अल-मोमिनुन · 107/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
رَبَّنَا أَخْرِجْنَا مِنْهَا فَإِنْ عُدْنَا فَإِنَّا ظَالِمُونَ ۝١٠٧
Rabbanaa akhrijnaa minhaa fa in `udnaa fa innaa zaalimoon
📖 हिंदी अर्थ
परवरदिगार हमको (अबकी दफा) किसी तरह इस जहन्नुम से निकाल दे फिर अगर दोबारा हम ऐसा करें तो अलबत्ता हम कुसूरवार हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَبَّنَا: हे हमारे पालनहार!
  • أَخْرِجْنَا: हमें निकाल दे।
  • مِنْهَا: उस (जहन्नम की आग) से।
  • فَإِنْ عُدْنَا: फिर यदि हम लौट आएं (दुनिया में)।
  • فَإِنَّا ظَالِمُونَ: तो हम निश्चित रूप से अत्याचारी (ज़ालिम) होंगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह वह दृश्य है जब अहले जहन्नम (नरक के लोग) अपनी भयानक यातना से तंग आकर अपने रब से फ़रियाद करेंगे। वे कहेंगे: "हे हमारे पालनहार! हमें इस आग से निकाल दे, हमें एक बार फिर दुनिया में भेज दे। अगर हम दोबारा तेरी नाफ़रमानी करें, तेरे हुक्मों की अवहेलना करें और कुफ्र व गुमराही की राह पर लौट जाएं, तो हम खुद पर ज़ुल्म करने वाले हैं, हमारा कोई उज़्र (बहाना) नहीं होगा।"

यह अहले नरक की वह दर्दनाक दुआ है जो वे अपनी सज़ा की सख्ती से बेहाल होकर करेंगे। वे अब समझ चुके होंगे कि दुनिया में जो कुछ उन्होंने किया, वह सरासर ज़ुल्म था — अपनी रूह पर, अपने रब के हुक्म की खिलाफ़वरज़ी करके। मगर अफ़सोस! यह एहसास उन्हें उस वक्त हुआ जब मौका हाथ से निकल चुका था। क़ुरआन हमें बताता है कि उनकी यह दुआ क़ुबूल नहीं होगी, क्योंकि दुनिया ही आज़माइश की जगह थी, और वहाँ लौटना अब मुमकिन नहीं।

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। यह हमें बताती है कि दुनिया की ज़िंदगी एक बार ही मिली है — यह कोई रिहर्सल नहीं है। आज हम जिस आज़ादी में हैं, जिस मौके पर हैं, यही वह वक़्त है जब हमें अपने रब की इबादत करनी है, उसके हुक्मों पर चलना है। अगर हम आज गुमराही में जी रहे हैं, तो कल पछताने का कोई फ़ायदा नहीं होगा। अल्लाह तआला बेहद रहीम और करीम है — उसने हमें हज़ारों मौके दिए हैं, तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है। आइए, हम इस नेमत की क़द्र करें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक ढालें, ताकि उस दिन हमें यह फ़रियाद न करनी पड़े, बल्कि हम जन्नत की नेमतों में ख़ुशहाल हों।



📜 आयत 105-109 — अल-मोमिनुन

105أَلَمْ تَكُنْ آيَاتِي تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فَكُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ
(उस वक्त हम पूछेंगें) क्या तुम्हारे सामने मेरी आयतें न पढ़ी गयीं थीं (ज़रुर पढ़ी गयी थीं) तो तुम उन्हें झुठलाया करते थे
106قَالُوا رَبَّنَا غَلَبَتْ عَلَيْنَا شِقْوَتُنَا وَكُنَّا قَوْمًا ضَالِّينَ
वह जवाब देगें ऐ हमारे परवरदिगार हमको हमारी कम्बख्ती ने आज़माया और हम गुमराह लोग थे
107رَبَّنَا أَخْرِجْنَا مِنْهَا فَإِنْ عُدْنَا فَإِنَّا ظَالِمُونَ
परवरदिगार हमको (अबकी दफा) किसी तरह इस जहन्नुम से निकाल दे फिर अगर दोबारा हम ऐसा करें तो अलबत्ता हम कुसूरवार हैं
108قَالَ اخْسَئُوا فِيهَا وَلَا تُكَلِّمُونِ
ख़ुदा फरमाएगा दूर हो इसी में (तुम को रहना होगा) और (बस) मुझ से बात न करो
109إِنَّهُ كَانَ فَرِيقٌ مِّنْ عِبَادِي يَقُولُونَ رَبَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا وَأَنتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ
मेरे बन्दों में से एक गिरोह ऐसा भी था जो (बराबर) ये दुआ करता था कि ऐ हमारे पालने वाले हम ईमान लाए तो तू हमको बख्श दे और हम पर रहम कर तू तो तमाम रहम करने वालों से बेहतर है
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीRevelation
107आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 107

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Tuesday, August 18, 2026

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