अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- إِذْ أَوْحَيْنَا: उस समय की याद दिलाओ जब हमने प्रेरणा दी।
- إِلَىٰ أُمِّكَ: तुम्हारी माँ को।
- مَا يُوحَىٰ: वह चीज़ जो प्रेरणा के रूप में दी जाने वाली थी (अर्थात् अल्लाह की ओर से दिया गया विशेष संकेत और निर्देश)।
तफ़सीर:
ऐ मूसा (अलैहिस्सलाम)! उस समय को याद करो जब तुम्हारी माँ को वह प्रेरणा दी गई जो प्रेरणा दी जाने वाली थी। यह अल्लाह की ओर से एक विशेष इल्हाम (प्रेरणा) थी, जो उनके हृदय में डाली गई। यह कोई साधारण बात नहीं थी, बल्कि अल्लाह तआला ने तुम्हारी माँ के सीने में यह बात डाल दी कि वे तुम्हें एक संदूक में रखकर दरिया में डाल दें। यह एक बहुत बड़ी परीक्षा थी, लेकिन अल्लाह ने उन्हें यक़ीन दिलाया कि वह तुम्हारी हिफ़ाज़त करेगा।
यह इल्हाम अल्लाह की उस योजना का हिस्सा था जिसके द्वारा उसने मूसा (अलैहिस्सलाम) को फ़िरऔन के ज़ुल्म से बचाना था। फ़िरऔन उस समय बनी इसराईल के नवजात लड़कों को मार डालता था, लेकिन अल्लाह ने अपनी क़ुदरत से मूसा को उसी फ़िरऔन के घर में पालने का इंतज़ाम किया। यह अल्लाह की अजीबो-ग़रीब तदबीर थी कि जो बच्चा मारा जाने वाला था, वही फ़िरऔन के महल में पलकर बड़ा हुआ और आगे चलकर उसी फ़िरऔन के सामने खड़ा हुआ।
इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है कि अल्लाह तआला अपने बंदों की हिफ़ाज़त करता है, चाहे हालात कितने ही मुश्किल क्यों न हों। जब अल्लाह किसी काम का फ़ैसला कर लेता है, तो उसे पूरा करके ही रहता है। माँ का दिल अपने बच्चे के लिए कितना बेचैन होता है, लेकिन जब अल्लाह की तरफ़ से इल्हाम आता है, तो वह उस पर भरोसा करती है और अल्लाह उसके भरोसे को सच कर दिखाता है।
यह भी याद रखने की बात है कि अल्लाह तआला जिसे चाहता है, उसे अपनी ख़ास मुहब्बत और हिफ़ाज़त से नवाज़ता है। मूसा (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह ने अपनी आँखों के सामने (अपनी ख़ास निगरानी में) पाला, और उन्हें दुश्मन के घर में सुरक्षित रखा। यह अल्लाह की क़ुदरत की निशानी है कि वह अपने नबियों और अपने नेक बंदों की हर हाल में हिफ़ाज़त करता है।
इस क़िस्से से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जब हालात बहुत ख़राब हों, तो याद रखें कि अल्लाह की मदद बहुत करीब होती है। अल्लाह अपने बंदों को उन रास्तों से मदद देता है जिनका उन्हें अंदाज़ा भी नहीं होता। हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में अल्लाह की तरफ़ से आने वाले संकेतों और प्रेरणाओं पर ध्यान दें और उन पर अमल करें, क्योंकि अल्लाह जो कुछ भी करता है, उसमें हमारी भलाई ही होती है।
📜 आयत 36-40 — ताहा
अनुवाद — ताहा 38
सूरा ताहा आयत 38 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जब हमने तुम्हारी माँ को इलहाम किया जो अब तुम्हें…सूरा आयत 38/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 36–40. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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