अल-मोमिनुन · 108/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
قَالَ اخْسَئُوا فِيهَا وَلَا تُكَلِّمُونِ ۝١٠٨
Qaalakh sa`oo feehaa wa laa tukallimoon
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा फरमाएगा दूर हो इसी में (तुम को रहना होगा) और (बस) मुझ से बात न करो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اخْسَئُوا (इख़्सऊ) — दूर हो जाओ, अपमानित होकर रहो। यह शब्द उसी प्रकार प्रयोग होता है जैसे कुत्ते को "दूर हट" कहकर भगाया जाता है।
  • فِيهَا (फ़ीहा) — उसमें (जहन्नम में)।
  • وَلَا تُكَلِّمُونِ (व ला तुकल्लिमूनी) — और मुझसे बात मत करो।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब काफ़िर और मुजरिम लोग जहन्नम में डाले जाएँगे, तो वे अपनी सज़ा से बचने के लिए अल्लाह से दुआ करेंगे, रोएँगे और गिड़गिड़ाएँगे कि उन्हें दुनिया में वापस भेज दिया जाए या उनकी सज़ा हल्की कर दी जाए। लेकिन अल्लाह तआला उन्हें जवाब देगा: "दूर हो जाओ, अपमानित और ज़लील होकर इसी आग में पड़े रहो, और मुझसे बात करने की कोशिश मत करो।" यह वह क्षण होगा जब उनकी सारी उम्मीदें टूट जाएँगी, उनका रोना-पीटना और दुआ करना बंद कर दिया जाएगा, और वे हमेशा के लिए अज़ाब में डूबे रहेंगे। यह उनके उस घमंड और सत्य से मुँह मोड़ने का सीधा बदला होगा जो उन्होंने दुनिया में किया।

दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आज हम अल्लाह से बात कर सकते हैं, उससे दुआ माँग सकते हैं, उसकी रहमत की उम्मीद रख सकते हैं — यह कितनी बड़ी नेमत है! हमें इस मौके को ग़नीमत समझना चाहिए। जब तक हमारे पास वक़्त है, तौबा कर लें, अल्लाह से रिश्ता जोड़ लें, क्योंकि वह दिन बहुत बुरा होगा जब यही दरवाज़ा हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा। अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा अभी खुला है — आज ही उसकी तरफ लौट आएँ, क्योंकि कल पछताने का कोई फायदा नहीं होगा।



📜 आयत 106-110 — अल-मोमिनुन

106قَالُوا رَبَّنَا غَلَبَتْ عَلَيْنَا شِقْوَتُنَا وَكُنَّا قَوْمًا ضَالِّينَ
वह जवाब देगें ऐ हमारे परवरदिगार हमको हमारी कम्बख्ती ने आज़माया और हम गुमराह लोग थे
107رَبَّنَا أَخْرِجْنَا مِنْهَا فَإِنْ عُدْنَا فَإِنَّا ظَالِمُونَ
परवरदिगार हमको (अबकी दफा) किसी तरह इस जहन्नुम से निकाल दे फिर अगर दोबारा हम ऐसा करें तो अलबत्ता हम कुसूरवार हैं
108قَالَ اخْسَئُوا فِيهَا وَلَا تُكَلِّمُونِ
ख़ुदा फरमाएगा दूर हो इसी में (तुम को रहना होगा) और (बस) मुझ से बात न करो
109إِنَّهُ كَانَ فَرِيقٌ مِّنْ عِبَادِي يَقُولُونَ رَبَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا وَأَنتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ
मेरे बन्दों में से एक गिरोह ऐसा भी था जो (बराबर) ये दुआ करता था कि ऐ हमारे पालने वाले हम ईमान लाए तो तू हमको बख्श दे और हम पर रहम कर तू तो तमाम रहम करने वालों से बेहतर है
110فَاتَّخَذْتُمُوهُمْ سِخْرِيًّا حَتَّىٰ أَنسَوْكُمْ ذِكْرِي وَكُنتُم مِّنْهُمْ تَضْحَكُونَ
तो तुम लोगों ने उन्हें मसखरा बना लिया-यहाँ तक कि (गोया) उन लोगों ने तुम से मेरी याद भुला दी और तुम उन पर (बराबर) हँसते रहे
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 108

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Tuesday, August 18, 2026

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