अल-मोमिनुन · 68/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
أَفَلَمْ يَدَّبَّرُوا الْقَوْلَ أَمْ جَاءَهُم مَّا لَمْ يَأْتِ آبَاءَهُمُ الْأَوَّلِينَ ۝٦٨
Afalam yaddabbarrul qawla am jaaa`ahum maa lam yaati aabaaa`ahumul awwaleen
📖 हिंदी अर्थ
उनके पास कोई ऐसी नयी चीज़ आयी जो उनके अगले बाप दादाओं के पास नहीं आयी थी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَدَّبَّرُوا – गहराई से सोचें, चिंतन करें
  • الْقَوْل – यहाँ अर्थ है क़ुरआन
  • أَمْ – यहाँ इसका अर्थ है "बल्कि" या "क्या"
  • آبَاءَهُمُ الْأَوَّلِينَ – उनके पूर्वज, जो पहले गुज़र चुके हैं

तफ़सीर:

क्या इन लोगों ने क़ुरआन पर कभी ग़ौर-ओ-फ़िक्र नहीं किया? क्या उन्होंने इसकी आयातों पर दिल से विचार नहीं किया? अगर वे ऐसा करते, तो उन्हें यक़ीन हो जाता कि यह कलाम अल्लाह का है, क्योंकि इसकी सच्चाई, इसकी गहराई और इसकी रौशनी हर उस शख़्स पर ज़ाहिर हो जाती है जो सच्चे दिल से इस पर ध्यान देता है।

यह सवाल उन लोगों के लिए है जो क़ुरआन से मुँह मोड़ते हैं और उसे मानने से इनकार करते हैं। क्या उनका इनकार इसलिए है कि उन्होंने क़ुरआन को समझा और फिर उसे झुठलाया? हरगिज़ नहीं! बल्कि उनका असली इल्ज़ाम यह है कि उनके पास वह चीज़ आई जो उनके पहले के बाप-दादा के पास नहीं आई थी — यानी रसूल और किताब। यह चीज़ उनके लिए अजनबी थी, उनकी आदतों और रिवाजों के खिलाफ़ थी, इसलिए उन्होंने उसे क़बूल करने की ज़हमत नहीं उठाई और उसे झुठला दिया।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने क़ुरआन को इसलिए नाज़िल किया ताकि लोग उस पर ग़ौर करें, उसे समझें और उस पर अमल करें। क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं है, बल्कि उस पर सोचने, समझने और अपनी ज़िंदगी को उसके अनुसार ढालने के लिए है।

प्यारे भाइयो और बहनो! आज हमारे पास वह क़ुरआन मौजूद है जो हिदायत का ज़रिया है। अगर हम उसे पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, तो हमारी ज़िंदगी में रौशनी आएगी। अल्लाह हमें क़ुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 66-70 — अल-मोमिनुन

66قَدْ كَانَتْ آيَاتِي تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فَكُنتُمْ عَلَىٰ أَعْقَابِكُمْ تَنكِصُونَ
(जब) हमारी आयतें तुम्हारे सामने पढ़ी जाती थीं तो तुम अकड़ते किस्सा कहते बकते हुए उन से उलटे पाँव फिर जाते
67مُسْتَكْبِرِينَ بِهِ سَامِرًا تَهْجُرُونَ
तो क्या उन लोगों ने (हमारी) बात (कुरान) पर ग़ौर नहीं किया
68أَفَلَمْ يَدَّبَّرُوا الْقَوْلَ أَمْ جَاءَهُم مَّا لَمْ يَأْتِ آبَاءَهُمُ الْأَوَّلِينَ
उनके पास कोई ऐसी नयी चीज़ आयी जो उनके अगले बाप दादाओं के पास नहीं आयी थी
69أَمْ لَمْ يَعْرِفُوا رَسُولَهُمْ فَهُمْ لَهُ مُنكِرُونَ
या उन लोगों ने अपने रसूल ही को नहीं पहचाना तो इस वजह से इन्कार कर बैठे
70أَمْ يَقُولُونَ بِهِ جِنَّةٌ ۚ بَلْ جَاءَهُم بِالْحَقِّ وَأَكْثَرُهُمْ لِلْحَقِّ كَارِهُونَ
या कहते हैं कि इसको जुनून हो गया है (हरगिज़ उसे जुनून नहीं) बल्कि वह तो उनके पास हक़ बात लेकर आया है और उनमें के अक्सर हक़ बात से नफरत रखते हैं
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीRevelation
68आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 68

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पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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