अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ (معاني الكلمات):
- وَكَأَيِّن مِّن قَرْيَةٍ: कितनी ही बस्तियाँ (बहुत सी बस्तियाँ)
- أَمْلَيْتُ لَهَا: मैंने उन्हें ढील दी (मोहलत दी)
- ظَالِمَةٌ: अत्याचारी (अपने कुफ्र और गुनाहों के कारण)
- أَخَذْتُهَا: मैंने उन्हें पकड़ा (अज़ाब में गिरफ्तार किया)
- وَإِلَيَّ الْمَصِيرُ: और मेरी ही ओर सबका लौटना है
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपने बंदों को एक बहुत बड़ा सबक़ सिखा रहा है। वह फ़रमाता है कि कितनी ही बस्तियाँ और क़ौमें थीं जो अत्याचारी थीं — उन्होंने अल्लाह के हुक्मों को ठुकराया, उसके रसूलों को झुठलाया और ज़मीन पर फ़साद फैलाया। अल्लाह ने उन्हें तुरंत पकड़ नहीं लिया, बल्कि उन्हें ढील दी, मोहलत दी। वे समझे कि हम बच गए, हम पर कोई अज़ाब नहीं आएगा। लेकिन यह उनकी भूल थी — अल्लाह की ढील उनके लिए रहमत नहीं, बल्कि एक इम्तिहान और उनके गुनाहों में इज़ाफ़े का ज़रिया बनी।
फिर जब अल्लाह ने चाहा, उन्हें ऐसे पकड़ा कि कोई बचाने वाला न था। अज़ाब अचानक आया और उन्होंने मौत का मज़ा चखा। यही हाल उन लोगों का है जो आज भी अल्लाह की नाफ़रमानी पर अड़े हैं — वे समझते हैं कि उन्हें मोहलत मिली हुई है, लेकिन यह मोहलत उन्हें धोखे में डालने के लिए है।
आख़िर में अल्लाह फ़रमाता है: "और मेरी ही ओर सबका लौटना है।" यानी चाहे इंसान को दुनिया में कितनी भी मोहलत मिल जाए, उसे एक दिन अल्लाह के सामने हाज़िर होना है। दुनिया की ज़िंदगी खेल-तमाशा है, असली हिसाब आख़िरत में होगा। जो लोग अल्लाह के अज़ाब से डरते हैं और उसकी राह पर चलते हैं, उनके लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है, और जो अत्याचारी हैं, उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है।
नसीहत (दावती पहलू):
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह बहुत रहीम और करीम है — वह जल्दी अज़ाब नहीं भेजता, बल्कि तौबा का मौक़ा देता है। लेकिन यह मौक़ा हमेशा के लिए नहीं है। आज हम ज़िंदा हैं, साँसें चल रही हैं — यह अल्लाह की रहमत है। हमें चाहिए कि इस मोहलत को ग़नीमत समझें, अपने गुनाहों से तौबा करें, और अल्लाह की इबादत की तरफ़ पलटें। अल्लाह ने हमें क़ुरआन और सुन्नत दी है, हमें उस पर अमल करना चाहिए। याद रखें — मौत किसी को नहीं छोड़ती, और आख़िरत का हिसाब सच्चा है। जो आज अल्लाह की राह पर चलेगा, वह कल क़ियामत के दिन कामयाब होगा। अल्लाह हम सबको सीधी राह दिखाए — आमीन।
📜 आयत 46-50 — सूरा अल-हज
अनुवाद — अल-हज 48
सूरा अल-हज आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कितनी बस्तियाँ हैं कि मैंने उन्हें (चन्द) मोहलत दी…सूरा आयत 48/78 — सूरा अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हज सुनें, सूरा अल-हज अनुवाद, सूरा अल-हज mp3, सूरा अल-हज pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, September 8, 2026
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