कि उसने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को किताब (तौरात) अता की। यह किताब सिर्फ एक साधारण किताब नहीं थी, बल्कि यह फ़ुरक़ान थी, यानी हक़ और बातिल, हिदायत और गुमराही के बीच फर्क करने वाली। इसका उद्देश्य यह था कि बनी इस्राईल इस किताब की रोशनी में सीधे रास्ते पर चलें, अपनी गलतियों और कुरीतियों से बचें, और अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों पर अमल करते हुए दुनिया और आख़िरत की भलाई हासिल करें।
यह नेअमत उन्हें उस वक़्त दी गई जब वे मिस्र से निकलकर सिनाई के रेगिस्तान में थे। अल्लाह ने उन्हें एक ऐसी किताब दी जो उनके लिए रहनुमा थी, उनके धार्मिक और सामाजिक मामलों में मार्गदर्शन करती थी। यह उनके लिए रहमत और हिदायत का ज़रिया बनी, बशर्ते वे इसे मानें और उस पर अमल करें।
फ़ायदे और सबक़:
- अल्लाह की नेअमतों को याद रखना: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेअमतों को याद करना और उनका शुक्र अदा करना चाहिए। नेअमतों की याद दिलाने से दिल में अल्लाह की मोहब्बत और उसकी इबादत का जज़्बा पैदा होता है।
- किताबों का महत्व: अल्लाह ने हिदायत के लिए किताबें उतारीं। यह दिखाता है कि अल्लाह अपने बंदों पर कितना मेहरबान है कि उसने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि रहनुमाई के लिए किताबें और रसूल भेजे।
- फ़ुरक़ान का मतलब: किताब सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उस पर अमल करने के लिए है। यह हमें सिखाती है कि हमें अपने जीवन में हक़ और बातिल में फर्क करना चाहिए और हमेशा हक़ को अपनाना चाहिए।
- हिदायत अल्लाह के हाथ में है: "लअल्लकुम तह्तदून" से पता चलता है कि किताब मिलने के बाद भी हिदायत अल्लाह की तौफ़ीक़ पर निर्भर है। हमें अल्लाह से हिदायत की दुआ करनी चाहिए और उसकी किताब पर अमल करने की कोशिश करनी चाहिए।
- कुरआन हमारा फ़ुरक़ान है: जिस तरह तौरात बनी इस्राईल के लिए फ़ुरक़ान थी, उसी तरह कुरआन हमारे लिए फ़ुरक़ान है। यह हमें सही रास्ता दिखाता है और हर ज़माने में हक़ और बातिल में फर्क करने की ताक़त देता है। हमें चाहिए कि हम कुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें।
📜 आयत 51-55 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 53
सूरा आयत 53/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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