अल-मोमिनुन · 63/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
بَلْ قُلُوبُهُمْ فِي غَمْرَةٍ مِّنْ هَٰذَا وَلَهُمْ أَعْمَالٌ مِّن دُونِ ذَٰلِكَ هُمْ لَهَا عَامِلُونَ ۝٦٣
Bal quloobuhum fee ghamratim min haazaa wa lahum a`maalum min dooni zaalika hum lahaa `aamiloon
📖 हिंदी अर्थ
उनके दिल उसकी तरफ से ग़फलत में पडे हैं इसके अलावा उन के बहुत से आमाल हैं जिन्हें ये (बराबर किया करते है) और बाज़ नहीं आते
📜

अनुवाद — Tafsir

بَلْ قُلُوبُهُمْ فِي غَمْرَةٍ مِّنْ هَٰذَا وَلَهُمْ أَعْمَالٌ مِّن دُونِ ذَٰلِكَ هُمْ لَهَا عَامِلُونَ

शब्दों के अर्थ:

  • غَمْرَةٍ: ग़फ़लत (लापरवाही) और अज्ञानता का सागर, जो चीज़ को ढक ले।
  • مِن دُونِ ذَٰلِكَ: इस (कुफ़्र) के अलावा, यानी अन्य बुरे काम।

तफ़सीर:

इन काफ़िरों का मामला यह नहीं है कि वे सच्चाई को समझ नहीं पाते, बल्कि उनके दिल इस क़ुरआन से पूरी तरह ग़फ़लत और बेख़बरी में डूबे हुए हैं। यह ग़फ़लत उनके दिलों पर इस क़दर हावी है कि वे इस किताब की आयतों पर विचार ही नहीं करते, न ही उसकी नसीहत को अपने दिलों में जगह देते हैं। यह उनकी अपनी हालत है, जो उन्होंने अपने लिए चुनी है।

इसके अलावा, उनके लिए शिर्क के अलावा भी कई और बुरे काम हैं — वे ज़ुल्म, फ़साद, झूठ, धोखा और दूसरे गुनाह करते हैं। ये सारे काम वे लगातार करते रहते हैं, और अल्लाह उन्हें इसी हाल में छोड़े हुए है, ताकि वे अपने इन कर्मों का पूरा बोझ उठाएँ और फिर उसका बुरा अंजाम भुगतें। यह अल्लाह की ओर से उनके लिए एक मोहलत है, लेकिन यह मोहलत उनके लिए रहमत नहीं, बल्कि अज़ाब का ज़रिया बनेगी।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान का दिल जब ग़फ़लत में डूब जाता है, तो वह सबसे साफ़ सच्चाई को भी नहीं देख पाता। इसलिए हमें अपने दिलों को हमेशा जागा रखना चाहिए, क़ुरआन की आयतों पर विचार करते रहना चाहिए और उन बुरे कामों से बचना चाहिए जो हमें अल्लाह से दूर कर देते हैं। याद रखिए, अल्लाह की मोहलत उसकी पकड़ से बेख़बर न करे — जो लोग गुनाहों पर अड़े रहते हैं, उनका अंजाम बहुत भयानक होता है। आइए, हम अपने दिलों को क़ुरआन की रोशनी से मुनव्वर करें और उन आमाल से बचें जो हमें अल्लाह के अज़ाब की तरफ ले जाते हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 61-65 — अल-मोमिनुन

61أُولَٰئِكَ يُسَارِعُونَ فِي الْخَيْرَاتِ وَهُمْ لَهَا سَابِقُونَ
(देखिये क्या होता है) यही लोग अलबत्ता नेकियों में जल्दी करते हैं और भलाई की तरफ (दूसरों से) लपक के आगे बढ़ जाते हैं
62وَلَا نُكَلِّفُ نَفْسًا إِلَّا وُسْعَهَا ۖ وَلَدَيْنَا كِتَابٌ يَنطِقُ بِالْحَقِّ ۚ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और हम तो किसी शख्स को उसकी क़ूवत से बढ़के तकलीफ देते ही नहीं और हमारे पास तो (लोगों के आमाल की) किताब है जो बिल्कुल ठीक (हाल बताती है) और उन लोगों की (ज़र्रा बराबर) हक़ तलफी नहीं की जाएगी
63بَلْ قُلُوبُهُمْ فِي غَمْرَةٍ مِّنْ هَٰذَا وَلَهُمْ أَعْمَالٌ مِّن دُونِ ذَٰلِكَ هُمْ لَهَا عَامِلُونَ
उनके दिल उसकी तरफ से ग़फलत में पडे हैं इसके अलावा उन के बहुत से आमाल हैं जिन्हें ये (बराबर किया करते है) और बाज़ नहीं आते
64حَتَّىٰ إِذَا أَخَذْنَا مُتْرَفِيهِم بِالْعَذَابِ إِذَا هُمْ يَجْأَرُونَ
यहाँ तक कि जब हम उनके मालदारों को अज़ाब में गिरफ््तार करेंगे तो ये लोग वावैला करने लगेंगें
65لَا تَجْأَرُوا الْيَوْمَ ۖ إِنَّكُم مِّنَّا لَا تُنصَرُونَ
(उस वक्त क़हा जाएगा) आज वावैला मत करों तुमको अब हमारी तरफ से मदद नहीं मिल सकती
अल-मोमिनुनकुरान सूची
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63आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 63

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Tuesday, August 18, 2026

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