ताहा · 102/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
يَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ ۚ وَنَحْشُرُ الْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٍ زُرْقًا ۝١٠٢
Yawma yunfakhu fissoori wa nahshurul mujrimeena Yawma `izin zurqaa
📖 हिंदी अर्थ
जिस दिन सूर फूँका जाएगा और हम उस दिन गुनाहगारों को (उनकी) ऑंखें पुतली (अन्धी) करके (आमने-सामने) जमा करेंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الصُّور (अस-सूर): वह नरसिंगा (तुरही) जिसमें फूँका जाएगा। यह इसराफील अलैहिस्सलाम का नरसिंगा है।
  • نَحْشُرُ (नहशुरु): हम इकट्ठा करेंगे।
  • الْمُجْرِمِينَ (अल-मुजरिमीन): अपराधी, अर्थात काफिर और मुशरिक।
  • زُرْقًا (ज़ुर्क़न): नीली आँखों वाले, जिनकी आँखें और चेहरे भय और सख्ती से नीले पड़ गए हों।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला उस भयानक दिन का वर्णन कर रहे हैं जब इसराफील अलैहिस्सलाम नरसिंगे में फूँकेंगे और सारे लोग क़ब्रों से उठ खड़े होंगे। यह दूसरी फूँक होगी जो क़ियामत के लिए होगी। उस दिन अल्लाह तआला सभी अपराधियों—जिन्होंने दुनिया में कुफ्र और शिर्क किया—को हश्र के मैदान में इकट्ठा करेगा, और उनकी हालत यह होगी कि उनकी आँखें नीली होंगी, उनके चेहरे स्याह होंगे, और वे अत्यधिक प्यास और भय के कारण इस तरह विकृत हो जाएँगे। यह उनके लिए रूसवाई और ज़िल्लत का दिन होगा।

यह वर्णन हमें बताता है कि क़ियामत का दिन कितना भयानक और सख्त होगा। जो लोग आज अल्लाह के आगे सर नहीं झुकाते, जो उसके हुक्मों की परवाह नहीं करते, उनका अंजाम उस दिन यही होगा कि वे ज़लील और रुसवा होंगे। लेकिन जो लोग आज अल्लाह की इबादत करते हैं, उसके रास्ते पर चलते हैं, उनके लिए उस दिन खुशी और कामयाबी होगी।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सचेत करती है कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की आज्ञा के अनुसार बनाएँ। हमें चाहिए कि हम नमाज़ की पाबंदी करें, अल्लाह का ज़िक्र करें, और उसके हुक्मों पर अमल करें। क़ियामत का दिन ज़रूर आएगा, और उस दिन हर इंसान अपने अमाल का बदला पाएगा। अल्लाह तआला हमें उस दिन की सख्ती से बचाए और हमें जन्नत का मुस्तहिक बनाए। आमीन।



📜 आयत 100-104 — सूरा ताहा

100مَّنْ أَعْرَضَ عَنْهُ فَإِنَّهُ يَحْمِلُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وِزْرًا
जिसने उससे मुँह फेरा वह क़यामत के दिन यक़ीनन (अपने बुरे आमाल का) बोझ उठाएगा
101خَالِدِينَ فِيهِ ۖ وَسَاءَ لَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ حِمْلًا
और उसी हाल में हमेशा रहेंगे और क्या ही बुरा बोझ है क़यामत के दिन ये लोग उठाए होंगे
102يَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ ۚ وَنَحْشُرُ الْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٍ زُرْقًا
जिस दिन सूर फूँका जाएगा और हम उस दिन गुनाहगारों को (उनकी) ऑंखें पुतली (अन्धी) करके (आमने-सामने) जमा करेंगे
103يَتَخَافَتُونَ بَيْنَهُمْ إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا عَشْرًا
(और) आपस में चुपके-चुपके कहते होंगे कि (दुनिया या क़ब्र में) हम लोग (बहुत से बहुत) नौ दस दिन ठहरे होंगे
104نَّحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَقُولُونَ إِذْ يَقُولُ أَمْثَلُهُمْ طَرِيقَةً إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا يَوْمًا
जो कुछ ये लोग (उस दिन) कहेंगे हम खूब जानते हैं कि जो इनमें सबसे ज्यादा होशियार होगा बोल उठेगा कि तुम बस (बहुत से बहुत) एक दिन ठहरे होगे
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
102आयत

अनुवाद — ताहा 102

सूरा ताहा आयत 102 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिस दिन सूर फूँका जाएगा और हम उस दिन गुनाहगारों…

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Friday, October 2, 2026

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