अल-अंबिया · 99/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
لَوْ كَانَ هَٰؤُلَاءِ آلِهَةً مَّا وَرَدُوهَا ۖ وَكُلٌّ فِيهَا خَالِدُونَ ۝٩٩
Law kaana haaa`ulaaa`i aalihatam maa waradoohaa wa kullun feehaa khaalidoon
📖 हिंदी अर्थ
अगर ये (सच्चे) माबूद होते तो उन्हें दोज़ख़ में न जाना पड़ता और (अब तो) सबके सब उसी में हमेशा रहेंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَوْ كَانَ – अगर होते
  • هَٰؤُلَاءِ – ये (जिन्हें तुम पूजते हो)
  • آلِهَةً – सच्चे देवता (पूजा के योग्य)
  • مَا وَرَدُوهَا – वे उसमें (जहन्नम में) प्रवेश नहीं करते
  • كُلٌّ – हर एक (पूजने वाले और पूजे जाने वाले)
  • خَالِدُونَ – हमेशा रहने वाले

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकीन (बहुदेववादियों) को सम्बोधित करते हुए उनके उन माबूदों (पूज्य वस्तुओं) का ज़िक्र कर रहे हैं जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पूजते थे – चाहे वे मूर्तियाँ हों, पत्थर हों, पेड़ हों या कोई और चीज़। अल्लाह फ़रमाता है: "अगर ये सच्चे देवता होते तो वे जहन्नम में प्रवेश नहीं करते।"

यानी अगर ये माबूद सचमुच पूजा के लायक होते और उनमें कोई दिव्य शक्ति होती, तो वे अपने पूजने वालों के साथ जहन्नम की आग में न जाते। क्योंकि जो सच्चा देवता होता है, वह अपने भक्तों को आग से बचाता है, खुद उसमें नहीं जलता। लेकिन जब ये खुद जहन्नम में जा रहे हैं और अपने पूजने वालों को भी नहीं बचा सके, तो यह साबित हो गया कि ये कभी देवता थे ही नहीं।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और हर एक (पूजने वाला और पूजा जाने वाला) उसमें हमेशा रहने वाला है।" यानी जहन्नम में दोनों हमेशा रहेंगे – वे लोग जिन्होंने इन्हें पूजा और ये माबूद भी। मूर्तियाँ और पत्थर भी उसी आग में डाले जाएँगे, और उनके पूजने वाले भी उसमें हमेशा के लिए रहेंगे। उनके लिए कोई छुटकारा नहीं होगा, कोई मददगार नहीं होगा, और कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं होगा।

यह आयत उन लोगों के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है जो अल्लाह के सिवा किसी और की पूजा करते हैं, चाहे वह कोई संत हो, पीर हो, मूर्ति हो या कोई और चीज़। यह हमें सिखाती है कि सिर्फ अल्लाह ही पूजा के योग्य है, और उसी की इबादत करनी चाहिए। जो लोग इस हक़ीक़त को नहीं समझते, वे अपने माबूदों के साथ जहन्नम में जाएँगे।

दावती पहलू (आमंत्रण का पहलू):

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है कि हम अपनी ज़िंदगी में सिर्फ अल्लाह को ही अपना माबूद बनाएँ। अल्लाह ने हमें पैदा किया, हमें रिज़्क़ दिया, हमें इस्लाम जैसी पाक दीन दी – तो क्या हमें उसी की इबादत नहीं करनी चाहिए? याद रखिए, जो लोग अल्लाह की इबादत करते हैं, अल्लाह उन्हें जहन्नम से बचाकर जन्नत में दाखिल करेगा। लेकिन जो लोग किसी और को पूजते हैं, वे अपने माबूदों के साथ जहन्नम में जाएँगे। इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को सुधार लें, सिर्फ अल्लाह की इबादत करें, और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें। यही हमारी कामयाबी का रास्ता है।



📜 आयत 97-101 — सूरा अल-अंबिया

97وَاقْتَرَبَ الْوَعْدُ الْحَقُّ فَإِذَا هِيَ شَاخِصَةٌ أَبْصَارُ الَّذِينَ كَفَرُوا يَا وَيْلَنَا قَدْ كُنَّا فِي غَفْلَةٍ مِّنْ هَٰذَا بَلْ كُنَّا ظَالِمِينَ
और क़यामत का सच्चा वायदा नज़दीक आ जाए तो फिर काफिरों की ऑंखें एक दम से पथरा दी जाएँ (और कहने लगे) हाय हमारी शामत कि हम तो इस (दिन) से ग़फलत ही में (पड़े) रहे बल्कि (सच तो यूँ है कि अपने ऊपर) हम आप ज़ालिम थे
98إِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ حَصَبُ جَهَنَّمَ أَنتُمْ لَهَا وَارِدُونَ
(उस दिन किहा जाएगा कि ऐ कुफ्फ़ार) तुम और जिस चीज़ की तुम खुदा के सिवा परसतिश करते थे यक़ीनन जहन्नुम की ईधन (जलावन) होंगे (और) तुम सबको उसमें उतरना पड़ेगा
99لَوْ كَانَ هَٰؤُلَاءِ آلِهَةً مَّا وَرَدُوهَا ۖ وَكُلٌّ فِيهَا خَالِدُونَ
अगर ये (सच्चे) माबूद होते तो उन्हें दोज़ख़ में न जाना पड़ता और (अब तो) सबके सब उसी में हमेशा रहेंगे
100لَهُمْ فِيهَا زَفِيرٌ وَهُمْ فِيهَا لَا يَسْمَعُونَ
उन लोगों की दोज़ख़ में चिंघाड़ होगी और ये लोग (अपने शोर व ग़ुल में) किसी की बात भी न सुन सकेंगे
101إِنَّ الَّذِينَ سَبَقَتْ لَهُم مِّنَّا الْحُسْنَىٰ أُولَٰئِكَ عَنْهَا مُبْعَدُونَ
ज़बान अलबत्ता जिन लोगों के वास्ते हमारी तरफ से पहले ही भलाई (तक़दीर में लिखी जा चुकी) वह लोग दोज़ख़ से दूर ही दूर रखे जाएँगे
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अनुवाद — अल-अंबिया 99

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Saturday, October 3, 2026

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