अल-अंबिया · 40/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
بَلْ تَأْتِيهِم بَغْتَةً فَتَبْهَتُهُمْ فَلَا يَسْتَطِيعُونَ رَدَّهَا وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ ۝٤٠
Bal taateehim baghtatan fatabhatuhum falaa yastatee`oona raddahaa wa laa hum yunzaroon
📖 हिंदी अर्थ
(क़यामत कुछ जता कर तो आने से रही) बल्कि वह तो अचानक उन पर आ पड़ेगी और उन्हें हक्का बक्का कर देगी फिर उस वक्त उसमें न उसके हटाने की मजाल होगी और न उन्हें ही दी जाएगी
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अनुवाद — Tafsir

بَلْ تَأْتِيهِم بَغْتَةً فَتَبْهَتُهُمْ فَلَا يَسْتَطِيعُونَ رَدَّهَا وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ

शब्दों के अर्थ:

  • بَغْتَةً: अचानक, बिना किसी पूर्व सूचना के।
  • فَتَبْهَتُهُمْ: उन्हें हैरान और स्तब्ध कर देगी, उनकी समझ काम नहीं करेगी।
  • رَدَّهَا: उसे (आज़ाब को) टालना या रोकना।
  • يُنظَرُونَ: उन्हें मोहलत दी जाए, देर की जाए।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो मज़ाक़ उड़ाते हैं और क़यामत के आने में शक करते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह क़यामत या अज़ाब उनके पास अचानक आएगा, जब उन्हें इसका ज़रा भी एहसास न होगा। यह उन्हें इस तरह हैरान और स्तब्ध कर देगा कि उनकी अक्लें काम करना बंद कर देंगी, वे समझ ही नहीं पाएँगे कि क्या हो रहा है। उस वक़्त न तो वे उस अज़ाब को रोक सकेंगे और न ही उसे टाल सकेंगे, और न ही उन्हें कोई मोहलत दी जाएगी ताकि वे तौबा करें या माफ़ी माँगें। यह उनके लिए बिल्कुल अचानक और अपरिहार्य होगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त से आगाह करती है कि अल्लाह का अज़ाब और क़यामत का दिन कभी भी आ सकता है, बिल्कुल अचानक। इसलिए हमें चाहिए कि हम हर पल इसके लिए तैयार रहें, अपने गुनाहों से तौबा करें और अल्लाह की रहमत के तलबगार रहें। अल्लाह ने हमें ज़िंदगी का यह मौक़ा इसलिए दिया है ताकि हम उसकी इबादत करें और उसकी राह पर चलें। जो लोग इस मौक़े को हल्के में लेते हैं और मज़ाक़ उड़ाते हैं, वे बड़े नुक़सान में रहेंगे। लेकिन अल्लाह बड़ा मेहरबान है, उसने अपने रसूल ﷺ के ज़रिए हमें चेतावनी दे दी है ताकि हम सुधर जाएँ और उस अज़ाब से बच जाएँ जो किसी को पसंद नहीं। आओ, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ और उस दिन की तैयारी करें जब कोई मोहलत नहीं मिलेगी।

🎧 सुनें

📜 आयत 38-42 — अल-अंबिया

38وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और लुत्फ़ तो ये है कि कहते हैं कि अगर सच्चे हो तो ये क़यामत का वायदा कब (पूरा) होगा
39لَوْ يَعْلَمُ الَّذِينَ كَفَرُوا حِينَ لَا يَكُفُّونَ عَن وُجُوهِهِمُ النَّارَ وَلَا عَن ظُهُورِهِمْ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ
और जो लोग काफ़िर हो बैठे काश उस वक्त क़ी हालत से आगाह होते (कि जहन्नुम की आग में खडे होंगे) और न अपने चेहरों से आग को हटा सकेंगे और न अपनी पीठ से और न उनकी मदद की जाएगी
40بَلْ تَأْتِيهِم بَغْتَةً فَتَبْهَتُهُمْ فَلَا يَسْتَطِيعُونَ رَدَّهَا وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ
(क़यामत कुछ जता कर तो आने से रही) बल्कि वह तो अचानक उन पर आ पड़ेगी और उन्हें हक्का बक्का कर देगी फिर उस वक्त उसमें न उसके हटाने की मजाल होगी और न उन्हें ही दी जाएगी
41وَلَقَدِ اسْتُهْزِئَ بِرُسُلٍ مِّن قَبْلِكَ فَحَاقَ بِالَّذِينَ سَخِرُوا مِنْهُم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और (ऐ रसूल) कुछ तुम ही नहीं तुमसे पहले पैग़म्बरों के साथ मसख़रापन किया जा चुका है तो उन पैग़म्बरों से मसखरापन करने वालों को उस सख्त अज़ाब ने आ घेर लिया जिसकी वह हँसी उड़ाया करते थे
42قُلْ مَن يَكْلَؤُكُم بِاللَّيْلِ وَالنَّهَارِ مِنَ الرَّحْمَٰنِ ۗ بَلْ هُمْ عَن ذِكْرِ رَبِّهِم مُّعْرِضُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि खुदा (के अज़ाब) से (बचाने में) रात को या दिन को तुम्हारा कौन पहरा दे सकता है उस पर डरना तो दर किनार बल्कि ये लोग अपने परवरदिगार की याद से मुँह फेरते हैं
अल-अंबियाकुरान सूची
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अनुवाद — अल-अंबिया 40

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Tuesday, August 18, 2026

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