अल-अंबिया · 72/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
وَوَهَبْنَا لَهُ إِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ نَافِلَةً ۖ وَكُلًّا جَعَلْنَا صَالِحِينَ ۝٧٢
Wa wahabnaa lahooo Ishaaq; wa Ya`qooba naafilah; wa kullan ja`alnaa saaliheen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने इबराहीम को इनाम में इसहाक़ (जैसा बैटा) और याकूब (जैसा पोता) इनायत फरमाया हमने सबको नेक बख्त बनाया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नाफ़िला (نَافِلَةً): अतिरिक्त उपहार, बढ़ाकर दिया गया, वह चीज़ जो माँगे बिना ही अल्लाह की ओर से मिल जाए।
  • सालिहीन (صَالِحِينَ): नेक, पवित्र, अल्लाह के आज्ञाकारी और भले कर्म करने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने प्यारे नबी हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) पर अपनी असीम कृपा की। जब हज़रत इब्राहीम ने बुढ़ापे में अल्लाह से एक नेक औलाद की दुआ माँगी, तो अल्लाह ने उन्हें हज़रत इशाक़ (अलैहिस्सलाम) जैसा धर्मपुत्र अता किया। यह उनकी दुआ का जवाब था। लेकिन अल्लाह की रहमत इससे भी बढ़कर थी—उसने उन्हें एक और बड़ी नेमत दी, वह थी हज़रत इशाक़ के बेटे हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) को उनकी नस्ल में शामिल करना। यह "नाफ़िला" यानी अतिरिक्त उपहार था, जो उन्होंने माँगा नहीं था, बल्कि अल्लाह ने अपनी ओर से बढ़कर दिया। और इन तीनों—इब्राहीम, इशाक़ और याक़ूब—को अल्लाह ने सालिहीन बनाया, यानी उन्हें नेकी, पवित्रता और आज्ञाकारिता का ऐसा उच्च मुकाम दिया कि वे पूरी उम्मत के लिए आदर्श बन गए।

दावत और सीख:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा कभी बंद नहीं होता। जब बंदा अल्लाह से सच्चे दिल से दुआ करता है, तो अल्लाह उसे सिर्फ़ उसकी माँग ही नहीं देता, बल्कि उससे कहीं ज़्यादा देता है। हज़रत इब्राहीम ने एक बेटा माँगा, अल्लाह ने उन्हें बेटा भी दिया और पोता भी, और वह भी ऐसा नेक कि उनके ज़रिए अल्लाह की रहमत आगे तक पहुँची। यह हमें बताता है कि अल्लाह से जुड़ा हुआ बंदा कभी खाली नहीं लौटता। आज हमें भी चाहिए कि हम अपनी दुआओं में अल्लाह से नेक औलाद, नेक जीवन और नेक अंजाम माँगें, और यक़ीन रखें कि अल्लाह हमें हमारी उम्मीद से बढ़कर देगा। साथ ही, यह भी सीख मिलती है कि असली कामयाबी दुनिया की दौलत नहीं, बल्कि नेकी और अल्लाह की आज्ञाकारिता है—यही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह के करीब करती है और उसकी नस्ल को भी सदा के लिए यादगार बना देती है।



📜 आयत 70-74 — सूरा अल-अंबिया

70وَأَرَادُوا بِهِ كَيْدًا فَجَعَلْنَاهُمُ الْأَخْسَرِينَ
(कि उनको कोई तकलीफ़ न पहुँचे) और उन लोगों में इबराहीम के साथ चालबाज़ी करनी चाही थी तो हमने इन सब को नाकाम कर दिया
71وَنَجَّيْنَاهُ وَلُوطًا إِلَى الْأَرْضِ الَّتِي بَارَكْنَا فِيهَا لِلْعَالَمِينَ
और हम ने ही इबराहीम और लूत को (सरकशों से) सही व सालिम निकालकर इस सर ज़मीन (शाम बैतुलमुक़द्दस) में जा पहुँचाया जिसमें हमने सारे जहाँन के लिए तरह-तरह की बरकत अता की थी
72وَوَهَبْنَا لَهُ إِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ نَافِلَةً ۖ وَكُلًّا جَعَلْنَا صَالِحِينَ
और हमने इबराहीम को इनाम में इसहाक़ (जैसा बैटा) और याकूब (जैसा पोता) इनायत फरमाया हमने सबको नेक बख्त बनाया
73وَجَعَلْنَاهُمْ أَئِمَّةً يَهْدُونَ بِأَمْرِنَا وَأَوْحَيْنَا إِلَيْهِمْ فِعْلَ الْخَيْرَاتِ وَإِقَامَ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءَ الزَّكَاةِ ۖ وَكَانُوا لَنَا عَابِدِينَ
और उन सबको (लोगों का) पेशवा बनाया कि हमारे हुक्म से (उनकी) हिदायत करते थे और हमने उनके पास नेक काम करने और नमाज़ पढ़ने और ज़कात देने की ''वही'' भेजी थी और ये सब के सब हमारी ही इबादत करते थे
74وَلُوطًا آتَيْنَاهُ حُكْمًا وَعِلْمًا وَنَجَّيْنَاهُ مِنَ الْقَرْيَةِ الَّتِي كَانَت تَّعْمَلُ الْخَبَائِثَ ۗ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمَ سَوْءٍ فَاسِقِينَ
और लूत को भी हम ही के फ़हमे सलीम और नबूवत अता की और हम ही ने उस बस्ती से जहाँ के लोग बदकारियाँ करते थे नजात दी इसमें शक नहीं कि वह लोग बड़े बदकार आदमी थे
अल-अंबियाकुरान सूची
112आयत
मक्कीअवतरण स्थान
72आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 72

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Friday, October 2, 2026

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