अल-हज · 47/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हज
وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِ وَلَن يُخْلِفَ اللَّهُ وَعْدَهُ ۚ وَإِنَّ يَوْمًا عِندَ رَبِّكَ كَأَلْفِ سَنَةٍ مِّمَّا تَعُدُّونَ ۝٤٧
Wa yasta`juloonaka bil`azaabi wa lany yukhlifal laahu wa`dah; wa inna yawman `inda Rabbika ka`alfi sanatim mimmaa ta`uddoon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम से ये लोग अज़ाब के जल्द आने की तमन्ना रखते हैं और खुदा तो हरगिज़ अपने वायदे के ख़िलाफ नहीं करेगा और बेशक (क़यामत का) एक दिन तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक तुम्हारी गिनती के हिसाब से एक हज़ार बरस के बराबर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَسْتَعْجِلُونَكَ – वे आपसे जल्दी माँगते हैं
  • بِالْعَذَابِ – अज़ाब (यातना) के साथ
  • وَلَن يُخْلِفَ اللَّهُ وَعْدَهُ – अल्लाह अपने वादे के खिलाफ़ नहीं करेगा
  • وَإِنَّ يَوْمًا عِندَ رَبِّكَ – और निश्चय ही एक दिन आपके रब के पास
  • كَأَلْفِ سَنَةٍ – एक हज़ार साल के बराबर है
  • مِّمَّا تَعُدُّونَ – उन (सालों) में से जिन्हें तुम गिनते हो

तफ़सीर:

ऐ नबी! आपकी क़ौम के काफ़िर, अपनी अत्यधिक अज्ञानता और हठधर्मिता के कारण, आपसे अज़ाब को जल्दी माँगते हैं। वे मज़ाक़ उड़ाते हुए कहते हैं कि जिस अज़ाब की आप हमें धमकी देते हैं, उसे ले आओ। वे यह नहीं समझते कि अल्लाह का वादा अटल है — जो अज़ाब उन्हें दिया गया है, वह निश्चित रूप से आकर रहेगा। अल्लाह ने अपने वादे के अनुसार उन्हें दुनिया में भी अज़ाब दिया — जैसे बद्र के दिन उन्हें बुरी तरह पराजित किया गया — और आख़िरत का अज़ाब तो और भी भयानक है।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि आख़िरत का एक दिन, जिसमें अज़ाब की सख़्ती और लंबाई होगी, तुम्हारी गिनती के एक हज़ार सालों के बराबर है। यानी उस दिन की भयावहता और कठिनाई इतनी अधिक होगी कि वह एक हज़ार साल जैसा महसूस होगा। तो जब हाल यह है, तो ऐ काफ़िरों! तुम उस अज़ाब को जल्दी क्यों माँगते हो? क्या तुम्हें पता है कि तुम किस चीज़ की माँग कर रहे हो?

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता। जो वादा उसने किया है — चाहे वह अच्छाई का हो या सज़ा का — वह पूरा होकर रहेगा। मोमिन के लिए यह आयत सबसे बड़ी तसल्ली है कि उसका रब अपने वादे पर कायम है। और काफ़िरों के लिए यह चेतावनी है कि अल्लाह की पकड़ से बचना नामुमकिन है। अल्लाह की सज़ा में देरी उसकी मेहरबानी है, न कि उसकी कमज़ोरी। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह के फ़ैसले पर भरोसा रखें, उसकी रहमत से उम्मीद रखें और उसके अज़ाब से डरें — क्योंकि उसका दिन हज़ार सालों के बराबर लंबा और सख़्त है।



📜 आयत 45-49 — सूरा अल-हज

45فَكَأَيِّن مِّن قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَاهَا وَهِيَ ظَالِمَةٌ فَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا وَبِئْرٍ مُّعَطَّلَةٍ وَقَصْرٍ مَّشِيدٍ
ग़रज़ कितनी बस्तियाँ हैं कि हम ने उन्हें बरबाद कर दिया और वह सरकश थीं पस वह अपनी छतों पर ढही पड़ी हैं और कितने बेकार (उजडे क़ुएँ और कितने) मज़बूत बड़े-बड़े ऊँचे महल (वीरान हो गए)
46أَفَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَتَكُونَ لَهُمْ قُلُوبٌ يَعْقِلُونَ بِهَا أَوْ آذَانٌ يَسْمَعُونَ بِهَا ۖ فَإِنَّهَا لَا تَعْمَى الْأَبْصَارُ وَلَٰكِن تَعْمَى الْقُلُوبُ الَّتِي فِي الصُّدُورِ
क्या ये लोग रूए ज़मीन पर चले फिरे नहीं ताकि उनके लिए ऐसे दिल होते हैं जैसे हक़ बातों को समझते या उनके ऐसे कान होते जिनके ज़रिए से (सच्ची बातों को) सुनते क्योंकि ऑंखें अंधी नहीं हुआ करती बल्कि दिल जो सीने में है वही अन्धे हो जाया करते हैं
47وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِ وَلَن يُخْلِفَ اللَّهُ وَعْدَهُ ۚ وَإِنَّ يَوْمًا عِندَ رَبِّكَ كَأَلْفِ سَنَةٍ مِّمَّا تَعُدُّونَ
और (ऐ रसूल) तुम से ये लोग अज़ाब के जल्द आने की तमन्ना रखते हैं और खुदा तो हरगिज़ अपने वायदे के ख़िलाफ नहीं करेगा और बेशक (क़यामत का) एक दिन तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक तुम्हारी गिनती के हिसाब से एक हज़ार बरस के बराबर है
48وَكَأَيِّن مِّن قَرْيَةٍ أَمْلَيْتُ لَهَا وَهِيَ ظَالِمَةٌ ثُمَّ أَخَذْتُهَا وَإِلَيَّ الْمَصِيرُ
और कितनी बस्तियाँ हैं कि मैंने उन्हें (चन्द) मोहलत दी हालाँकि वह सरकश थी फिर (आख़िर) मैंने उन्हें ले डाला और (सबको) मेरी तरफ लौटना है
49قُلْ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّمَا أَنَا لَكُمْ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि लोगों में तो सिर्फ तुमको खुल्लम-खुल्ला (अज़ाब से) डराने वाला हूँ
अल-हजकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
47आयत

अनुवाद — अल-हज 47

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Thursday, October 1, 2026

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