अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ: उनके सामने के कर्म (जो वे कर चुके हैं)
- مَا خَلْفَهُمْ: उनके पीछे के कर्म (जो वे आगे करेंगे)
- يَشْفَعُونَ: सिफ़ारिश करते हैं
- ارْتَضَىٰ: जिससे अल्लाह राज़ी हो गया
- خَشْيَتِهِ: उसके भय से
- مُشْفِقُونَ: डरने वाले, सहमे हुए
तफ़सीर:
अल्लाह तआला अपने फ़रिश्तों के बारे में बताते हुए फ़रमाते हैं कि वह उनके अगले-पिछले सारे कर्मों को पूरी तरह जानता है। जो कर्म उन्होंने अतीत में किए और जो भविष्य में करेंगे, सब कुछ उसके इल्म में है। कोई भी चीज़ उसके ज्ञान से छिपी नहीं है।
फ़रिश्ते अल्लाह की अनुमति के बिना किसी की सिफ़ारिश नहीं कर सकते। वे केवल उसी व्यक्ति के लिए सिफ़ारिश करते हैं जिससे अल्लाह स्वयं राज़ी हो गया हो — अर्थात जिसने ईमान लाकर "ला इलाहा इल्लल्लाह" कहा हो और उसके दिल में सच्चा ईमान हो। यह अल्लाह की महानता और उसकी इज़्ज़त का प्रमाण है कि उसके नज़दीक के फ़रिश्ते भी उसकी इजाज़त के बग़ैर कुछ नहीं बोल सकते।
और ये फ़रिश्ते अपने रब के भय से हमेशा काँपते रहते हैं। उसकी हैबत और अज़मत से उनके दिल भय से भरे रहते हैं। वे उसके किसी हुक्म की ख़िलाफ़वरी से डरते हैं और उसकी इबादत में हमेशा सजदे-रू होते रहते हैं। यह भय उनकी इबादत को और अधिक ख़ालिस बनाता है और उन्हें हर गुनाह से दूर रखता है।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है। हमारे अतीत और भविष्य के सारे कर्म उसकी नज़र में हैं। इसलिए हमें अपने जीवन में उसकी नाराज़गी से बचना चाहिए। जिस तरह फ़रिश्ते — जो गुनाहों से पाक हैं — उसके भय से काँपते हैं, हमें तो और भी अधिक उसके भय को अपने दिलों में बिठाना चाहिए। यह भय हमें गुनाहों से रोकेगा और नेक कर्मों की तरफ़ प्रेरित करेगा। अल्लाह की रहमत यह है कि उसने अपने फ़रिश्तों को सिफ़ारिश की इजाज़त उन लोगों के लिए दी है जो ईमान लाए और उसकी रज़ा के हक़दार बने। हमें चाहिए कि हम अपने ईमान को मज़बूत करें और अल्लाह की रज़ा के लिए कर्म करते रहें, ताकि उस दिन हम भी उन लोगों में शामिल हों जिनके लिए सिफ़ारिश की जाएगी।
📜 आयत 26-30 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 28
सूरा अल-अंबिया आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो कुछ उनके सामने है और जो कुछ उनके पीछे…सूरा आयत 28/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








