अल-मोमिनुन · 48/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
فَكَذَّبُوهُمَا فَكَانُوا مِنَ الْمُهْلَكِينَ ۝٤٨
Fakazzaboohumaa fakaanoo minal mmuhlakeen
📖 हिंदी अर्थ
गरज़ उन लोगों ने इन दोनों को झुठलाया तो आख़िर ये सब के सब हलाक कर डाले गए

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَكَذَّبُوهُمَا – उन दोनों (हज़रत मूसा और हज़रत हारून अलैहिमुस्सलाम) को झुठलाया।
  • فَكَانُوا مِنَ الْمُهْلَكِينَ – तो वे हलाक (विनष्ट) होने वालों में से हो गए।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला फ़िरऔन और उसकी क़ौम का हाल बयान फ़रमा रहा है कि जब हज़रत मूसा और हज़रत हारून (अलैहिमुस्सलाम) ने उन्हें अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाया और सच्चे दीन की दावत दी, तो उन लोगों ने न सिर्फ़ उन दोनों को झुठलाया, बल्कि उनके लाए हुए स्पष्ट चमत्कारों (मो'जिज़ात) को भी जादू कहकर खारिज कर दिया। उन्होंने हक़ को नकारने और सरकशी पर अड़े रहने की कीमत चुकाई — वे अल्लाह के अज़ाब के हक़दार बने और समुद्र में डूबकर हलाक कर दिए गए।

यह अल्लाह का क़ानून है कि जब कोई क़ौम अपने नबियों को झुठलाती है और हिदायत के बावजूद ज़ुल्म और इनकार पर डटी रहती है, तो अल्लाह की पकड़ उन्हें आ घेरती है। फ़िरऔन और उसकी फ़ौजें, जो अपनी ताक़त और सल्तनत पर इतराती थीं, आख़िरकार उसी समुद्र में ग़र्क हो गईं जिसे उन्होंने अपने लिए रास्ता समझा था — और यह उनके लिए इतिहास का सबसे बड़ा सबक़ बन गया।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह के रसूलों की दावत को झुठलाना और उनके मुक़ाबले में अकड़ दिखाना बर्बादी का रास्ता है। जो लोग हक़ को नकारते हैं, वे दुनिया में भी रुसवा होते हैं और आख़िरत में भी सख़्त अज़ाब का सामना करेंगे। अल्लाह तआला हमें हक़ को क़बूल करने और नबियों की पैरवी करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 46-50 — सूरा अल-मोमिनुन

46إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَاسْتَكْبَرُوا وَكَانُوا قَوْمًا عَالِينَ
तो उन लोगो ने शेख़ी की और वह थे ही बड़े सरकश लोग
47فَقَالُوا أَنُؤْمِنُ لِبَشَرَيْنِ مِثْلِنَا وَقَوْمُهُمَا لَنَا عَابِدُونَ
आपस मे कहने लगे क्या हम अपने ही ऐसे दो आदमियों पर ईमान ले आएँ हालाँकि इन दोनों की (क़ौम की) क़ौम हमारी ख़िदमत गारी करती है
48فَكَذَّبُوهُمَا فَكَانُوا مِنَ الْمُهْلَكِينَ
गरज़ उन लोगों ने इन दोनों को झुठलाया तो आख़िर ये सब के सब हलाक कर डाले गए
49وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ لَعَلَّهُمْ يَهْتَدُونَ
और हमने मूसा को किताब (तौरैत) इसलिए अता की थी कि ये लोग हिदायत पाएँ
50وَجَعَلْنَا ابْنَ مَرْيَمَ وَأُمَّهُ آيَةً وَآوَيْنَاهُمَا إِلَىٰ رَبْوَةٍ ذَاتِ قَرَارٍ وَمَعِينٍ
और हमने मरियम के बेटे (ईसा) और उनकी माँ को (अपनी कुदरत की निशानी बनाया था) और उन दोनों को हमने एक ऊँची हमवार ठहरने के क़ाबिल चश्में वाली ज़मीन पर (रहने की) जगह दी
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
48आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 48

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Thursday, October 1, 2026

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