Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وُسْعَهَا: उसकी क्षमता, ताकत और सामर्थ्य के अनुसार।
- كِتَابٌ يَنطِقُ بِالْحَقِّ: वह लेखा-पुस्तक (अमलनामा) जो सच बोलता है, यानी उसमें दर्ज हर बात सत्य होती है।
- لَا يُظْلَمُونَ: उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया जाएगा, न उनके अच्छे कर्म कम किए जाएँगे और न बुरे कर्म बढ़ाए जाएँगे।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने बंदों पर असीम रहमत और इंसाफ़ का मालिक है। वह किसी भी व्यक्ति पर वह बोझ नहीं डालता जो उसकी ताकत से बाहर हो। यह अल्लाह का पूरा न्याय और कृपा है कि उसने हर इंसान को उसकी क्षमता के अनुसार ही ज़िम्मेदारी दी है। जो व्यक्ति खड़े होकर नमाज़ नहीं पढ़ सकता, वह बैठकर पढ़े; जो रोज़ा नहीं रख सकता, वह दूसरे दिनों में रखे या फ़िद्या दे। इस्लाम में कोई ऐसा हुक्म नहीं जो इंसान की ताकत से बाहर हो। यही अल्लाह की रहमत है कि उसने दीन को आसान बनाया है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि हमारे पास एक किताब (लौह-ए-महफ़ूज़ और अमलनामा) है जो सच बोलती है। उसमें हर इंसान के अच्छे और बुरे कर्म दर्ज हैं। फ़रिश्ते हर पल उन्हें लिखते रहते हैं। क़यामत के दिन यही किताब गवाही देगी, और उसमें कोई कमी या ज़्यादती नहीं होगी। वह पूरी तरह सच्ची और न्यायपूर्ण होगी।
अल्लाह ने वादा किया है कि किसी पर ज़ुल्म नहीं होगा। न किसी के अच्छे कर्म कम किए जाएँगे, न बुरे कर्म बढ़ाए जाएँगे। हर इंसान को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिलेगा। यह अल्लाह का इंसाफ़ है कि वह किसी के साथ नाइंसाफ़ी नहीं करता।
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह हमारी क्षमता से ज़्यादा हमसे माँग नहीं करता। इसलिए हमें निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि अपनी ताकत के अनुसार अच्छे कर्म करते रहना चाहिए। अल्लाह हमारी छोटी-छोटी कोशिशों को भी क़बूल करता है और उसका पूरा इनाम देता है। यह हमारे लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है कि हमारा रब न्यायी और रहम करने वाला है। हमें चाहिए कि हम उसकी रहमत पर भरोसा रखें और उसके हुक्मों पर अमल करने की पूरी कोशिश करें। अल्लाह कभी किसी का हक़ नहीं मारता, और यही उसका वादा है जो क़यामत तक कायम रहेगा।
📜 आयत 60-64 — सूरा अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 62
सूरा अल-मोमिनुन आयत 62 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हम तो किसी शख्स को उसकी क़ूवत से बढ़के…सूरा आयत 62/118 — सूरा अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मोमिनुन सुनें, सूरा अल-मोमिनुन अनुवाद, सूरा अल-मोमिनुन mp3, सूरा अल-मोमिनुन pdf. आयत 60–64. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मोमिनुन
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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