अल-अंबिया · 85/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
وَإِسْمَاعِيلَ وَإِدْرِيسَ وَذَا الْكِفْلِ ۖ كُلٌّ مِّنَ الصَّابِرِينَ ۝٨٥
Wa Ismaa`eela wa Idreesa wa Zal Kifli kullum minas saabireen
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) इसमाईल और इदरीस और जुलकिफ्ल (के वाक़यात से याद करो) ये सब साबिर बन्दे थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • इस्माईल (إِسْمَاعِيلَ): हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के बेटे, अरब के नबी।
  • इदरीस (إِدْرِيسَ): अल्लाह के नबी, जिनका ज़िक्र कुरआन में आया है।
  • ज़ुल-किफ्ल (ذَا الْكِفْلِ): अल्लाह के नबियों में से एक नबी, जिन्हें यह उपाधि दी गई।
  • साबिरीन (الصَّابِرِينَ): सब्र करने वाले, धैर्य रखने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबियों का ज़िक्र करते हुए फ़रमाता है कि हे नबी! आप इस्माईल, इदरीस और ज़ुल-किफ्ल (अलैहिमुस्सलाम) का ज़िक्र करें। ये तीनों महान नबी उन लोगों में से थे जिन्होंने अल्लाह की आज्ञा का पालन करने में, उसकी मनाही से बचने में, और उसके फ़ैसलों पर रज़ा रखने में अद्भुत सब्र और धैर्य का प्रदर्शन किया।

हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम ने अपने पिता इब्राहीम अलैहिस्सलाम के साथ अल्लाह के आदेश पर कुर्बानी के लिए खुद को पेश किया और इस पर सब्र किया। हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम उच्च आचरण, इबादत और ज्ञान में अपने समय के सबसे आगे थे। हज़रत ज़ुल-किफ्ल अलैहिस्सलाम भी अपने वादे को पूरा करने, न्याय करने और अल्लाह के कामों में सब्र करने के लिए प्रसिद्ध थे।

इन नबियों का सब्र केवल मुसीबतों पर सब्र नहीं था, बल्कि वे अल्लाह की इबादत पर, उसके आदेशों के पालन पर, और उसकी राह में आने वाली कठिनाइयों पर भी सब्र करने वाले थे। उन्होंने अपने जीवन में हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखा और उसकी रज़ा पर राज़ी रहे। इसी सब्र की बदौलत अल्लाह ने उन्हें सच्चाई, ईमानदारी और उच्च पदों से नवाज़ा और उन्हें दुनिया में अच्छी यादगार और आख़िरत में बड़ा मुक़ाम अता किया।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि सब्र एक ऐसा गुण है जो अल्लाह के नबियों की पहचान था। आज हमें भी अपने जीवन में सब्र को अपनाना चाहिए—चाहे मुसीबतें आएँ, परेशानियाँ हों, या अल्लाह की इबादत में कठिनाई हो। सब्र ही वह चाबी है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत और उसकी रहमत तक पहुँचाती है। जब हम सब्र करते हैं, तो अल्लाह हमें इज़्ज़त देता है, हमारे दिल को सुकून देता है, और हमारे लिए बेहतर रास्ते खोलता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम इन नबियों के नक्शे-क़दम पर चलें, अपने जीवन में धैर्य और सब्र को अपनाएँ, और अल्लाह पर पूरा भरोसा रखें। याद रखें, सब्र का फल हमेशा मीठा होता है—दुनिया में भी और आख़िरत में भी।

🎧 सुनें

📜 आयत 83-87 — अल-अंबिया

83۞ وَأَيُّوبَ إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُ أَنِّي مَسَّنِيَ الضُّرُّ وَأَنتَ أَرْحَمُ الرَّاحِمِينَ
(कि भाग न जाएँ) और (ऐ रसूल) अय्यूब (का क़िस्सा याद करो) जब उन्होंने अपने परवरदिगार से दुआ की कि (ख़ुदा वन्द) बीमारी तो मेरे पीछे लग गई है और तू तो सब रहम करने वालोंसे (बढ़ कर है मुझ पर तरस खा)
84فَاسْتَجَبْنَا لَهُ فَكَشَفْنَا مَا بِهِ مِن ضُرٍّ ۖ وَآتَيْنَاهُ أَهْلَهُ وَمِثْلَهُم مَّعَهُمْ رَحْمَةً مِّنْ عِندِنَا وَذِكْرَىٰ لِلْعَابِدِينَ
तो हमने उनकी दुआ कुबूल की तो हमने उनका जो कुछ दर्द दुख था दफ़ा कर दिया और उन्हें उनके लड़के वाले बल्कि उनके साथ उतनी ही और भी महज़ अपनी ख़ास मेहरबानी से और इबादत करने वालों की इबरत के वास्ते अता किए
85وَإِسْمَاعِيلَ وَإِدْرِيسَ وَذَا الْكِفْلِ ۖ كُلٌّ مِّنَ الصَّابِرِينَ
और (ऐ रसूल) इसमाईल और इदरीस और जुलकिफ्ल (के वाक़यात से याद करो) ये सब साबिर बन्दे थे
86وَأَدْخَلْنَاهُمْ فِي رَحْمَتِنَا ۖ إِنَّهُم مِّنَ الصَّالِحِينَ
और हमने उन सबको अपनी (ख़ास) रहमत में दाख़िल कर लिया बेशक ये लोग नेक बन्दे थे
87وَذَا النُّونِ إِذ ذَّهَبَ مُغَاضِبًا فَظَنَّ أَن لَّن نَّقْدِرَ عَلَيْهِ فَنَادَىٰ فِي الظُّلُمَاتِ أَن لَّا إِلَٰهَ إِلَّا أَنتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنتُ مِنَ الظَّالِمِينَ
और जुन्नून (यूनुस को याद करो) जबकि गुस्से में आकर चलते हुए और ये ख्याल न किया कि हम उन पर रोज़ी तंग न करेंगे (तो हमने उन्हें मछली के पेट में पहुँचा दिया) तो (घटाटोप) अंधेरे में (घबराकर) चिल्ला उठा कि (परवरदिगार) तेरे सिवा कोई माबूद नहीं तू (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है बेशक मैं कुसूरवार हूँ
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अनुवाद — अल-अंबिया 85

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सूरा आयत 85/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 83–87. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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