अल-मोमिनुन · 49/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ لَعَلَّهُمْ يَهْتَدُونَ ۝٤٩
Wa laqad aatainaa Moosal Kitaaba la`allahum yahtadoon
📖 हिंदी अर्थ
और हमने मूसा को किताब (तौरैत) इसलिए अता की थी कि ये लोग हिदायत पाएँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آتَيْنَا: हमने दिया, अता किया।
  • الْكِتَابَ: यहाँ से तात्पर्य तौरात (Torah) से है।
  • لَعَلَّهُمْ يَهْتَدُونَ: ताकि वे (मूसा की क़ौम) सीधे मार्ग पर चलें और हिदायत पाएँ।

तफ़सीर:

यह आयत हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के ज़िक्र में आई है, जब अल्लाह तआला ने उन्हें बनी इसराईल की हिदायत के लिए तौरात जैसी अज़ीम किताब अता की। यह किताब नूर और हिदायत थी, जिसमें हक़ और बातिल का फ़रक़ साफ़ बयान किया गया था। अल्लाह का मक़सद यह था कि मूसा (अलैहिस्सलाम) की क़ौम इस किताब पर अमल करके गुमराही से निकलकर सीधे रास्ते पर आ जाए और अपनी ज़िंदगी के हर मामले में इसी को मरजा (reference) बनाए।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला ने इंसानों की हिदायत के लिए हमेशा नबियों और किताबों का सिलसिला जारी रखा। जिस तरह मूसा (अलैहिस्सलाम) को तौरात दी गई, उसी तरह हमारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को कुरआन अता किया गया, जो आख़िरी और मुकम्मल किताब है। यह हमारे लिए अल्लाह की बड़ी रहमत है कि हमें ऐसी किताब मिली जो क़यामत तक के लिए हिदायत का ज़रिया है।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि किताब का होना काफ़ी नहीं, बल्कि असल चीज़ उस पर अमल करना है। बनी इसराईल को तौरात मिली, लेकिन जब उन्होंने उस पर अमल नहीं किया तो वे हिदायत से महरूम रहे। इसलिए हमें कुरआन को सिर्फ़ पढ़ना ही नहीं, बल्कि उस पर ग़ौर करना और उस पर अमल करना चाहिए। जो शख्स कुरआन को अपना रहनुमा बना लेता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी अता करता है।

यह आयत हमें नबियों की मुहब्बत और उनकी तालीमात पर अमल की तरग़ीब देती है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को कुरआन और सुन्नत के मुताबिक़ ढालें, क्योंकि यही हमारी कामयाबी का ज़रिया है। अल्लाह तआला हम सबको कुरआन पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता करे। आमीन।



📜 आयत 47-51 — अल-मोमिनुन

47فَقَالُوا أَنُؤْمِنُ لِبَشَرَيْنِ مِثْلِنَا وَقَوْمُهُمَا لَنَا عَابِدُونَ
आपस मे कहने लगे क्या हम अपने ही ऐसे दो आदमियों पर ईमान ले आएँ हालाँकि इन दोनों की (क़ौम की) क़ौम हमारी ख़िदमत गारी करती है
48فَكَذَّبُوهُمَا فَكَانُوا مِنَ الْمُهْلَكِينَ
गरज़ उन लोगों ने इन दोनों को झुठलाया तो आख़िर ये सब के सब हलाक कर डाले गए
49وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ لَعَلَّهُمْ يَهْتَدُونَ
और हमने मूसा को किताब (तौरैत) इसलिए अता की थी कि ये लोग हिदायत पाएँ
50وَجَعَلْنَا ابْنَ مَرْيَمَ وَأُمَّهُ آيَةً وَآوَيْنَاهُمَا إِلَىٰ رَبْوَةٍ ذَاتِ قَرَارٍ وَمَعِينٍ
और हमने मरियम के बेटे (ईसा) और उनकी माँ को (अपनी कुदरत की निशानी बनाया था) और उन दोनों को हमने एक ऊँची हमवार ठहरने के क़ाबिल चश्में वाली ज़मीन पर (रहने की) जगह दी
51يَا أَيُّهَا الرُّسُلُ كُلُوا مِنَ الطَّيِّبَاتِ وَاعْمَلُوا صَالِحًا ۖ إِنِّي بِمَا تَعْمَلُونَ عَلِيمٌ
और मेरा आम हुक्म था कि ऐ (मेरे पैग़म्बर) पाक व पाकीज़ा चीज़ें खाओ और अच्छे अच्छे काम करो (क्योंकि) तुम जो कुछ करते हो मैं उससे बख़ूबी वाक़िफ हूँ
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीRevelation
49आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 49

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Tuesday, August 18, 2026

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