अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَوْ كَانَ – अगर होते
- هَٰؤُلَاءِ – ये (जिन्हें तुम पूजते हो)
- آلِهَةً – सच्चे देवता (पूजा के योग्य)
- مَا وَرَدُوهَا – वे उसमें (जहन्नम में) प्रवेश नहीं करते
- كُلٌّ – हर एक (पूजने वाले और पूजे जाने वाले)
- خَالِدُونَ – हमेशा रहने वाले
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकीन (बहुदेववादियों) को सम्बोधित करते हुए उनके उन माबूदों (पूज्य वस्तुओं) का ज़िक्र कर रहे हैं जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पूजते थे – चाहे वे मूर्तियाँ हों, पत्थर हों, पेड़ हों या कोई और चीज़। अल्लाह फ़रमाता है: "अगर ये सच्चे देवता होते तो वे जहन्नम में प्रवेश नहीं करते।"
यानी अगर ये माबूद सचमुच पूजा के लायक होते और उनमें कोई दिव्य शक्ति होती, तो वे अपने पूजने वालों के साथ जहन्नम की आग में न जाते। क्योंकि जो सच्चा देवता होता है, वह अपने भक्तों को आग से बचाता है, खुद उसमें नहीं जलता। लेकिन जब ये खुद जहन्नम में जा रहे हैं और अपने पूजने वालों को भी नहीं बचा सके, तो यह साबित हो गया कि ये कभी देवता थे ही नहीं।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और हर एक (पूजने वाला और पूजा जाने वाला) उसमें हमेशा रहने वाला है।" यानी जहन्नम में दोनों हमेशा रहेंगे – वे लोग जिन्होंने इन्हें पूजा और ये माबूद भी। मूर्तियाँ और पत्थर भी उसी आग में डाले जाएँगे, और उनके पूजने वाले भी उसमें हमेशा के लिए रहेंगे। उनके लिए कोई छुटकारा नहीं होगा, कोई मददगार नहीं होगा, और कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं होगा।
यह आयत उन लोगों के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है जो अल्लाह के सिवा किसी और की पूजा करते हैं, चाहे वह कोई संत हो, पीर हो, मूर्ति हो या कोई और चीज़। यह हमें सिखाती है कि सिर्फ अल्लाह ही पूजा के योग्य है, और उसी की इबादत करनी चाहिए। जो लोग इस हक़ीक़त को नहीं समझते, वे अपने माबूदों के साथ जहन्नम में जाएँगे।
दावती पहलू (आमंत्रण का पहलू):
यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है कि हम अपनी ज़िंदगी में सिर्फ अल्लाह को ही अपना माबूद बनाएँ। अल्लाह ने हमें पैदा किया, हमें रिज़्क़ दिया, हमें इस्लाम जैसी पाक दीन दी – तो क्या हमें उसी की इबादत नहीं करनी चाहिए? याद रखिए, जो लोग अल्लाह की इबादत करते हैं, अल्लाह उन्हें जहन्नम से बचाकर जन्नत में दाखिल करेगा। लेकिन जो लोग किसी और को पूजते हैं, वे अपने माबूदों के साथ जहन्नम में जाएँगे। इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को सुधार लें, सिर्फ अल्लाह की इबादत करें, और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें। यही हमारी कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 97-101 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 99
सूरा अल-अंबिया आयत 99 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर ये (सच्चे) माबूद होते तो उन्हें दोज़ख़ में न…सूरा आयत 99/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 97–101. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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