अल-अंबिया · 86/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
وَأَدْخَلْنَاهُمْ فِي رَحْمَتِنَا ۖ إِنَّهُم مِّنَ الصَّالِحِينَ ۝٨٦
Wa adkhalnaahum fee rahmatinaa innahum minas saaliheen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने उन सबको अपनी (ख़ास) रहमत में दाख़िल कर लिया बेशक ये लोग नेक बन्दे थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • رَحْمَتِنَا: हमारी रहमत (दया) — यहाँ अल्लाह की विशेष रहमत से मुराद नबुव्वत (पैग़म्बरी) और जन्नत है।
  • الصَّالِحِينَ: नेक और सच्चे लोग, जिनका बातिन (भीतर) और ज़ाहिर (बाहर) दोनों अच्छे हों।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपने नेक बंदों — हज़रत इज़्माईल, इदरीस और ज़ुल-किफ़्ल (अलैहिमुस्सलाम) — का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि हमने उन्हें अपनी ख़ास रहमत में दाख़िल किया। यह रहमत उन्हें नबुव्वत (पैग़म्बरी) की शक्ल में मिली, और आख़िरत में उन्हें जन्नत में दाख़िल किया जाएगा। यह अल्लाह की तरफ़ से उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान और इनाम है।

फिर अल्लाह ने उनकी तारीफ़ में फ़रमाया: "वे सचमुच नेक लोगों में से थे।" यानी उनके अंदर और बाहर दोनों पाक और साफ़ थे। उन्होंने अपने रब की इताअत (आज्ञाकारिता) में पूरी ज़िंदगी गुज़ारी, और उनके दिल, उनके अमल, उनकी नीयत — सब कुछ अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ था। नबियों का सलाह (नेकी) इस क़दर मुकम्मल होता है कि उसमें किसी तरह की कोई कमी या खोट नहीं होती, क्योंकि अल्लाह ने उन्हें इस फ़ितरत पर पैदा किया और हर बुराई से महफ़ूज़ रखा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत उन लोगों को मिलती है जो सच्चे दिल से नेकी अपनाते हैं। नेकी का मतलब सिर्फ़ ज़ाहिरी इबादत नहीं, बल्कि दिल की सफ़ाई, नीयत की दुरुस्ती और अमल की पाबंदी भी है। जब इंसान अपने अंदर और बाहर को सुधार लेता है, तो अल्लाह उसे अपनी ख़ास रहमत से नवाज़ता है — दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में जन्नत। हमें चाहिए कि हम इन नबियों के रास्ते पर चलें, अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत में ढालें, और उनकी तरह सच्चे और नेक बनने की कोशिश करें। याद रखें, अल्लाह की रहमत की कोई हद नहीं, बस ज़रूरत है सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करने की।



📜 आयत 84-88 — अल-अंबिया

84فَاسْتَجَبْنَا لَهُ فَكَشَفْنَا مَا بِهِ مِن ضُرٍّ ۖ وَآتَيْنَاهُ أَهْلَهُ وَمِثْلَهُم مَّعَهُمْ رَحْمَةً مِّنْ عِندِنَا وَذِكْرَىٰ لِلْعَابِدِينَ
तो हमने उनकी दुआ कुबूल की तो हमने उनका जो कुछ दर्द दुख था दफ़ा कर दिया और उन्हें उनके लड़के वाले बल्कि उनके साथ उतनी ही और भी महज़ अपनी ख़ास मेहरबानी से और इबादत करने वालों की इबरत के वास्ते अता किए
85وَإِسْمَاعِيلَ وَإِدْرِيسَ وَذَا الْكِفْلِ ۖ كُلٌّ مِّنَ الصَّابِرِينَ
और (ऐ रसूल) इसमाईल और इदरीस और जुलकिफ्ल (के वाक़यात से याद करो) ये सब साबिर बन्दे थे
86وَأَدْخَلْنَاهُمْ فِي رَحْمَتِنَا ۖ إِنَّهُم مِّنَ الصَّالِحِينَ
और हमने उन सबको अपनी (ख़ास) रहमत में दाख़िल कर लिया बेशक ये लोग नेक बन्दे थे
87وَذَا النُّونِ إِذ ذَّهَبَ مُغَاضِبًا فَظَنَّ أَن لَّن نَّقْدِرَ عَلَيْهِ فَنَادَىٰ فِي الظُّلُمَاتِ أَن لَّا إِلَٰهَ إِلَّا أَنتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنتُ مِنَ الظَّالِمِينَ
और जुन्नून (यूनुस को याद करो) जबकि गुस्से में आकर चलते हुए और ये ख्याल न किया कि हम उन पर रोज़ी तंग न करेंगे (तो हमने उन्हें मछली के पेट में पहुँचा दिया) तो (घटाटोप) अंधेरे में (घबराकर) चिल्ला उठा कि (परवरदिगार) तेरे सिवा कोई माबूद नहीं तू (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है बेशक मैं कुसूरवार हूँ
88فَاسْتَجَبْنَا لَهُ وَنَجَّيْنَاهُ مِنَ الْغَمِّ ۚ وَكَذَٰلِكَ نُنجِي الْمُؤْمِنِينَ
तो हमने उनकी दुआ कुबूल की और उन्हें रंज से नजात दी और हम तो ईमानवालों को यूँ ही नजात दिया करते हैं
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अनुवाद — अल-अंबिया 86

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Tuesday, August 18, 2026

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