अल-अंबिया · 98/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
إِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ حَصَبُ جَهَنَّمَ أَنتُمْ لَهَا وَارِدُونَ ۝٩٨
Innakum wa maa ta`budoona min doonil laahi hasabu Jahannama antum lahaa waaridoon
📖 हिंदी अर्थ
(उस दिन किहा जाएगा कि ऐ कुफ्फ़ार) तुम और जिस चीज़ की तुम खुदा के सिवा परसतिश करते थे यक़ीनन जहन्नुम की ईधन (जलावन) होंगे (और) तुम सबको उसमें उतरना पड़ेगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَصَبُ: ईंधन, लकड़ी, या वह चीज़ जिससे आग जलाई जाए।
  • وَارِدُونَ: प्रवेश करने वाले, अंदर जाने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ अल्लाह के नाफ़रमान लोगो! तुम और वो सब कुछ जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते हो—चाहे वो मूर्तियाँ हों, पत्थर हों, या वो इंसान और जिन्न जिन्होंने तुम्हारी पूजा को पसंद किया और उस पर राज़ी हुए—ये सब जहन्नम की आग का ईंधन हैं। जिस तरह लकड़ी आग को भड़काती है और उसे और तेज़ करती है, उसी तरह तुम और तुम्हारे ये माबूद जहन्नम की आग को और भड़काओगे। तुम सब उसमें प्रवेश करने वाले हो, और तुम्हारे ये माबूद भी तुम्हारे साथ उसी आग में झोंके जाएँगे।

यह अल्लाह का स्पष्ट और कठोर फ़रमान है कि शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराना) सबसे बड़ा ज़ुल्म है, और इसका अंजाम जहन्नम की आग के अलावा कुछ नहीं। जो लोग अल्लाह की इबादत छोड़कर बेजान बुतों और मख़लूक़ात की पूजा करते हैं, वे न सिर्फ़ खुद गुमराह होते हैं बल्कि अपने इन माबूदों को भी अपने साथ हलाकत में ले जाते हैं। यहाँ अल्लाह तआला ने साफ़ कर दिया कि ये माबूद उनकी मदद नहीं कर सकते, न दुनिया में और न आख़िरत में।

इस आयत में हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करें, उसी से मदद माँगें, और उसी की राह पर चलें। अल्लाह ने हमें अक्ल दी है ताकि हम सोचें और समझें कि सच्चा मालिक और पूजा के लायक़ सिर्फ़ वही है जिसने ये कायनात बनाई। जो लोग इस हक़ीक़त को समझ जाएँ और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों के मुताबिक ढाल लें, उनके लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है, और जो इससे मुँह मोड़ें उनके लिए जहन्नम का अज़ाब है। अल्लाह तआला हम सबको सीधी राह दिखाए और हमें शिर्क और गुमराही से बचाए। आमीन।



📜 आयत 96-100 — अल-अंबिया

96حَتَّىٰ إِذَا فُتِحَتْ يَأْجُوجُ وَمَأْجُوجُ وَهُم مِّن كُلِّ حَدَبٍ يَنسِلُونَ
बस इतना (तवक्कुफ़ तो ज़रूर होगा) कि जब याजूज माजूज (सद्दे सिकन्दरी) की कैद से खोल दिए जाएँगे और ये लोग (ज़मीन की) हर बुलन्दी से दौड़ते हुए निकल पड़े
97وَاقْتَرَبَ الْوَعْدُ الْحَقُّ فَإِذَا هِيَ شَاخِصَةٌ أَبْصَارُ الَّذِينَ كَفَرُوا يَا وَيْلَنَا قَدْ كُنَّا فِي غَفْلَةٍ مِّنْ هَٰذَا بَلْ كُنَّا ظَالِمِينَ
और क़यामत का सच्चा वायदा नज़दीक आ जाए तो फिर काफिरों की ऑंखें एक दम से पथरा दी जाएँ (और कहने लगे) हाय हमारी शामत कि हम तो इस (दिन) से ग़फलत ही में (पड़े) रहे बल्कि (सच तो यूँ है कि अपने ऊपर) हम आप ज़ालिम थे
98إِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ حَصَبُ جَهَنَّمَ أَنتُمْ لَهَا وَارِدُونَ
(उस दिन किहा जाएगा कि ऐ कुफ्फ़ार) तुम और जिस चीज़ की तुम खुदा के सिवा परसतिश करते थे यक़ीनन जहन्नुम की ईधन (जलावन) होंगे (और) तुम सबको उसमें उतरना पड़ेगा
99لَوْ كَانَ هَٰؤُلَاءِ آلِهَةً مَّا وَرَدُوهَا ۖ وَكُلٌّ فِيهَا خَالِدُونَ
अगर ये (सच्चे) माबूद होते तो उन्हें दोज़ख़ में न जाना पड़ता और (अब तो) सबके सब उसी में हमेशा रहेंगे
100لَهُمْ فِيهَا زَفِيرٌ وَهُمْ فِيهَا لَا يَسْمَعُونَ
उन लोगों की दोज़ख़ में चिंघाड़ होगी और ये लोग (अपने शोर व ग़ुल में) किसी की बात भी न सुन सकेंगे
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अनुवाद — अल-अंबिया 98

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Tuesday, August 18, 2026

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