अल-अंबिया · 97/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
وَاقْتَرَبَ الْوَعْدُ الْحَقُّ فَإِذَا هِيَ شَاخِصَةٌ أَبْصَارُ الَّذِينَ كَفَرُوا يَا وَيْلَنَا قَدْ كُنَّا فِي غَفْلَةٍ مِّنْ هَٰذَا بَلْ كُنَّا ظَالِمِينَ ۝٩٧
Waqtarabal wa`dul haqqu fa-izaa hiya shaakhisatun absaarul lazeena kafaroo yaawailanaa qad kunna fee ghaflatim min haaza bal kunnaa zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
और क़यामत का सच्चा वायदा नज़दीक आ जाए तो फिर काफिरों की ऑंखें एक दम से पथरा दी जाएँ (और कहने लगे) हाय हमारी शामत कि हम तो इस (दिन) से ग़फलत ही में (पड़े) रहे बल्कि (सच तो यूँ है कि अपने ऊपर) हम आप ज़ालिम थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • شَاخِصَةٌ – खुली हुई, घूरती हुई (आँखें जो पलकें नहीं झपकातीं)
  • أَبْصَار – आँखें
  • يَا وَيْلَنَا – हमारी बर्बादी, हम पर अफसोस
  • غَفْلَة – लापरवाही, भूल, असावधानी
  • ظَالِمِينَ – अत्याचारी, ज़ालिम

तफ़सीर (व्याख्या):

जब याजूज और माजूज की दीवार टूटेगी और वे हर ऊँचाई से तेज़ी से निकलकर धरती पर फैल जाएँगे, तो क़यामत का वादा बहुत करीब आ जाएगा। उस दिन क़यामत की भयावहता और सख्तियाँ सामने आ जाएँगी। उस वक़्त काफ़िरों की आँखें डर और हैरत की वजह से खुली की खुली रह जाएँगी, उनकी पलकें भी नहीं झपकेंगी। वे हर तरफ़ देखेंगे और समझ जाएँगे कि अब कोई बचाव नहीं।

उस वक़्त वे पछतावे और अफसोस के साथ कहेंगे: "हाय हमारी बर्बादी! हम इस दिन से ग़ाफ़िल रहे, हमने इसकी परवाह नहीं की और न ही इसके लिए कोई तैयारी की। हम दुनिया के कामों में लगे रहे और आख़िरत को भूल गए।" फिर वे अपनी ग़लती को और साफ़ करते हुए कहेंगे: "बल्कि हम ज़ालिम थे, हमने जानबूझकर सच को झुठलाया, अल्लाह की इबादत छोड़ दी और अपनी इबादत को गलत जगह रखा। हमने उन चीज़ों की पूजा की जो न सुन सकती थीं, न देख सकती थीं और न कोई फ़ायदा पहुँचा सकती थीं।"

यह वह दिन होगा जब पछतावा किसी काम न आएगा, और न ही कोई मौका मिलेगा कि वे अपनी ग़लती सुधार सकें।

दावती पहलू (नसीहत):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बड़ी सख्त नसीहत देती है कि हम उस दिन के लिए आज ही तैयारी कर लें। क़यामत का दिन कोई दूर की चीज़ नहीं, बल्कि हर लम्हा करीब आ रहा है। हमें चाहिए कि अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और अच्छे कामों में गुज़ारें, ताकि उस दिन हमें पछताना न पड़े। जो लोग आज अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल हैं और सिर्फ़ दुनिया के पीछे भाग रहे हैं, वे उस दिन कहेंगे: "काश हमने कुछ किया होता!" लेकिन तब कुछ हासिल न होगा। आज का दिन ही असली मौका है — नमाज़ पढ़ें, रोज़ा रखें, अच्छे काम करें, और अल्लाह से माफ़ी माँगें। याद रखें, अल्लाह बड़ा मेहरबान और क्षमा करने वाला है, वह चाहता है कि हम उसकी तरफ़ लौट आएँ। उस दिन की शर्मिंदगी से बचने के लिए आज ही अपनी ज़िंदगी को सही रास्ते पर लगा दें।



📜 आयत 95-99 — सूरा अल-अंबिया

95وَحَرَامٌ عَلَىٰ قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَاهَا أَنَّهُمْ لَا يَرْجِعُونَ
और जिस बस्ती को हमने तबाह कर डाला मुमकिन नहीं कि वह लोग क़यामत के दिन हिरफिर के से (हमारे पास) न लौटे
96حَتَّىٰ إِذَا فُتِحَتْ يَأْجُوجُ وَمَأْجُوجُ وَهُم مِّن كُلِّ حَدَبٍ يَنسِلُونَ
बस इतना (तवक्कुफ़ तो ज़रूर होगा) कि जब याजूज माजूज (सद्दे सिकन्दरी) की कैद से खोल दिए जाएँगे और ये लोग (ज़मीन की) हर बुलन्दी से दौड़ते हुए निकल पड़े
97وَاقْتَرَبَ الْوَعْدُ الْحَقُّ فَإِذَا هِيَ شَاخِصَةٌ أَبْصَارُ الَّذِينَ كَفَرُوا يَا وَيْلَنَا قَدْ كُنَّا فِي غَفْلَةٍ مِّنْ هَٰذَا بَلْ كُنَّا ظَالِمِينَ
और क़यामत का सच्चा वायदा नज़दीक आ जाए तो फिर काफिरों की ऑंखें एक दम से पथरा दी जाएँ (और कहने लगे) हाय हमारी शामत कि हम तो इस (दिन) से ग़फलत ही में (पड़े) रहे बल्कि (सच तो यूँ है कि अपने ऊपर) हम आप ज़ालिम थे
98إِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ حَصَبُ جَهَنَّمَ أَنتُمْ لَهَا وَارِدُونَ
(उस दिन किहा जाएगा कि ऐ कुफ्फ़ार) तुम और जिस चीज़ की तुम खुदा के सिवा परसतिश करते थे यक़ीनन जहन्नुम की ईधन (जलावन) होंगे (और) तुम सबको उसमें उतरना पड़ेगा
99لَوْ كَانَ هَٰؤُلَاءِ آلِهَةً مَّا وَرَدُوهَا ۖ وَكُلٌّ فِيهَا خَالِدُونَ
अगर ये (सच्चे) माबूद होते तो उन्हें दोज़ख़ में न जाना पड़ता और (अब तो) सबके सब उसी में हमेशा रहेंगे
अल-अंबियाकुरान सूची
112आयत
मक्कीअवतरण स्थान
97आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 97

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Saturday, October 3, 2026

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