अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَدَّبَّرُوا – गहराई से सोचें, चिंतन करें
- الْقَوْل – यहाँ अर्थ है क़ुरआन
- أَمْ – यहाँ इसका अर्थ है "बल्कि" या "क्या"
- آبَاءَهُمُ الْأَوَّلِينَ – उनके पूर्वज, जो पहले गुज़र चुके हैं
तफ़सीर:
क्या इन लोगों ने क़ुरआन पर कभी ग़ौर-ओ-फ़िक्र नहीं किया? क्या उन्होंने इसकी आयातों पर दिल से विचार नहीं किया? अगर वे ऐसा करते, तो उन्हें यक़ीन हो जाता कि यह कलाम अल्लाह का है, क्योंकि इसकी सच्चाई, इसकी गहराई और इसकी रौशनी हर उस शख़्स पर ज़ाहिर हो जाती है जो सच्चे दिल से इस पर ध्यान देता है।
यह सवाल उन लोगों के लिए है जो क़ुरआन से मुँह मोड़ते हैं और उसे मानने से इनकार करते हैं। क्या उनका इनकार इसलिए है कि उन्होंने क़ुरआन को समझा और फिर उसे झुठलाया? हरगिज़ नहीं! बल्कि उनका असली इल्ज़ाम यह है कि उनके पास वह चीज़ आई जो उनके पहले के बाप-दादा के पास नहीं आई थी — यानी रसूल और किताब। यह चीज़ उनके लिए अजनबी थी, उनकी आदतों और रिवाजों के खिलाफ़ थी, इसलिए उन्होंने उसे क़बूल करने की ज़हमत नहीं उठाई और उसे झुठला दिया।
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने क़ुरआन को इसलिए नाज़िल किया ताकि लोग उस पर ग़ौर करें, उसे समझें और उस पर अमल करें। क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं है, बल्कि उस पर सोचने, समझने और अपनी ज़िंदगी को उसके अनुसार ढालने के लिए है।
प्यारे भाइयो और बहनो! आज हमारे पास वह क़ुरआन मौजूद है जो हिदायत का ज़रिया है। अगर हम उसे पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, तो हमारी ज़िंदगी में रौशनी आएगी। अल्लाह हमें क़ुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 66-70 — अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 68
सूरा अल-मोमिनुन आयत 68 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उनके पास कोई ऐसी नयी चीज़ आयी जो उनके अगले…सूरा आयत 68/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 66–70. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








