अल-अंबिया · 7/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
وَمَا أَرْسَلْنَا قَبْلَكَ إِلَّا رِجَالًا نُّوحِي إِلَيْهِمْ ۖ فَاسْأَلُوا أَهْلَ الذِّكْرِ إِن كُنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ ۝٧
Wa maaa arsalnaa qablaka illaa rijaalan nooheee ilaihim fas`aloo ahlaz zikri in kuntum laa ta`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
तो क्या ये लोग ईमान लाएँगे और ऐ रसूल हमने तुमसे पहले भी आदमियों ही को (रसूल बनाकर) भेजा था कि उनके पास ''वही'' भेजा करते थे तो अगर तुम लोग खुद नहीं जानते हो तो आलिमों से पूँछकर देखो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رِجَالًا: पुरुष (मर्द), इंसान।
  • نُّوحِي إِلَيْهِمْ: हम उनकी ओर वह्य (प्रकाशना) भेजते हैं।
  • أَهْلَ الذِّكْرِ: ज्ञान रखने वाले लोग, यानी पहले की किताबों (तौरात, इंजील) के विद्वान।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आपसे पहले हमने जितने भी रसूल भेजे, वे सभी इंसान ही थे — फ़रिश्ते नहीं। वे सामान्य मनुष्य थे, लेकिन हम उन पर अपना पैग़ाम (वह्य) उतारते थे। यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) रही है कि वह हमेशा इंसानों में से ही अपने पैग़म्बर चुनता है, ताकि वे लोगों के साथ रहकर उनकी भाषा में उन्हें समझा सकें और उनके जीवन का उदाहरण बन सकें।

अब ऐ मक्का के काफ़िरों! अगर तुम्हें यह बात मालूम नहीं कि अल्लाह के रसूल हमेशा इंसान ही होते हैं, तो उन लोगों से पूछ लो जिन्हें पहले की किताबों (तौरात और इंजील) का ज्ञान है। वे तुम्हें बता देंगे कि मूसा, ईसा और दूसरे नबी — सब इंसान ही थे। यह कोई नई बात नहीं है जो तुम्हें अजीब लगे।

दावत (नसीहत):

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम एक ऐसा दीन है जो अक्ल और इल्म को बहुत अहमियत देता है। अल्लाह तआला हमें हिदायत देते हैं कि जब हमें कोई बात न आती हो, तो हमें उन लोगों से पूछना चाहिए जिन्हें इल्म हासिल है। यही वजह है कि इस्लाम में इल्म हासिल करने की बहुत ताकीद की गई है। और सबसे बड़ी बात यह कि हमारे प्यारे नबी ﷺ भी एक इंसान थे — खाना खाते थे, बाज़ार जाते थे, और लोगों के साथ रहते थे। लेकिन उन पर अल्लाह की वह्य उतरती थी, जो उन्हें दूसरों से अलग करती थी। यह हमारे लिए सबसे बड़ी रहमत है कि हमारा रसूल इंसान है, ताकि हम उनकी सीरत (जीवन) को देखकर उन पर अमल कर सकें। क्या ही खूबसूरत बात है कि हमारा दीन हमें इल्म की तरफ बुलाता है और हमें जाहिल बनाकर नहीं रखता! आओ, हम भी इल्म हासिल करें और अपने दीन को समझें, ताकि हम सही रास्ते पर चल सकें।



📜 आयत 5-9 — अल-अंबिया

5بَلْ قَالُوا أَضْغَاثُ أَحْلَامٍ بَلِ افْتَرَاهُ بَلْ هُوَ شَاعِرٌ فَلْيَأْتِنَا بِآيَةٍ كَمَا أُرْسِلَ الْأَوَّلُونَ
(उस पर भी उन लोगों ने इक्तिफ़ा न की) बल्कि कहने लगे (ये कुरान तो) ख़ाबहाय परीशाँ का मजमूआ है बल्कि उसने खुद अपने जी से झूट-मूट गढ़ लिया है बल्कि ये शख्स शायर है और अगर हक़ीकतन रसूल है) तो जिस तरह अगले पैग़म्बर मौजिज़ों के साथ भेजे गए थे
6مَا آمَنَتْ قَبْلَهُم مِّن قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَاهَا ۖ أَفَهُمْ يُؤْمِنُونَ
उसी तरह ये भी कोई मौजिज़ा (जैसा हम कहें) हमारे पास भला लाए तो सही इनसे पहले जिन बस्तियों को तबाह कर डाला (मौजिज़े भी देखकर तो) ईमान न लाए
7وَمَا أَرْسَلْنَا قَبْلَكَ إِلَّا رِجَالًا نُّوحِي إِلَيْهِمْ ۖ فَاسْأَلُوا أَهْلَ الذِّكْرِ إِن كُنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
तो क्या ये लोग ईमान लाएँगे और ऐ रसूल हमने तुमसे पहले भी आदमियों ही को (रसूल बनाकर) भेजा था कि उनके पास ''वही'' भेजा करते थे तो अगर तुम लोग खुद नहीं जानते हो तो आलिमों से पूँछकर देखो
8وَمَا جَعَلْنَاهُمْ جَسَدًا لَّا يَأْكُلُونَ الطَّعَامَ وَمَا كَانُوا خَالِدِينَ
और हमने उन (पैग़म्बरों) के बदन ऐसे नहीं बनाए थे कि वह खाना न खाएँ और न वह (दुनिया में) हमेशा रहने सहने वाले थे
9ثُمَّ صَدَقْنَاهُمُ الْوَعْدَ فَأَنجَيْنَاهُمْ وَمَن نَّشَاءُ وَأَهْلَكْنَا الْمُسْرِفِينَ
फिर हमने उन्हें (अपना अज़ाब का) वायदा सच्चा कर दिखाया (और जब अज़ाब आ पहुँचा) तो हमने उन पैग़म्बरों को और जिस जिसको चाहा छुटकारा दिया और हद से बढ़ जाने वालों को हलाक कर डाला
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अनुवाद — अल-अंबिया 7

सूरा अल-अंबिया आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या ये लोग ईमान लाएँगे और ऐ रसूल हमने…

सूरा आयत 7/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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