अल-मोमिनुन · 67/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
مُسْتَكْبِرِينَ بِهِ سَامِرًا تَهْجُرُونَ ۝٦٧
Mustakbireena bihee saamiran tahjuroon
📖 हिंदी अर्थ
तो क्या उन लोगों ने (हमारी) बात (कुरान) पर ग़ौर नहीं किया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُسْتَكْبِرِينَ: घमंड करने वाले, अहंकार दिखाने वाले।
  • بِهِ: इससे, यानी बैतुल्लाह (काबा) या हरम से।
  • سَامِرًا: रात में बातें करने वाला समूह, रात की مجلس।
  • تَهْجُرُونَ: बुरी और अश्लील बातें कहना, कुरान के बारे में बुरा कहना।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जो अपने घमंड और अहंकार की वजह से हक़ (सत्य) को नहीं मानते। ये लोग काबा और हरम-ए-शरीफ़ को अपनी पहचान और गर्व का ज़रिया बनाए हुए थे, और कहते थे कि हम इस घर के रहने वाले हैं, हम पर कोई ग़ालिब नहीं आ सकता। वे अपने इसी झूठे दावे की वजह से लोगों पर घमंड करते थे, जबकि असल में बैतुल्लाह के असली मेज़बान वही हैं जो तक़वा (परहेज़गारी) अपनाएं, सिर्फ़ नस्ल या जगह का दावा करने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।

इसके अलावा, वे रात के समय काबा के पास इकट्ठा होकर बुरी और बेहूदा बातें करते थे, और कुरान के बारे में भी अपमानजनक और गलत बातें कहते थे। उनकी यह हरकतें दिखाती हैं कि उनके दिलों में अल्लाह के घर की कोई अज़्मत (सम्मान) नहीं थी, बल्कि वे सिर्फ़ अपनी बड़ाई और दुनियावी फ़ायदे के लिए उसका सहारा लेते थे।

दावत और नसीहत:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के घर और उसकी इबादत की असली अज़्मत दिल में होती है, सिर्फ़ ज़ुबान से दावा करने से कुछ नहीं होता। हमें चाहिए कि हम अपने अंदर से घमंड और अहंकार को निकालें, और अल्लाह के सामने झुककर उसकी इबादत करें। कुरान को अपनाएं, उसकी तालीमात पर अमल करें, और उसके बारे में कभी बुरा न बोलें। याद रखें, अल्लाह के घर की असली ज़ियारत और उसकी क़ुबूलियत उसी को मिलती है जो दिल से पाक हो, अमल में नेक हो, और लोगों के साथ हुस्न-ए-अख़लाक़ (अच्छे व्यवहार) से पेश आए। अल्लाह हमें घमंड से बचाए और अपनी इबादत की सच्ची तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 65-69 — अल-मोमिनुन

65لَا تَجْأَرُوا الْيَوْمَ ۖ إِنَّكُم مِّنَّا لَا تُنصَرُونَ
(उस वक्त क़हा जाएगा) आज वावैला मत करों तुमको अब हमारी तरफ से मदद नहीं मिल सकती
66قَدْ كَانَتْ آيَاتِي تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فَكُنتُمْ عَلَىٰ أَعْقَابِكُمْ تَنكِصُونَ
(जब) हमारी आयतें तुम्हारे सामने पढ़ी जाती थीं तो तुम अकड़ते किस्सा कहते बकते हुए उन से उलटे पाँव फिर जाते
67مُسْتَكْبِرِينَ بِهِ سَامِرًا تَهْجُرُونَ
तो क्या उन लोगों ने (हमारी) बात (कुरान) पर ग़ौर नहीं किया
68أَفَلَمْ يَدَّبَّرُوا الْقَوْلَ أَمْ جَاءَهُم مَّا لَمْ يَأْتِ آبَاءَهُمُ الْأَوَّلِينَ
उनके पास कोई ऐसी नयी चीज़ आयी जो उनके अगले बाप दादाओं के पास नहीं आयी थी
69أَمْ لَمْ يَعْرِفُوا رَسُولَهُمْ فَهُمْ لَهُ مُنكِرُونَ
या उन लोगों ने अपने रसूल ही को नहीं पहचाना तो इस वजह से इन्कार कर बैठे
अल-मोमिनुनकुरान सूची
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67आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 67

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Tuesday, August 18, 2026

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