अल-मोमिनुन · 66/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
قَدْ كَانَتْ آيَاتِي تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فَكُنتُمْ عَلَىٰ أَعْقَابِكُمْ تَنكِصُونَ ۝٦٦
Qad kaanat Aayaatee tutlaa `alaikum fakuntum `alaaa a`qaabikum tankisoon
📖 हिंदी अर्थ
(जब) हमारी आयतें तुम्हारे सामने पढ़ी जाती थीं तो तुम अकड़ते किस्सा कहते बकते हुए उन से उलटे पाँव फिर जाते

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آيَاتِي: मेरी आयतें (क़ुरआन की आयतें)
  • تُتْلَى: पढ़ी जाती थीं, सुनाई जाती थीं
  • عَلَى أَعْقَابِكُمْ: अपनी एड़ियों के बल (पीछे की ओर)
  • تَنكِصُونَ: पीछे हटते थे, मुँह मोड़कर भागते थे

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों की निंदा कर रहा है जिन्होंने दुनिया में क़ुरआन की आयतें सुनीं, लेकिन उन पर ईमान नहीं लाए। अल्लाह फ़रमाता है कि उसकी आयतें तुम्हारे सामने पढ़ी जाती थीं, ताकि तुम उन पर ईमान लाओ और उनके अनुसार अपने जीवन को ढालो। लेकिन तुम्हारा हाल यह था कि जब भी ये आयतें पढ़ी जातीं, तुम उनसे कतराते और पीछे हट जाते, जैसे कोई व्यक्ति एड़ियों के बल उल्टा चलकर भाग जाए।

यह एक बहुत ही स्पष्ट और प्रभावशाली चित्रण है — जब सच्चाई सामने आती है, तो सच्चे दिल वाले उसे कबूल करते हैं, लेकिन जिनके दिलों में घमंड और हठ होता है, वे सच्चाई से दूर भागते हैं। वे क़ुरआन की आयतों को सुनकर भी उन्हें नकार देते थे, क्योंकि उन्हें अपनी रस्मों-रिवाजों और बड़ों की बातों पर घमंड था।

दावती पहलू:

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह तआला ने हमें क़ुरआन जैसी नेमत दी है — यह किताब हमारे लिए हिदायत, रहमत और रोशनी है। जब हम क़ुरआन की आयतें सुनते हैं, तो हमें उनसे दूर नहीं भागना चाहिए, बल्कि उन्हें दिल से सुनना चाहिए, उन पर अमल करना चाहिए और उन्हें अपनी ज़िंदगी का नुस्खा बनाना चाहिए। क़ुरआन वह किताब है जो हमें जहन्नुम की आग से बचाकर जन्नत की राह दिखाती है।

आज भी बहुत से लोग क़ुरआन की आयतें सुनकर पीछे हट जाते हैं — या तो वे इसे सुनते ही नहीं, या सुनकर दिल में कोई असर नहीं लेते, या फिर इसे सिर्फ़ तिलावत तक सीमित रख देते हैं और उस पर अमल नहीं करते। हमें चाहिए कि क़ुरआन को सुनकर उस पर ग़ौर करें, उसके हुक्मों को समझें और उन पर अमल करें। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रहमत तक पहुँचाता है।

अल्लाह तआला हम सबको क़ुरआन को समझने, उस पर अमल करने और उसके ज़रिए अपनी ज़िंदगी को संवारने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 64-68 — सूरा अल-मोमिनुन

64حَتَّىٰ إِذَا أَخَذْنَا مُتْرَفِيهِم بِالْعَذَابِ إِذَا هُمْ يَجْأَرُونَ
यहाँ तक कि जब हम उनके मालदारों को अज़ाब में गिरफ््तार करेंगे तो ये लोग वावैला करने लगेंगें
65لَا تَجْأَرُوا الْيَوْمَ ۖ إِنَّكُم مِّنَّا لَا تُنصَرُونَ
(उस वक्त क़हा जाएगा) आज वावैला मत करों तुमको अब हमारी तरफ से मदद नहीं मिल सकती
66قَدْ كَانَتْ آيَاتِي تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فَكُنتُمْ عَلَىٰ أَعْقَابِكُمْ تَنكِصُونَ
(जब) हमारी आयतें तुम्हारे सामने पढ़ी जाती थीं तो तुम अकड़ते किस्सा कहते बकते हुए उन से उलटे पाँव फिर जाते
67مُسْتَكْبِرِينَ بِهِ سَامِرًا تَهْجُرُونَ
तो क्या उन लोगों ने (हमारी) बात (कुरान) पर ग़ौर नहीं किया
68أَفَلَمْ يَدَّبَّرُوا الْقَوْلَ أَمْ جَاءَهُم مَّا لَمْ يَأْتِ آبَاءَهُمُ الْأَوَّلِينَ
उनके पास कोई ऐसी नयी चीज़ आयी जो उनके अगले बाप दादाओं के पास नहीं आयी थी
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
66आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 66

सूरा अल-मोमिनुन आयत 66 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (जब) हमारी आयतें तुम्हारे सामने पढ़ी जाती थीं तो तुम…

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Thursday, October 1, 2026

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