Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- إِن كَادَ لَيُضِلُّنَا: वह (मुहम्मद ﷺ) तो हमें बहका ही देते
- عَنْ آلِهَتِنَا: हमारे पूज्यों (देवताओं) से
- لَوْلَا أَن صَبَرْنَا عَلَيْهَا: अगर हम उन (देवताओं) पर जमे न रहते
- مَنْ أَضَلُّ سَبِيلًا: कौन अधिक पथभ्रष्ट है
विस्तृत तफ़सीर:
जब ये काफ़िर और मुशरिक लोग आपको (ऐ नबी ﷺ) देखते थे, तो आपका मज़ाक उड़ाते थे और ताने मारते थे। वे कहते थे: "क्या यही वह शख्स है जो दावा करता है कि अल्लाह ने इसे हमारी ओर रसूल बनाकर भेजा है?" फिर वे अपनी नादानी और हठधर्मी में कहते थे: "यह तो अपनी दलीलों और तर्कों के ज़ोर से हमें हमारे देवताओं की पूजा से भटकाने ही वाला था, अगर हम अपने देवताओं पर साबित क़दम न रहते और उनकी इबादत पर ज़िद न करते।"
यानी वे अपनी गुमराही को सब्र और पक्के इरादे का नाम दे रहे थे, जबकि हक़ीक़त में यह उनकी जिद और अंधी पैरवी थी। वे समझते थे कि हमने अपने बुज़ुर्गों के दीन पर सब्र किया, लेकिन असल में वे सच्चाई से भाग रहे थे।
फिर अल्लाह तआला ने उन्हें धमकी दी: "और जब ये लोग अज़ाब को अपनी आँखों से देख लेंगे — चाहे वह क़ब्र का अज़ाब हो या क़यामत के दिन का — तो उन्हें ख़ुद पता चल जाएगा कि असल में सबसे ज़्यादा पथभ्रष्ट कौन है। क्या वे जो अपने हाथों के बनाए पत्थरों की पूजा कर रहे हैं, या वह नबी ﷺ जो उन्हें अल्लाह की तौहीद की तरफ बुला रहा है?"
उस दिन हर शख्स पर सच्चाई वाज़ेह हो जाएगी, और उन्हें मालूम होगा कि कौन सी राह सीधी थी और कौन सी गुमराही की। मगर अफ़सोस, यह जानकारी उस वक़्त किसी काम न आएगी जब अज़ाब आ चुका होगा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई पर क़ायम रहना और अल्लाह की राह में मुश्किलों को सहना कितनी बड़ी फज़ीलत है। जब नबी ﷺ ने तौहीद का पैग़ाम पहुँचाया, तो मुशरिकों ने उसे बहकाना कहा, लेकिन अल्लाह ने साफ़ कर दिया कि असली कामयाबी उसी की है जो अल्लाह की राह पर चले। आज भी जब कोई इंसान हक़ की तरफ बुलाता है, तो उसे तानों और मज़ाक का सामना करना पड़ता है, लेकिन अल्लाह का वादा है कि आख़िरत में सच्चाई ज़ाहिर होगी और हक़ पर चलने वालों को कामयाबी मिलेगी। हमें चाहिए कि हम अपने ईमान पर मज़बूती से जमे रहें, क्योंकि अल्लाह की मदद सब्र करने वालों के साथ है।
📜 आयत 40-44 — सूरा अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 42
सूरा अल-फुरकान आयत 42 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर बुतों की परसतिश पर साबित क़दम न रहते तो…सूरा आयत 42/77 — सूरा अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फुरकान सुनें, सूरा अल-फुरकान अनुवाद, सूरा अल-फुरकान mp3, सूरा अल-फुरकान pdf. आयत 40–44. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-फुरकान
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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