अल-अंबिया · 65/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
ثُمَّ نُكِسُوا عَلَىٰ رُءُوسِهِمْ لَقَدْ عَلِمْتَ مَا هَٰؤُلَاءِ يَنطِقُونَ ۝٦٥
Summa nukisoo `alaa ru`oosihim laqad `alimta maa haaa`ulaaa`i yantiqoon
📖 हिंदी अर्थ
फिर उन लोगों के सर इसी गुमराही में झुका दिए गए (और तो कुछ बन न पड़ा मगर ये बोले) तुमको तो अच्छी तरह मालूम है कि ये बुत बोला नहीं करते
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نُكِسُوا – उल्टे कर दिए गए, पलट दिए गए (यानी अपनी ही दलील में उलझकर रह गए)
  • عَلَىٰ رُءُوسِهِمْ – अपने सिरों के बल (यानी शर्मिंदा होकर सिर झुका लिया)
  • لَقَدْ عَلِمْتَ – तुम तो अच्छी तरह जानते हो
  • مَا هَٰؤُلَاءِ يَنطِقُونَ – ये (मूर्तियाँ) बोलती नहीं हैं

तफसीर (व्याख्या):

हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने जब अपनी क़ौम के सामने मूर्तियों की बेबसी और बेजुबानी को साबित कर दिया, और उन्हें चुनौती दी कि इन मूर्तियों से पूछो कि उन्होंने क्या किया है, तो उनकी क़ौम के लोग एक पल के लिए अपनी गलती मानने पर मजबूर हो गए। उन्होंने कहा, "तूने तो यह काम किया है" — यानी उन्होंने अपने ज़ुल्म का इक़रार कर लिया। लेकिन फिर उनका जुनून और हठधर्मिता उन पर हावी हो गई, और वे अपनी उसी पुरानी जिद और कुफ्र की ओर पलट गए। उन्होंने सिर झुका लिया और शर्मिंदा होकर कहने लगे: "तू तो अच्छी तरह जानता है कि ये मूर्तियाँ बोलती नहीं हैं, फिर तू हमें इनसे पूछने को क्यों कहता है?"

यानी उन्होंने खुद अपनी ज़ुबान से गवाही दे दी कि ये मूर्तियाँ न तो बोल सकती हैं, न सुन सकती हैं, न कुछ कर सकती हैं। और इस तरह उनकी यही दलील उनके खिलाफ सबूत बन गई। अगर ये मूर्तियाँ बोल भी नहीं सकतीं, तो वे पूजा के लायक कैसे हो सकती हैं? जो खुद किसी काम की नहीं, वह किसी की मदद कैसे कर सकती है?

दावती पहलू (शिक्षाप्रद बात):

यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि सच्चाई की कितनी भी साफ दलील दी जाए, हठधर्मी इंसान अपनी जिद पर अड़ा रहता है। लेकिन अल्लाह तआला अपने नबियों की मदद करता है और सच्चाई को बुलंद करता है। आज भी जब इंसान अपनी अक्ल और दिल से सोचे, तो वह इस्लाम की सच्चाई को आसानी से समझ सकता है। कुरआन और सुन्नत की रोशनी में हर सवाल का जवाब मौजूद है। अल्लाह तआला हमें हक़ को कबूल करने और जिद से बचने की तौफीक दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 63-67 — अल-अंबिया

63قَالَ بَلْ فَعَلَهُ كَبِيرُهُمْ هَٰذَا فَاسْأَلُوهُمْ إِن كَانُوا يَنطِقُونَ
इबराहीम ने कहा बल्कि ये हरकत इन बुतों (खुदाओं) के बड़े (खुदा) ने की है तो अगर ये बुत बोल सकते हों तो उनही से पूछ देखो
64فَرَجَعُوا إِلَىٰ أَنفُسِهِمْ فَقَالُوا إِنَّكُمْ أَنتُمُ الظَّالِمُونَ
इस पर उन लोगों ने अपने जी में सोचा तो (एक दूसरे से) कहने लगे बेशक तुम ही लोग खुद बर सरे नाहक़ हो
65ثُمَّ نُكِسُوا عَلَىٰ رُءُوسِهِمْ لَقَدْ عَلِمْتَ مَا هَٰؤُلَاءِ يَنطِقُونَ
फिर उन लोगों के सर इसी गुमराही में झुका दिए गए (और तो कुछ बन न पड़ा मगर ये बोले) तुमको तो अच्छी तरह मालूम है कि ये बुत बोला नहीं करते
66قَالَ أَفَتَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَنفَعُكُمْ شَيْئًا وَلَا يَضُرُّكُمْ
(फिर इनसे क्या पूछे) इबराहीम ने कहा तो क्या तुम लोग खुदा को छोड़कर ऐसी चीज़ों की परसतिश करते हो जो न तुम्हें कुछ नफा ही पहुँचा सकती है और न तुम्हारा कुछ नुक़सान ही कर सकती है
67أُفٍّ لَّكُمْ وَلِمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ ۖ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
तफ है तुम पर उस चीज़ पर जिसे तुम खुदा के सिवा पूजते हो तो क्या तुम इतना भी नहीं समझते
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अनुवाद — अल-अंबिया 65

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सूरा आयत 65/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 63–67. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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