अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- رَحْمَتِنَا: हमारी रहमत (दया) — यहाँ अल्लाह की विशेष रहमत से मुराद नबुव्वत (पैग़म्बरी) और जन्नत है।
- الصَّالِحِينَ: नेक और सच्चे लोग, जिनका बातिन (भीतर) और ज़ाहिर (बाहर) दोनों अच्छे हों।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपने नेक बंदों — हज़रत इज़्माईल, इदरीस और ज़ुल-किफ़्ल (अलैहिमुस्सलाम) — का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि हमने उन्हें अपनी ख़ास रहमत में दाख़िल किया। यह रहमत उन्हें नबुव्वत (पैग़म्बरी) की शक्ल में मिली, और आख़िरत में उन्हें जन्नत में दाख़िल किया जाएगा। यह अल्लाह की तरफ़ से उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान और इनाम है।
फिर अल्लाह ने उनकी तारीफ़ में फ़रमाया: "वे सचमुच नेक लोगों में से थे।" यानी उनके अंदर और बाहर दोनों पाक और साफ़ थे। उन्होंने अपने रब की इताअत (आज्ञाकारिता) में पूरी ज़िंदगी गुज़ारी, और उनके दिल, उनके अमल, उनकी नीयत — सब कुछ अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ था। नबियों का सलाह (नेकी) इस क़दर मुकम्मल होता है कि उसमें किसी तरह की कोई कमी या खोट नहीं होती, क्योंकि अल्लाह ने उन्हें इस फ़ितरत पर पैदा किया और हर बुराई से महफ़ूज़ रखा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत उन लोगों को मिलती है जो सच्चे दिल से नेकी अपनाते हैं। नेकी का मतलब सिर्फ़ ज़ाहिरी इबादत नहीं, बल्कि दिल की सफ़ाई, नीयत की दुरुस्ती और अमल की पाबंदी भी है। जब इंसान अपने अंदर और बाहर को सुधार लेता है, तो अल्लाह उसे अपनी ख़ास रहमत से नवाज़ता है — दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में जन्नत। हमें चाहिए कि हम इन नबियों के रास्ते पर चलें, अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत में ढालें, और उनकी तरह सच्चे और नेक बनने की कोशिश करें। याद रखें, अल्लाह की रहमत की कोई हद नहीं, बस ज़रूरत है सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करने की।
📜 आयत 84-88 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 86
सूरा अल-अंबिया आयत 86 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने उन सबको अपनी (ख़ास) रहमत में दाख़िल कर…सूरा आयत 86/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 84–88. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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