अल-अंबिया · 39/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
لَوْ يَعْلَمُ الَّذِينَ كَفَرُوا حِينَ لَا يَكُفُّونَ عَن وُجُوهِهِمُ النَّارَ وَلَا عَن ظُهُورِهِمْ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ ۝٣٩
Law ya`lamul lazeena kafaroo heena laa yakuffoona `anw wujoohihimun Naara wa laa `an zuhoorihim wa laa hum yunsaroon
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग काफ़िर हो बैठे काश उस वक्त क़ी हालत से आगाह होते (कि जहन्नुम की आग में खडे होंगे) और न अपने चेहरों से आग को हटा सकेंगे और न अपनी पीठ से और न उनकी मदद की जाएगी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا يَكُفُّونَ — वे रोक नहीं पाएंगे, हटा नहीं पाएंगे।
  • عَن وُجُوهِهِمُ النَّارَ — अपने चेहरों से आग को।
  • وَلَا عَن ظُهُورِهِمْ — और न ही अपनी पीठों से।
  • يُنصَرُونَ — उनकी सहायता की जाएगी, उन्हें बचाया जाएगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यदि ये काफ़िर — जो क़ियामत के दिन को झुठलाते हैं और मज़ाक़ उड़ाते हैं — उस घड़ी की हक़ीक़त को जान लेते, जब आग उन्हें हर तरफ़ से घेर लेगी, तो वे कभी भी कुफ़्र पर डटे न रहते और न ही अज़ाब को जल्दी माँगते। वे उस दिन न तो अपने चेहरों से आग को रोक पाएंगे और न ही अपनी पीठों से — आग उन्हें आगे से भी घेरेगी और पीछे से भी, और वे बिल्कुल असहाय होंगे। कोई नहीं होगा जो उन्हें बचा सके, कोई मददगार नहीं, कोई सिफ़ारिशी नहीं, कोई सहारा नहीं। अल्लाह की पकड़ से बचने के लिए न कोई ढाल होगी और न कोई पनाह।

यदि उन्हें इस दिन की सच्चाई का ज़रा सा भी इल्म होता, तो वे अज़ाब की जल्दी न माँगते और न कहते: "यह वादा कब आएगा?" क्योंकि जब वह दिन आएगा, तो पछतावा किसी काम न आएगा और न ही कोई मौका मिलेगा तौबा का।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम उस दिन के लिए क्या तैयारी कर रहे हैं? आज हम अपने चेहरे से एक मच्छर को भी नहीं हटा सकते, तो उस दिन आग को कैसे रोक पाएंगे? आज अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा खुला है — तौबा करो, अपने गुनाहों से बाज़ आओ, नमाज़ क़ायम करो, और अल्लाह की राह में भलाई के काम करो। यही वह रास्ता है जो हमें उस आग से बचा सकता है। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है — उसने हमें मौका दिया है, हिदायत दी है, और अपनी किताब में रास्ता दिखाया है। काश! हम उस दिन से पहले ही संभल जाएँ, जब संभलने का कोई मौका नहीं होगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 37-41 — अल-अंबिया

37خُلِقَ الْإِنسَانُ مِنْ عَجَلٍ ۚ سَأُرِيكُمْ آيَاتِي فَلَا تَسْتَعْجِلُونِ
आदमी तो बड़ा जल्दबाज़ पैदा किया गया है मैं अनक़रीब ही तुम्हें अपनी (कुदरत की) निशानियाँ दिखाऊँगा तो तुम मुझसे जल्दी की (द्दूम) न मचाओ
38وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और लुत्फ़ तो ये है कि कहते हैं कि अगर सच्चे हो तो ये क़यामत का वायदा कब (पूरा) होगा
39لَوْ يَعْلَمُ الَّذِينَ كَفَرُوا حِينَ لَا يَكُفُّونَ عَن وُجُوهِهِمُ النَّارَ وَلَا عَن ظُهُورِهِمْ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ
और जो लोग काफ़िर हो बैठे काश उस वक्त क़ी हालत से आगाह होते (कि जहन्नुम की आग में खडे होंगे) और न अपने चेहरों से आग को हटा सकेंगे और न अपनी पीठ से और न उनकी मदद की जाएगी
40بَلْ تَأْتِيهِم بَغْتَةً فَتَبْهَتُهُمْ فَلَا يَسْتَطِيعُونَ رَدَّهَا وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ
(क़यामत कुछ जता कर तो आने से रही) बल्कि वह तो अचानक उन पर आ पड़ेगी और उन्हें हक्का बक्का कर देगी फिर उस वक्त उसमें न उसके हटाने की मजाल होगी और न उन्हें ही दी जाएगी
41وَلَقَدِ اسْتُهْزِئَ بِرُسُلٍ مِّن قَبْلِكَ فَحَاقَ بِالَّذِينَ سَخِرُوا مِنْهُم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और (ऐ रसूल) कुछ तुम ही नहीं तुमसे पहले पैग़म्बरों के साथ मसख़रापन किया जा चुका है तो उन पैग़म्बरों से मसखरापन करने वालों को उस सख्त अज़ाब ने आ घेर लिया जिसकी वह हँसी उड़ाया करते थे
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अनुवाद — अल-अंबिया 39

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Tuesday, August 18, 2026

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