अल-अंबिया · 28/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يَشْفَعُونَ إِلَّا لِمَنِ ارْتَضَىٰ وَهُم مِّنْ خَشْيَتِهِ مُشْفِقُونَ ۝٢٨
Ya`lamu maa baina aideehim wa maa khalfahum wa laa yashfa`oona illaa limanir tadaa wa hum min khash yatihee mushfiqoon
📖 हिंदी अर्थ
जो कुछ उनके सामने है और जो कुछ उनके पीछे है (ग़रज़ सब कुछ) वह (खुदा) जानता है और ये लोग उस शख्स के सिवा जिससे खुदा राज़ी हो किसी की सिफारिश भी नहीं करते और ये लोग खुद उसके ख़ौफ से (हर वक्त) ड़रते रहते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ: उनके सामने के कर्म (जो वे कर चुके हैं)
  • مَا خَلْفَهُمْ: उनके पीछे के कर्म (जो वे आगे करेंगे)
  • يَشْفَعُونَ: सिफ़ारिश करते हैं
  • ارْتَضَىٰ: जिससे अल्लाह राज़ी हो गया
  • خَشْيَتِهِ: उसके भय से
  • مُشْفِقُونَ: डरने वाले, सहमे हुए

तफ़सीर:

अल्लाह तआला अपने फ़रिश्तों के बारे में बताते हुए फ़रमाते हैं कि वह उनके अगले-पिछले सारे कर्मों को पूरी तरह जानता है। जो कर्म उन्होंने अतीत में किए और जो भविष्य में करेंगे, सब कुछ उसके इल्म में है। कोई भी चीज़ उसके ज्ञान से छिपी नहीं है।

फ़रिश्ते अल्लाह की अनुमति के बिना किसी की सिफ़ारिश नहीं कर सकते। वे केवल उसी व्यक्ति के लिए सिफ़ारिश करते हैं जिससे अल्लाह स्वयं राज़ी हो गया हो — अर्थात जिसने ईमान लाकर "ला इलाहा इल्लल्लाह" कहा हो और उसके दिल में सच्चा ईमान हो। यह अल्लाह की महानता और उसकी इज़्ज़त का प्रमाण है कि उसके नज़दीक के फ़रिश्ते भी उसकी इजाज़त के बग़ैर कुछ नहीं बोल सकते।

और ये फ़रिश्ते अपने रब के भय से हमेशा काँपते रहते हैं। उसकी हैबत और अज़मत से उनके दिल भय से भरे रहते हैं। वे उसके किसी हुक्म की ख़िलाफ़वरी से डरते हैं और उसकी इबादत में हमेशा सजदे-रू होते रहते हैं। यह भय उनकी इबादत को और अधिक ख़ालिस बनाता है और उन्हें हर गुनाह से दूर रखता है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है। हमारे अतीत और भविष्य के सारे कर्म उसकी नज़र में हैं। इसलिए हमें अपने जीवन में उसकी नाराज़गी से बचना चाहिए। जिस तरह फ़रिश्ते — जो गुनाहों से पाक हैं — उसके भय से काँपते हैं, हमें तो और भी अधिक उसके भय को अपने दिलों में बिठाना चाहिए। यह भय हमें गुनाहों से रोकेगा और नेक कर्मों की तरफ़ प्रेरित करेगा। अल्लाह की रहमत यह है कि उसने अपने फ़रिश्तों को सिफ़ारिश की इजाज़त उन लोगों के लिए दी है जो ईमान लाए और उसकी रज़ा के हक़दार बने। हमें चाहिए कि हम अपने ईमान को मज़बूत करें और अल्लाह की रज़ा के लिए कर्म करते रहें, ताकि उस दिन हम भी उन लोगों में शामिल हों जिनके लिए सिफ़ारिश की जाएगी।



📜 आयत 26-30 — सूरा अल-अंबिया

26وَقَالُوا اتَّخَذَ الرَّحْمَٰنُ وَلَدًا ۗ سُبْحَانَهُ ۚ بَلْ عِبَادٌ مُّكْرَمُونَ
और (अहले मक्का) कहते हैं कि खुदा ने (फरिश्तों को) अपनी औलाद (बेटियाँ) बना रखा है (हालाँकि) वह उससे पाक व पकीज़ा हैं बल्कि (वह फ़रिश्ते) (खुदा के) मोअज्ज़ि बन्दे हैं
27لَا يَسْبِقُونَهُ بِالْقَوْلِ وَهُم بِأَمْرِهِ يَعْمَلُونَ
ये लोग उसके सामने बढ़कर बोल नहीं सकते और ये लोग उसी के हुक्म पर चलते हैं
28يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يَشْفَعُونَ إِلَّا لِمَنِ ارْتَضَىٰ وَهُم مِّنْ خَشْيَتِهِ مُشْفِقُونَ
जो कुछ उनके सामने है और जो कुछ उनके पीछे है (ग़रज़ सब कुछ) वह (खुदा) जानता है और ये लोग उस शख्स के सिवा जिससे खुदा राज़ी हो किसी की सिफारिश भी नहीं करते और ये लोग खुद उसके ख़ौफ से (हर वक्त) ड़रते रहते हैं
29۞ وَمَن يَقُلْ مِنْهُمْ إِنِّي إِلَٰهٌ مِّن دُونِهِ فَذَٰلِكَ نَجْزِيهِ جَهَنَّمَ ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي الظَّالِمِينَ
और उनमें से जो कोई ये कह दे कि खुदा नहीं (बल्कि) मैं माबूद हूँ तो वह (मरदूद बारगाह हुआ) हम उसको जहन्नुम की सज़ा देंगे और सरकशों को हम ऐसी ही सज़ा देते हैं
30أَوَلَمْ يَرَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَنَّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ كَانَتَا رَتْقًا فَفَتَقْنَاهُمَا ۖ وَجَعَلْنَا مِنَ الْمَاءِ كُلَّ شَيْءٍ حَيٍّ ۖ أَفَلَا يُؤْمِنُونَ
जो लोग काफिर हो बैठे क्या उन लोगों ने इस बात पर ग़ौर नहीं किया कि आसमान और ज़मीन दोनों बस्ता (बन्द) थे तो हमने दोनों को शिगाफ़ता किया (खोल दिया) और हम ही ने जानदार चीज़ को पानी से पैदा किया इस पर भी ये लोग ईमान न लाएँगे
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अनुवाद — अल-अंबिया 28

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Saturday, October 3, 2026

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