अल-हज · 48/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
وَكَأَيِّن مِّن قَرْيَةٍ أَمْلَيْتُ لَهَا وَهِيَ ظَالِمَةٌ ثُمَّ أَخَذْتُهَا وَإِلَيَّ الْمَصِيرُ ۝٤٨
Wa ka ayyim min qaryatin amlaitu lahaa wa hiya zaalimatun summa akhaztuhaa wa ilaiyal maseer
📖 हिंदी अर्थ
और कितनी बस्तियाँ हैं कि मैंने उन्हें (चन्द) मोहलत दी हालाँकि वह सरकश थी फिर (आख़िर) मैंने उन्हें ले डाला और (सबको) मेरी तरफ लौटना है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ (معاني الكلمات):

  • وَكَأَيِّن مِّن قَرْيَةٍ: कितनी ही बस्तियाँ (बहुत सी बस्तियाँ)
  • أَمْلَيْتُ لَهَا: मैंने उन्हें ढील दी (मोहलत दी)
  • ظَالِمَةٌ: अत्याचारी (अपने कुफ्र और गुनाहों के कारण)
  • أَخَذْتُهَا: मैंने उन्हें पकड़ा (अज़ाब में गिरफ्तार किया)
  • وَإِلَيَّ الْمَصِيرُ: और मेरी ही ओर सबका लौटना है

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने बंदों को एक बहुत बड़ा सबक़ सिखा रहा है। वह फ़रमाता है कि कितनी ही बस्तियाँ और क़ौमें थीं जो अत्याचारी थीं — उन्होंने अल्लाह के हुक्मों को ठुकराया, उसके रसूलों को झुठलाया और ज़मीन पर फ़साद फैलाया। अल्लाह ने उन्हें तुरंत पकड़ नहीं लिया, बल्कि उन्हें ढील दी, मोहलत दी। वे समझे कि हम बच गए, हम पर कोई अज़ाब नहीं आएगा। लेकिन यह उनकी भूल थी — अल्लाह की ढील उनके लिए रहमत नहीं, बल्कि एक इम्तिहान और उनके गुनाहों में इज़ाफ़े का ज़रिया बनी।

फिर जब अल्लाह ने चाहा, उन्हें ऐसे पकड़ा कि कोई बचाने वाला न था। अज़ाब अचानक आया और उन्होंने मौत का मज़ा चखा। यही हाल उन लोगों का है जो आज भी अल्लाह की नाफ़रमानी पर अड़े हैं — वे समझते हैं कि उन्हें मोहलत मिली हुई है, लेकिन यह मोहलत उन्हें धोखे में डालने के लिए है।

आख़िर में अल्लाह फ़रमाता है: "और मेरी ही ओर सबका लौटना है।" यानी चाहे इंसान को दुनिया में कितनी भी मोहलत मिल जाए, उसे एक दिन अल्लाह के सामने हाज़िर होना है। दुनिया की ज़िंदगी खेल-तमाशा है, असली हिसाब आख़िरत में होगा। जो लोग अल्लाह के अज़ाब से डरते हैं और उसकी राह पर चलते हैं, उनके लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है, और जो अत्याचारी हैं, उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है।


नसीहत (दावती पहलू):

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह बहुत रहीम और करीम है — वह जल्दी अज़ाब नहीं भेजता, बल्कि तौबा का मौक़ा देता है। लेकिन यह मौक़ा हमेशा के लिए नहीं है। आज हम ज़िंदा हैं, साँसें चल रही हैं — यह अल्लाह की रहमत है। हमें चाहिए कि इस मोहलत को ग़नीमत समझें, अपने गुनाहों से तौबा करें, और अल्लाह की इबादत की तरफ़ पलटें। अल्लाह ने हमें क़ुरआन और सुन्नत दी है, हमें उस पर अमल करना चाहिए। याद रखें — मौत किसी को नहीं छोड़ती, और आख़िरत का हिसाब सच्चा है। जो आज अल्लाह की राह पर चलेगा, वह कल क़ियामत के दिन कामयाब होगा। अल्लाह हम सबको सीधी राह दिखाए — आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 46-50 — अल-हज

46أَفَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَتَكُونَ لَهُمْ قُلُوبٌ يَعْقِلُونَ بِهَا أَوْ آذَانٌ يَسْمَعُونَ بِهَا ۖ فَإِنَّهَا لَا تَعْمَى الْأَبْصَارُ وَلَٰكِن تَعْمَى الْقُلُوبُ الَّتِي فِي الصُّدُورِ
क्या ये लोग रूए ज़मीन पर चले फिरे नहीं ताकि उनके लिए ऐसे दिल होते हैं जैसे हक़ बातों को समझते या उनके ऐसे कान होते जिनके ज़रिए से (सच्ची बातों को) सुनते क्योंकि ऑंखें अंधी नहीं हुआ करती बल्कि दिल जो सीने में है वही अन्धे हो जाया करते हैं
47وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِ وَلَن يُخْلِفَ اللَّهُ وَعْدَهُ ۚ وَإِنَّ يَوْمًا عِندَ رَبِّكَ كَأَلْفِ سَنَةٍ مِّمَّا تَعُدُّونَ
और (ऐ रसूल) तुम से ये लोग अज़ाब के जल्द आने की तमन्ना रखते हैं और खुदा तो हरगिज़ अपने वायदे के ख़िलाफ नहीं करेगा और बेशक (क़यामत का) एक दिन तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक तुम्हारी गिनती के हिसाब से एक हज़ार बरस के बराबर है
48وَكَأَيِّن مِّن قَرْيَةٍ أَمْلَيْتُ لَهَا وَهِيَ ظَالِمَةٌ ثُمَّ أَخَذْتُهَا وَإِلَيَّ الْمَصِيرُ
और कितनी बस्तियाँ हैं कि मैंने उन्हें (चन्द) मोहलत दी हालाँकि वह सरकश थी फिर (आख़िर) मैंने उन्हें ले डाला और (सबको) मेरी तरफ लौटना है
49قُلْ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّمَا أَنَا لَكُمْ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि लोगों में तो सिर्फ तुमको खुल्लम-खुल्ला (अज़ाब से) डराने वाला हूँ
50فَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ
पस जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए (आख़िरत में) उनके लिए बख्शिश है और बेहिश्त की बहुत उम्दा रोज़ी
अल-हजकुरान सूची
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48आयत

अनुवाद — अल-हज 48

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Tuesday, August 18, 2026

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