ताहा · 37/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَيْكَ مَرَّةً أُخْرَىٰ ۝٣٧
Wa laqad manannaa `alaika marratan ukhraaa
📖 हिंदी अर्थ
और हम तो तुम पर एक बार और एहसान कर चुके हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَنَنَّا = हमने उपकार किया, एहसान किया
  • مَرَّةً أُخْرَىٰ = एक और बार, पहले भी एक अवसर पर

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ मूसा (अलैहिस्सलाम)! हमने तुम पर यह बड़ा एहसान (नबुव्वत और कलाम का सम्मान) केवल अभी ही नहीं किया, बल्कि इससे पहले भी एक और बार हमारी विशेष कृपा तुम पर हुई थी। जब तुम शिशु थे और फ़िरऔन का अत्याचार अपने चरम पर था, वह तुम्हारे जैसे हर नवजात बच्चे को मार डालता था। उस समय हमने अपनी अपार दया से तुम्हें उसके ज़ुल्म से बचाया और तुम्हारी माँ के दिल में यह प्रेरणा डाली कि तुम्हें एक संदूक में रखकर दरिया में छोड़ दें। हमने उसी दरिया के ज़रिए तुम्हें फ़िरऔन के घर तक पहुँचाया, और वहीं तुम उसके ही दुश्मन के घर में पलकर बड़े हुए, ताकि हमारी योजना पूरी हो। यह सब कुछ हमारी ओर से तुम्हारे लिए एक अदृश्य सुरक्षा और मार्गदर्शन था, जो तुम्हारे जीवन की नींव बना।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने प्यारे बंदों पर हर समय कृपा बरसाता है—कभी उन्हें मुसीबत से निकालता है, कभी उन्हें सम्मान देता है, और कभी उन्हें अपनी विशेष नज़दीकी प्रदान करता है। जब हम अपने अतीत पर नज़र डालें, तो हमें अल्लाह के अनगिनत एहसानों के प्रति आभारी होना चाहिए। याद रखें, अल्लाह की मदद और कृपा हमेशा उसके सच्चे बंदों के साथ होती है, चाहे वह किसी भी समय और किसी भी रूप में हो। यही विश्वास हमारे दिलों को मज़बूत करता है और हमें उसकी राह पर चलने का साहस देता है।



📜 आयत 35-39 — सूरा ताहा

35إِنَّكَ كُنتَ بِنَا بَصِيرًا
तू तो हमारी हालत देख ही रहा है
36قَالَ قَدْ أُوتِيتَ سُؤْلَكَ يَا مُوسَىٰ
फ़रमाया ऐ मूसा तुम्हारी सब दरख्वास्तें मंज़ूर की गई
37وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَيْكَ مَرَّةً أُخْرَىٰ
और हम तो तुम पर एक बार और एहसान कर चुके हैं
38إِذْ أَوْحَيْنَا إِلَىٰ أُمِّكَ مَا يُوحَىٰ
जब हमने तुम्हारी माँ को इलहाम किया जो अब तुम्हें ''वही'' के ज़रिए से बताया जाता है
39أَنِ اقْذِفِيهِ فِي التَّابُوتِ فَاقْذِفِيهِ فِي الْيَمِّ فَلْيُلْقِهِ الْيَمُّ بِالسَّاحِلِ يَأْخُذْهُ عَدُوٌّ لِّي وَعَدُوٌّ لَّهُ ۚ وَأَلْقَيْتُ عَلَيْكَ مَحَبَّةً مِّنِّي وَلِتُصْنَعَ عَلَىٰ عَيْنِي
कि तुम इसे (मूसा को) सन्दूक़ में रखकर सन्दूक़ को दरिया में डाल दो फिर दरिया उसे ढकेल कर किनारे डाल देगा कि मूसा को मेरा दुशमन और मूसा का दुशमन (फिरऔन) उठा लेगा और मैंने तुम पर अपनी मोहब्बत को डाल दिया जो देखता (प्यार करता) ताकि तुम मेरी ख़ास निगरानी में पाले पोसे जाओ
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
37आयत

अनुवाद — ताहा 37

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सूरा आयत 37/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.





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Friday, October 2, 2026

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