अल-मोमिनुन · 50/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
وَجَعَلْنَا ابْنَ مَرْيَمَ وَأُمَّهُ آيَةً وَآوَيْنَاهُمَا إِلَىٰ رَبْوَةٍ ذَاتِ قَرَارٍ وَمَعِينٍ ۝٥٠
Wa ja`alnab na Maryama wa ummahooo aayatannw wa aawainaahumaaa ilaa rabwatin zaati qaraarinw wa ma`een
📖 हिंदी अर्थ
और हमने मरियम के बेटे (ईसा) और उनकी माँ को (अपनी कुदरत की निशानी बनाया था) और उन दोनों को हमने एक ऊँची हमवार ठहरने के क़ाबिल चश्में वाली ज़मीन पर (रहने की) जगह दी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَبْوَةٍ: ऊँची भूमि, पहाड़ी या ऊँचा स्थान।
  • ذَاتِ قَرَارٍ: समतल और ठहरने योग्य जगह, जहाँ बसना आसान हो।
  • مَعِينٍ: बहता हुआ साफ़ पानी जो सतह पर दिखाई दे।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) और उनकी माँ हज़रत मरियम (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र फ़रमाया है। अल्लाह ने उन दोनों को अपनी क़ुदरत (शक्ति) की एक बड़ी निशानी बनाया, क्योंकि हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) बिना पिता के पैदा हुए — यह अल्लाह की असीम शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण है। यह घटना इस बात की गवाह है कि अल्लाह जो चाहता है, वह करता है, और उसके लिए कोई भी चीज़ मुश्किल नहीं।

अल्लाह ने उन दोनों को एक ऊँची, समतल और हरी-भरी जगह पर ठहराया, जहाँ पानी बहता था और जीवन की सभी सुविधाएँ मौजूद थीं। यह जगह उनके लिए सुकून और आराम का केंद्र बनी। यहाँ "रब्वा" से मुराद वह ऊँचा स्थान है जो देखने में सुंदर हो और रहने के लिए उपयुक्त हो। "मईन" से साफ़ और बहता हुआ पानी मुराद है, जो उनकी ज़रूरतों को पूरा करता था।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है और उन्हें हर मुश्किल से निकालने का रास्ता देता है। हज़रत मरियम (अलैहिस्सलाम) ने जब इस चमत्कारी जन्म का सामना किया, तो अल्लाह ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और खूबसूरत जगह प्रदान की। यह हमारे लिए सबक है कि जब हम अल्लाह पर भरोसा करते हैं, तो वह हमें कभी निराश नहीं करता।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत पर ईमान लाने की तरफ़ बुलाती है। जिस अल्लाह ने बिना पिता के ईसा (अलैहिस्सलाम) को पैदा किया और उनकी माँ को ऊँचे स्थान पर पानी और सुकून अता किया, वही अल्लाह आज भी अपने बंदों की मदद करता है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि वही है जो मुश्किलों में रास्ता दिखाता है और अपने नेक बंदों को इज़्ज़त देता है। यह क़िस्सा हमें यह भी सिखाता है कि अल्लाह के नबियों और उनके परिवारों की हिफ़ाज़त करना अल्लाह की सुन्नत (रीति) है, और हमें उनसे मुहब्बत करनी चाहिए।



📜 आयत 48-52 — अल-मोमिनुन

48فَكَذَّبُوهُمَا فَكَانُوا مِنَ الْمُهْلَكِينَ
गरज़ उन लोगों ने इन दोनों को झुठलाया तो आख़िर ये सब के सब हलाक कर डाले गए
49وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ لَعَلَّهُمْ يَهْتَدُونَ
और हमने मूसा को किताब (तौरैत) इसलिए अता की थी कि ये लोग हिदायत पाएँ
50وَجَعَلْنَا ابْنَ مَرْيَمَ وَأُمَّهُ آيَةً وَآوَيْنَاهُمَا إِلَىٰ رَبْوَةٍ ذَاتِ قَرَارٍ وَمَعِينٍ
और हमने मरियम के बेटे (ईसा) और उनकी माँ को (अपनी कुदरत की निशानी बनाया था) और उन दोनों को हमने एक ऊँची हमवार ठहरने के क़ाबिल चश्में वाली ज़मीन पर (रहने की) जगह दी
51يَا أَيُّهَا الرُّسُلُ كُلُوا مِنَ الطَّيِّبَاتِ وَاعْمَلُوا صَالِحًا ۖ إِنِّي بِمَا تَعْمَلُونَ عَلِيمٌ
और मेरा आम हुक्म था कि ऐ (मेरे पैग़म्बर) पाक व पाकीज़ा चीज़ें खाओ और अच्छे अच्छे काम करो (क्योंकि) तुम जो कुछ करते हो मैं उससे बख़ूबी वाक़िफ हूँ
52وَإِنَّ هَٰذِهِ أُمَّتُكُمْ أُمَّةً وَاحِدَةً وَأَنَا رَبُّكُمْ فَاتَّقُونِ
(लोगों ये दीन इस्लाम) तुम सबका मज़हब एक ही मज़हब है और मै तुम लोगों का परवरदिगार हूँ
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 50

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Tuesday, August 18, 2026

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