अल-बकरा · 53/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
وَإِذۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡفُرۡقَانَ لَعَلَّكُمۡ تَهۡتَدُونَ  ۝٥٣
Wa iz aatainaa Moosal kitaaba wal Furqaana la`allakum tahtadoon
📖 हिंदी अर्थ
और (वह वक्त भी याद करो) जब मूसा को (तौरेत) अता की और हक़ और बातिल को जुदा करनेवाला क़ानून (इनायत किया) ताके तुम हिदायत पाओ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْكِتَابَ (अल-किताब): यहाँ इससे तात्पर्य तौरात (तोराह) से है, जो हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) पर उतारी गई।
  • الْفُرْقَانَ (अल-फ़ुरक़ान): इसका अर्थ है सत्य और असत्य, हक़ और बातिल के बीच अंतर करने वाला। यह भी तौरात का ही एक नाम है, क्योंकि यह सत्य और असत्य को अलग करती है।
  • لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ (लअल्लकुम तह्तदून): ताकि तुम हिदायत पाओ और सीधे मार्ग पर चलो।

आयत की तफ़सीर:

अल्लाह तआला बनी इस्राईल को उनकी उन नेअमतों की याद दिला रहा है जो उसने उन पर कीं। उनमें से एक बड़ी नेअमत यह थी कि उसने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को किताब (तौरात) अता की। यह किताब सिर्फ एक साधारण किताब नहीं थी, बल्कि यह फ़ुरक़ान थी, यानी हक़ और बातिल, हिदायत और गुमराही के बीच फर्क करने वाली। इसका उद्देश्य यह था कि बनी इस्राईल इस किताब की रोशनी में सीधे रास्ते पर चलें, अपनी गलतियों और कुरीतियों से बचें, और अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों पर अमल करते हुए दुनिया और आख़िरत की भलाई हासिल करें।

यह नेअमत उन्हें उस वक़्त दी गई जब वे मिस्र से निकलकर सिनाई के रेगिस्तान में थे। अल्लाह ने उन्हें एक ऐसी किताब दी जो उनके लिए रहनुमा थी, उनके धार्मिक और सामाजिक मामलों में मार्गदर्शन करती थी। यह उनके लिए रहमत और हिदायत का ज़रिया बनी, बशर्ते वे इसे मानें और उस पर अमल करें।

फ़ायदे और सबक़:

  1. अल्लाह की नेअमतों को याद रखना: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेअमतों को याद करना और उनका शुक्र अदा करना चाहिए। नेअमतों की याद दिलाने से दिल में अल्लाह की मोहब्बत और उसकी इबादत का जज़्बा पैदा होता है।
  2. किताबों का महत्व: अल्लाह ने हिदायत के लिए किताबें उतारीं। यह दिखाता है कि अल्लाह अपने बंदों पर कितना मेहरबान है कि उसने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि रहनुमाई के लिए किताबें और रसूल भेजे।
  3. फ़ुरक़ान का मतलब: किताब सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उस पर अमल करने के लिए है। यह हमें सिखाती है कि हमें अपने जीवन में हक़ और बातिल में फर्क करना चाहिए और हमेशा हक़ को अपनाना चाहिए।
  4. हिदायत अल्लाह के हाथ में है: "लअल्लकुम तह्तदून" से पता चलता है कि किताब मिलने के बाद भी हिदायत अल्लाह की तौफ़ीक़ पर निर्भर है। हमें अल्लाह से हिदायत की दुआ करनी चाहिए और उसकी किताब पर अमल करने की कोशिश करनी चाहिए।
  5. कुरआन हमारा फ़ुरक़ान है: जिस तरह तौरात बनी इस्राईल के लिए फ़ुरक़ान थी, उसी तरह कुरआन हमारे लिए फ़ुरक़ान है। यह हमें सही रास्ता दिखाता है और हर ज़माने में हक़ और बातिल में फर्क करने की ताक़त देता है। हमें चाहिए कि हम कुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें।
🎧 सुनें

📜 आयत 51-55 — अल-बकरा

51وَإِذۡ وَٰعَدۡنَا مُوسَىٰٓ أَرۡبَعِينَ لَيۡلَةً ثُمَّ ٱتَّخَذۡتُمُ ٱلۡعِجۡلَ مِنۢ بَعۡدِهِۦ وَأَنتُمۡ ظَٰلِمُونَ 
और फिरऔन के आदमियों को तुम्हारे देखते-देखते डुबो दिया और (वह वक्त भी याद करो) जब हमने मूसा से चालीस रातों का वायदा किया था और तुम लोगों ने उनके जाने के बाद एक बछड़े को (परसतिश के लिए खुदा) बना लिया
52ثُمَّ عَفَوۡنَا عَنكُم مِّنۢ بَعۡدِ ذَٰلِكَ لَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ 
हालाँकि तुम अपने ऊपर ज़ुल्म जोत रहे थे फिर हमने उसके बाद भी दरगुज़र की ताकि तुम शुक्र करो
53وَإِذۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡفُرۡقَانَ لَعَلَّكُمۡ تَهۡتَدُونَ 
और (वह वक्त भी याद करो) जब मूसा को (तौरेत) अता की और हक़ और बातिल को जुदा करनेवाला क़ानून (इनायत किया) ताके तुम हिदायत पाओ
54وَإِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِۦ يَٰقَوۡمِ إِنَّكُمۡ ظَلَمۡتُمۡ أَنفُسَكُم بِٱتِّخَاذِكُمُ ٱلۡعِجۡلَ فَتُوبُوٓاْ إِلَىٰ بَارِئِكُمۡ فَٱقۡتُلُوٓاْ أَنفُسَكُمۡ ذَٰلِكُمۡ خَيۡرٌ لَّكُمۡ عِندَ بَارِئِكُمۡ فَتَابَ عَلَيۡكُمۡۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ 
और (वह वक्त भी याद करो) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि ऐ मेरी क़ौम तुमने बछड़े को (ख़ुदा) बना के अपने ऊपर बड़ा सख्त जुल्म किया तो अब (इसके सिवा कोई चारा नहीं कि) तुम अपने ख़ालिक की बारगाह में तौबा करो और वह ये है कि अपने को क़त्ल कर डालो तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक तुम्हारे हक़ में यही बेहतर है, फिर जब तुमने ऐसा किया तो खुदा ने तुम्हारी तौबा क़ुबूल कर ली बेशक वह बड़ा मेहरबान माफ़ करने वाला है
55وَإِذۡ قُلۡتُمۡ يَٰمُوسَىٰ لَن نُّؤۡمِنَ لَكَ حَتَّىٰ نَرَى ٱللَّهَ جَهۡرَةً فَأَخَذَتۡكُمُ ٱلصَّٰعِقَةُ وَأَنتُمۡ تَنظُرُونَ 
और (वह वक्त भी याद करो) जब तुमने मूसा से कहा था कि ऐ मूसा हम तुम पर उस वक्त तक ईमान न लाएँगे जब तक हम खुदा को ज़ाहिर बज़ाहिर न देख ले उस पर तुम्हें बिजली ने ले डाला, और तुम तकते ही रह गए
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
53आयत

अनुवाद — अल-बकरा 53

सूरा आयत 53/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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