अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَاسْتَجَبْنَا لَهُ – हमने उसकी पुकार सुन ली और उसकी दुआ क़बूल कर ली।
- فَكَشَفْنَا – हमने दूर कर दिया।
- مَا بِهِ مِن ضُرٍّ – जो कष्ट और पीड़ा उसे लगी हुई थी।
- وَآتَيْنَاهُ أَهْلَهُ – हमने उसे उसका परिवार लौटा दिया।
- وَمِثْلَهُم مَّعَهُمْ – और उनके साथ उतनी ही संख्या और बढ़ा दी।
- رَحْمَةً مِّنْ عِندِنَا – यह हमारी ओर से विशेष दया और कृपा थी।
- وَذِكْرَىٰ لِلْعَابِدِينَ – और यह इबादत करने वालों के लिए एक शिक्षा और नसीहत है।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अय्यूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से दुआ की, अपनी बीमारी, तकलीफ़ और मुसीबत की शिकायत उसके सामने रखी, तो अल्लाह तआला ने उनकी दुआ क़बूल फ़रमाई। उनकी पुकार सुनते ही अल्लाह ने उन पर से हर तरह का कष्ट दूर कर दिया—चाहे वह शारीरिक बीमारी हो, मानसिक पीड़ा हो या आर्थिक तंगी। अल्लाह ने उन्हें उनका परिवार लौटा दिया, जो उनसे बिछड़ गया था, और उस पर भी उतनी ही संख्या और बढ़ा दी। यानी जितने बच्चे और अहल-ओ-अयाल पहले थे, उतने ही और दे दिए, ताकि उनकी खुशी दुगनी हो जाए।
यह सब कुछ अल्लाह की ओर से महज़ रहमत थी—एक ऐसी दया जो अय्यूब (अलैहिस्सलाम) के सब्र और शुक्र का फल थी। अल्लाह ने यह कारनामा सिर्फ़ अय्यूब की खातिर नहीं किया, बल्कि इसे सब इबादत करने वालों के लिए एक नसीहत और यादगार बना दिया। इससे हर उस बंदे को सबक़ मिलता है जो मुसीबत में घिरा हो, कि सब्र और दुआ ही कामयाबी की कुंजी है। जो लोग अल्लाह की इबादत करते हैं और उसकी राह में सब्र करते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास इनाम और रहमत का खज़ाना है।
यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि मुसीबतें और आज़माइशें अल्लाह की तरफ़ से होती हैं, लेकिन उसके बाद राहत और इनाम भी उसी की तरफ़ से आता है। अय्यूब (अलैहिस्सलाम) ने जितने साल तकलीफ़ सही, उतनी ही बड़ी नेमत उन्हें मिली। अल्लाह किसी बंदे को उसके सब्र से बढ़कर इनाम देता है। यही वजह है कि अल्लाह ने इस घटना को "ज़िक्रा लिल-आबिदीन" कहा—यानी इबादत करने वालों के लिए एक यादगार नसीहत, ताकि वे जानें कि सब्र का अंजाम कितना प्यारा होता है।
इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि दुआ में ज़िद और लगन होनी चाहिए। अय्यूब (अलैहिस्सलाम) ने हार नहीं मानी, बल्कि अपने रब से लिपटे रहे। अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो उसकी दरगाह से उम्मीद नहीं तोड़ते। तो आइए, हम भी अपनी हर मुसीबत में अल्लाह की तरफ़ रुजू करें, सब्र करें और यक़ीन रखें कि अल्लाह की रहमत हर ग़म से बड़ी है।
📜 आयत 82-86 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 84
सूरा अल-अंबिया आयत 84 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो हमने उनकी दुआ कुबूल की तो हमने उनका जो…सूरा आयत 84/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 82–86. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








