अल-मोमिनुन · 61/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
أُولَٰئِكَ يُسَارِعُونَ فِي الْخَيْرَاتِ وَهُمْ لَهَا سَابِقُونَ ۝٦١
Ulaaa`ika yusaari`oona fil khairaati wa hum lahaa saabiqoon
📖 हिंदी अर्थ
(देखिये क्या होता है) यही लोग अलबत्ता नेकियों में जल्दी करते हैं और भलाई की तरफ (दूसरों से) लपक के आगे बढ़ जाते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُسَارِعُونَ: जल्दी करते हैं, दौड़ते हैं।
  • الْخَيْرَاتِ: नेक काम, भलाई के कार्य।
  • سَابِقُونَ: आगे बढ़ने वाले, प्रतिस्पर्धा में अग्रणी।

तफ़सीर:

ये वे लोग हैं जिन्हें अल्लाह ने अपनी किताब में उन गुणों के साथ वर्णित किया है—जो नमाज़ में ख़ुशूअ रखते हैं, बेकार बातों से मुँह मोड़ते हैं, ज़कात अदा करते हैं, अपनी शर्मगाहों की रक्षा करते हैं, और अपनी अमानतों तथा वचनों का पालन करते हैं। ये वही लोग हैं जो नेक कामों में जल्दी करते हैं, भलाई के कामों में एक-दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं। वे आलस्य या देरी नहीं करते, बल्कि जब भी कोई अच्छा काम सामने आता है, तो वे उसे तुरंत करते हैं और उसमें सबसे आगे रहते हैं।

ये लोग नेकियों की ओर इसलिए दौड़ते हैं क्योंकि वे अल्लाह की रज़ा और उसके करीब होने की चाहत रखते हैं। उनका ये सबक़त (आगे बढ़ना) सिर्फ़ दुनिया में नहीं, बल्कि आख़िरत में भी उन्हें ऊँचे दर्जे तक पहुँचाएगा। वे जानते हैं कि नेक कामों में जल्दी करना अल्लाह की मुहब्बत की निशानी है, और अल्लाह उन लोगों से प्यार करता है जो भलाई में तेज़ी दिखाते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि एक मोमिन की पहचान ये है कि वह नेक कामों में देरी नहीं करता। जब हम किसी अच्छे काम का मौक़ा देखें, तो उसे टालना नहीं चाहिए, क्योंकि हमें नहीं पता कि कल होगा या नहीं। अल्लाह उन लोगों से बहुत प्यार करता है जो भलाई में एक-दूसरे से आगे बढ़ते हैं। ये वो लोग हैं जो दुनिया में भी कामयाब हैं और आख़िरत में भी उनका मुक़ाम बुलंद होगा। आइए, हम भी अपनी ज़िंदगी में नेक कामों को पहली तरजीह दें, और हर अच्छे काम में जल्दी करें—चाहे वो नमाज़ हो, मदद करना हो, या किसी को खुश करना हो। यही रास्ता हमें अल्लाह की रज़ा और जन्नत तक पहुँचाएगा।



📜 आयत 59-63 — सूरा अल-मोमिनुन

59وَالَّذِينَ هُم بِرَبِّهِمْ لَا يُشْرِكُونَ
और अपने परवरदिगार का किसी को शरीक नही बनाते
60وَالَّذِينَ يُؤْتُونَ مَا آتَوا وَّقُلُوبُهُمْ وَجِلَةٌ أَنَّهُمْ إِلَىٰ رَبِّهِمْ رَاجِعُونَ
और जो लोग (ख़ुदा की राह में) जो कुछ बन पड़ता है देते हैं और फिर उनके दिल को इस बात का खटका लगा हुआ है कि उन्हें अपने परवरदिगार के सामने लौट कर जाना है
61أُولَٰئِكَ يُسَارِعُونَ فِي الْخَيْرَاتِ وَهُمْ لَهَا سَابِقُونَ
(देखिये क्या होता है) यही लोग अलबत्ता नेकियों में जल्दी करते हैं और भलाई की तरफ (दूसरों से) लपक के आगे बढ़ जाते हैं
62وَلَا نُكَلِّفُ نَفْسًا إِلَّا وُسْعَهَا ۖ وَلَدَيْنَا كِتَابٌ يَنطِقُ بِالْحَقِّ ۚ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और हम तो किसी शख्स को उसकी क़ूवत से बढ़के तकलीफ देते ही नहीं और हमारे पास तो (लोगों के आमाल की) किताब है जो बिल्कुल ठीक (हाल बताती है) और उन लोगों की (ज़र्रा बराबर) हक़ तलफी नहीं की जाएगी
63بَلْ قُلُوبُهُمْ فِي غَمْرَةٍ مِّنْ هَٰذَا وَلَهُمْ أَعْمَالٌ مِّن دُونِ ذَٰلِكَ هُمْ لَهَا عَامِلُونَ
उनके दिल उसकी तरफ से ग़फलत में पडे हैं इसके अलावा उन के बहुत से आमाल हैं जिन्हें ये (बराबर किया करते है) और बाज़ नहीं आते
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
61आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 61

सूरा अल-मोमिनुन आयत 61 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (देखिये क्या होता है) यही लोग अलबत्ता नेकियों में जल्दी…

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Friday, October 2, 2026

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