अल-अंबिया · 27/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
لَا يَسْبِقُونَهُ بِالْقَوْلِ وَهُم بِأَمْرِهِ يَعْمَلُونَ ۝٢٧
Laa yasbiqoonahoo bil qawli wa hum bi amrihee ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
ये लोग उसके सामने बढ़कर बोल नहीं सकते और ये लोग उसी के हुक्म पर चलते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَا يَسْبِقُونَهُ بِالْقَوْلِ: वे बोलने में उससे आगे नहीं बढ़ते, अर्थात् अल्लाह की अनुमति के बिना कोई बात नहीं कहते।
  • وَهُم بِأَمْرِهِ يَعْمَلُونَ: और वे उसी के आदेश के अनुसार कार्य करते हैं।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के ग़लत विचारों का खंडन करती है जो कहते हैं कि अल्लाह ने फ़रिश्तों को अपनी संतान बना लिया है। अल्लाह इससे पाक और परे है। फ़रिश्ते अल्लाह के सम्मानित और नेक बंदे हैं, न कि उसकी संतान। वे अल्लाह की इबादत में इतने डूबे रहते हैं कि उसके आदेश के बिना न तो कुछ बोलते हैं और न ही कोई कार्य करते हैं। उनका हर शब्द और हर अमल अल्लाह की मर्ज़ी के अधीन है। वे कभी अल्लाह के हुक्म से आगे नहीं बढ़ते और न ही उसके आदेश की अवहेलना करते हैं। यह फ़रिश्तों की सबसे बड़ी विशेषता है कि वे पूर्ण रूप से अल्लाह के आज्ञाकारी हैं और उसकी इबादत में कोई कसर नहीं छोड़ते।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा बंदा वही है जो अपने रब के आगे पूरी तरह समर्पण कर दे, अपनी ज़ुबान को अल्लाह की याद और सच्चाई के लिए इस्तेमाल करे, और अपने हर काम को अल्लाह की रज़ा के अनुसार करे। फ़रिश्तों की यह आदत हमारे लिए एक बेहतरीन नमूना है कि हम भी अपने जीवन में अल्लाह के आदेशों को सबसे ऊपर रखें। जब हम अपनी बातों और कर्मों को अल्लाह की मर्ज़ी के अनुसार ढाल लेंगे, तो हमारी ज़िंदगी में बरकत आएगी और हमें अल्लाह की रहमत हासिल होगी। यही ईमान की असली मिठास है कि बंदा अपने रब की रज़ा में अपनी सारी इच्छाओं को भुला दे। अल्लाह हमें भी फ़रिश्तों की तरह अपने आदेशों का पालन करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 25-29 — सूरा अल-अंबिया

25وَمَا أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ مِن رَّسُولٍ إِلَّا نُوحِي إِلَيْهِ أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدُونِ
तो (जब हक़ का ज़िक्र आता है) ये लोग मुँह फेर लेते हैं और (ऐ रसूल) हमने तुमसे पहले जब कभी कोई रसूल भेजा तो उसके पास ''वही'' भेजते रहे कि बस हमारे सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं तो मेरी इबादत किया करो
26وَقَالُوا اتَّخَذَ الرَّحْمَٰنُ وَلَدًا ۗ سُبْحَانَهُ ۚ بَلْ عِبَادٌ مُّكْرَمُونَ
और (अहले मक्का) कहते हैं कि खुदा ने (फरिश्तों को) अपनी औलाद (बेटियाँ) बना रखा है (हालाँकि) वह उससे पाक व पकीज़ा हैं बल्कि (वह फ़रिश्ते) (खुदा के) मोअज्ज़ि बन्दे हैं
27لَا يَسْبِقُونَهُ بِالْقَوْلِ وَهُم بِأَمْرِهِ يَعْمَلُونَ
ये लोग उसके सामने बढ़कर बोल नहीं सकते और ये लोग उसी के हुक्म पर चलते हैं
28يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يَشْفَعُونَ إِلَّا لِمَنِ ارْتَضَىٰ وَهُم مِّنْ خَشْيَتِهِ مُشْفِقُونَ
जो कुछ उनके सामने है और जो कुछ उनके पीछे है (ग़रज़ सब कुछ) वह (खुदा) जानता है और ये लोग उस शख्स के सिवा जिससे खुदा राज़ी हो किसी की सिफारिश भी नहीं करते और ये लोग खुद उसके ख़ौफ से (हर वक्त) ड़रते रहते हैं
29۞ وَمَن يَقُلْ مِنْهُمْ إِنِّي إِلَٰهٌ مِّن دُونِهِ فَذَٰلِكَ نَجْزِيهِ جَهَنَّمَ ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي الظَّالِمِينَ
और उनमें से जो कोई ये कह दे कि खुदा नहीं (बल्कि) मैं माबूद हूँ तो वह (मरदूद बारगाह हुआ) हम उसको जहन्नुम की सज़ा देंगे और सरकशों को हम ऐसी ही सज़ा देते हैं
अल-अंबियाकुरान सूची
112आयत
मक्कीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 27

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Saturday, October 3, 2026

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