अल-अंबिया · 66/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
قَالَ أَفَتَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَنفَعُكُمْ شَيْئًا وَلَا يَضُرُّكُمْ ۝٦٦
Qaala afata`budoona min doonil laahi maa laa yanfa`ukum shai`anw wa laa yadurrukum
📖 हिंदी अर्थ
(फिर इनसे क्या पूछे) इबराहीम ने कहा तो क्या तुम लोग खुदा को छोड़कर ऐसी चीज़ों की परसतिश करते हो जो न तुम्हें कुछ नफा ही पहुँचा सकती है और न तुम्हारा कुछ नुक़सान ही कर सकती है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अफ़तअ्बुदून: क्या तुम इबादत करते हो?
  • मिन दूनिल्लाह: अल्लाह को छोड़कर
  • ला यन्फ़उकुम शैअन: तुम्हें किसी चीज़ का कोई लाभ नहीं पहुँचाता
  • वला यज़ुर्रुकुम: और न ही तुम्हें कोई नुक़्सान पहुँचाता है

तफ़सीर:

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को उनके शिर्क और बुत-परस्ती पर शर्मिंदा करते हुए फ़रमाया: "क्या तुम अल्लाह को छोड़कर उन चीज़ों की इबादत करते हो जो न तो तुम्हें कोई फ़ायदा पहुँचा सकती हैं और न ही कोई नुक़्सान?"

यानी जब ये माबूद ख़ुद अपने लिए किसी भलाई या बुराई को दूर नहीं कर सकते, तो वे तुम्हारे लिए क्या करेंगे? ये पत्थर और मूर्तियाँ न तो किसी को फ़ायदा दे सकती हैं, न किसी से कोई मुसीबत टाल सकती हैं। न इनमें सुनने की शक्ति है, न देखने की, न समझने की। फिर इन्हें पूजना कैसी नादानी है?

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने यह बात उन्हें समझाने और उनकी अक़्ल को जगाने के लिए कही, ताकि वे अपनी ग़लती पर ग़ौर करें। उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: "क्या तुम अक़्ल से काम नहीं लेते? क्या तुम्हें यह समझ नहीं आता कि जो चीज़ ख़ुद बेजान है, वह तुम्हें क्या फ़ायदा देगी?"

यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को चाहिए कि वह केवल अल्लाह की इबादत करे, क्योंकि वही है जो नुक़्सान और फ़ायदे का मालिक है। अल्लाह के सिवा जो भी है, वह बेबस और लाचार है। जो इंसान अल्लाह को छोड़कर किसी और से उम्मीद रखता है, वह सिर्फ़ अपने आप को धोखा देता है।

यही तौहीद का पैग़ाम है — सिर्फ़ अल्लाह ही इबादत के लायक़ है, क्योंकि वही सब कुछ करने पर क़ादिर है। जो लोग इस हक़ीक़त को समझ जाएँ, वे कभी किसी मख़लूक़ के आगे सर नहीं झुकाएँगे। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 64-68 — सूरा अल-अंबिया

64فَرَجَعُوا إِلَىٰ أَنفُسِهِمْ فَقَالُوا إِنَّكُمْ أَنتُمُ الظَّالِمُونَ
इस पर उन लोगों ने अपने जी में सोचा तो (एक दूसरे से) कहने लगे बेशक तुम ही लोग खुद बर सरे नाहक़ हो
65ثُمَّ نُكِسُوا عَلَىٰ رُءُوسِهِمْ لَقَدْ عَلِمْتَ مَا هَٰؤُلَاءِ يَنطِقُونَ
फिर उन लोगों के सर इसी गुमराही में झुका दिए गए (और तो कुछ बन न पड़ा मगर ये बोले) तुमको तो अच्छी तरह मालूम है कि ये बुत बोला नहीं करते
66قَالَ أَفَتَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَنفَعُكُمْ شَيْئًا وَلَا يَضُرُّكُمْ
(फिर इनसे क्या पूछे) इबराहीम ने कहा तो क्या तुम लोग खुदा को छोड़कर ऐसी चीज़ों की परसतिश करते हो जो न तुम्हें कुछ नफा ही पहुँचा सकती है और न तुम्हारा कुछ नुक़सान ही कर सकती है
67أُفٍّ لَّكُمْ وَلِمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ ۖ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
तफ है तुम पर उस चीज़ पर जिसे तुम खुदा के सिवा पूजते हो तो क्या तुम इतना भी नहीं समझते
68قَالُوا حَرِّقُوهُ وَانصُرُوا آلِهَتَكُمْ إِن كُنتُمْ فَاعِلِينَ
(आख़िर) वह लोग (बाहम) कहने लगे कि अगर तुम कुछ कर सकते हो तो इबराहीम को आग में जला दो और अपने खुदाओं की मदद करो
अल-अंबियाकुरान सूची
112आयत
मक्कीअवतरण स्थान
66आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 66

सूरा अल-अंबिया आयत 66 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (फिर इनसे क्या पूछे) इबराहीम ने कहा तो क्या तुम…

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Saturday, October 3, 2026

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