अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَا يَسْبِقُونَهُ بِالْقَوْلِ: वे बोलने में उससे आगे नहीं बढ़ते, अर्थात् अल्लाह की अनुमति के बिना कोई बात नहीं कहते।
- وَهُم بِأَمْرِهِ يَعْمَلُونَ: और वे उसी के आदेश के अनुसार कार्य करते हैं।
तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों के ग़लत विचारों का खंडन करती है जो कहते हैं कि अल्लाह ने फ़रिश्तों को अपनी संतान बना लिया है। अल्लाह इससे पाक और परे है। फ़रिश्ते अल्लाह के सम्मानित और नेक बंदे हैं, न कि उसकी संतान। वे अल्लाह की इबादत में इतने डूबे रहते हैं कि उसके आदेश के बिना न तो कुछ बोलते हैं और न ही कोई कार्य करते हैं। उनका हर शब्द और हर अमल अल्लाह की मर्ज़ी के अधीन है। वे कभी अल्लाह के हुक्म से आगे नहीं बढ़ते और न ही उसके आदेश की अवहेलना करते हैं। यह फ़रिश्तों की सबसे बड़ी विशेषता है कि वे पूर्ण रूप से अल्लाह के आज्ञाकारी हैं और उसकी इबादत में कोई कसर नहीं छोड़ते।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा बंदा वही है जो अपने रब के आगे पूरी तरह समर्पण कर दे, अपनी ज़ुबान को अल्लाह की याद और सच्चाई के लिए इस्तेमाल करे, और अपने हर काम को अल्लाह की रज़ा के अनुसार करे। फ़रिश्तों की यह आदत हमारे लिए एक बेहतरीन नमूना है कि हम भी अपने जीवन में अल्लाह के आदेशों को सबसे ऊपर रखें। जब हम अपनी बातों और कर्मों को अल्लाह की मर्ज़ी के अनुसार ढाल लेंगे, तो हमारी ज़िंदगी में बरकत आएगी और हमें अल्लाह की रहमत हासिल होगी। यही ईमान की असली मिठास है कि बंदा अपने रब की रज़ा में अपनी सारी इच्छाओं को भुला दे। अल्लाह हमें भी फ़रिश्तों की तरह अपने आदेशों का पालन करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 25-29 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 27
सूरा अल-अंबिया आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये लोग उसके सामने बढ़कर बोल नहीं सकते और ये…सूरा आयत 27/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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