ताहा · 101/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
خَالِدِينَ فِيهِ ۖ وَسَاءَ لَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ حِمْلًا ۝١٠١
Khaalideena feehi wa saaa`a lahum Yawmal Qiyaamati himlaa
📖 हिंदी अर्थ
और उसी हाल में हमेशा रहेंगे और क्या ही बुरा बोझ है क़यामत के दिन ये लोग उठाए होंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَالِدِينَ فِيهِ: उसमें हमेशा रहने वाले (अर्थात उस अज़ाब में स्थायी रूप से रहने वाले)
  • وَسَاءَ: बहुत बुरा है
  • حِمْلًا: बोझ (यहाँ आशय पापों के बोझ से है)

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के भयानक अंजाम का वर्णन कर रही है जो क़ुरआन से मुँह मोड़ते हैं और उस पर ईमान नहीं लाते। ऐसे लोग क़ियामत के दिन अपने पापों का भारी बोझ उठाकर आएँगे, और यह बोझ इतना भारी होगा कि वे उसे ढोते हुए जहन्नुम में डाल दिए जाएँगे। वे उस अज़ाब में हमेशा हमेशा रहेंगे, कभी उन्हें आराम नहीं मिलेगा और न ही उनकी पीड़ा कम होगी।

यह बोझ — जो उनके कुफ़्र, अवज्ञा और क़ुरआन को झुठलाने का परिणाम है — क़ियामत के दिन उनके लिए सबसे बुरा बोझ साबित होगा। वे स्वयं अपने ऊपर इस बोझ का कारण बने, क्योंकि उन्होंने दुनिया में हिदायत को ठुकराया और गुमराही को अपनाया।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने जीवन में कौन सा बोझ उठा रहे हैं। क्या हम ऐसे बोझ उठा रहे हैं जो क़ियामत के दिन हमें नुक़सान पहुँचाएँगे, या हम हल्के होकर अल्लाह की रहमत की ओर बढ़ रहे हैं? अल्लाह तआला ने क़ुरआन को हिदायत की रोशनी बनाकर भेजा है। जो इसे अपनाएगा, उसके बोझ हल्के होंगे और उसका हिसाब आसान होगा। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: "जिसने क़ुरआन पढ़ा और उस पर अमल किया, क़ियामत के दिन उसके माता-पिता को ऐसा ताज पहनाया जाएगा जिसकी रोशनी सूरज की रोशनी से भी बेहतर होगी।" (अबू दाऊद)

तो आइए, हम उस भारी बोझ से बचें जो क़ुरआन को छोड़ने से आता है, और उस हल्केपन को अपनाएँ जो क़ुरआन को अपनाने से मिलता है। यही सच्ची कामयाबी है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी। अल्लाह हमें क़ुरआन को समझने, उस पर अमल करने और उसके ज़रिए अपने बोझ हल्के करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 99-103 — ताहा

99كَذَٰلِكَ نَقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنبَاءِ مَا قَدْ سَبَقَ ۚ وَقَدْ آتَيْنَاكَ مِن لَّدُنَّا ذِكْرًا
(ऐ रसूल) हम तुम्हारे सामने यूँ वाक़ेयात बयान करते हैं जो गुज़र चुके और हमने ही तुम्हारे पास अपनी बारगाह से कुरान अता किया
100مَّنْ أَعْرَضَ عَنْهُ فَإِنَّهُ يَحْمِلُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وِزْرًا
जिसने उससे मुँह फेरा वह क़यामत के दिन यक़ीनन (अपने बुरे आमाल का) बोझ उठाएगा
101خَالِدِينَ فِيهِ ۖ وَسَاءَ لَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ حِمْلًا
और उसी हाल में हमेशा रहेंगे और क्या ही बुरा बोझ है क़यामत के दिन ये लोग उठाए होंगे
102يَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ ۚ وَنَحْشُرُ الْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٍ زُرْقًا
जिस दिन सूर फूँका जाएगा और हम उस दिन गुनाहगारों को (उनकी) ऑंखें पुतली (अन्धी) करके (आमने-सामने) जमा करेंगे
103يَتَخَافَتُونَ بَيْنَهُمْ إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا عَشْرًا
(और) आपस में चुपके-चुपके कहते होंगे कि (दुनिया या क़ब्र में) हम लोग (बहुत से बहुत) नौ दस दिन ठहरे होंगे
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीRevelation
101आयत

अनुवाद — ताहा 101

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Tuesday, August 18, 2026

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