अश-शुआरा · 108/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ ۝١٠٨
Fattaqullaaha wa atee`oon
📖 हिंदी अर्थ
और मैं इस (तबलीग़े रिसालत) पर कुछ उजरत तो माँगता नहीं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَاتَّقُوا اللَّهَ: अल्लाह से डरो, उसके आदेशों का पालन करो और उसकी निषेधों से बचो।
  • وَأَطِيعُونِ: और मेरी आज्ञा का पालन करो।

तफ़सीर:

अल्लाह के नबी नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को सम्बोधित करते हुए यह पुकार लगाई। उन्होंने अपनी क़ौम को दो महत्वपूर्ण बातों की ओर बुलाया: पहली, अल्लाह का तक़वा (डर) अपनाना, और दूसरी, उनकी आज्ञा का पालन करना। तक़वा का अर्थ है अल्लाह के आदेशों का पालन करना और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचना। यही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह के क्रोध और अज़ाब से बचाती है। और नबी की आज्ञा का पालन करना दरअसल अल्लाह की आज्ञा का पालन करना है, क्योंकि नबी अल्लाह की ओर से भेजे गए होते हैं और वे केवल वही बोलते हैं जो अल्लाह उन्हें बताता है।

नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से कहा कि वे अल्लाह से डरें और उसकी इबादत में किसी को शरीक न करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस दावत के बदले कोई मेहनताना या इनाम नहीं माँग रहे हैं। उनका इनाम तो केवल अल्लाह के पास है। यह उनकी सच्चाई और निःस्वार्थता का प्रमाण था। उन्होंने अपनी क़ौम को समझाया कि अल्लाह ही सारे जहानों का रब है, वही सबका पालनहार और मालिक है। उसी की इबादत करना और उसी के आगे सिर झुकाना ही सच्ची सफलता है।

यह पुकार आज भी हर उस इंसान के लिए है जो सच्चाई और हिदायत की तलाश में है। अल्लाह का तक़वा अपनाने और उसके नबी की आज्ञा का पालन करने में ही दुनिया और आख़िरत की भलाई है। जो व्यक्ति अल्लाह से डरता है और उसके नबी की सुनता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। यही वह रास्ता है जो जन्नत तक पहुँचाता है और जहन्नुम के अज़ाब से बचाता है। अल्लाह की रहमत उन्हीं पर होती है जो उसके डर के साथ उसकी इबादत करते हैं और उसके रसूलों की पैरवी करते हैं।



📜 आयत 106-110 — सूरा अश-शुआरा

106إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ نُوحٌ أَلَا تَتَّقُونَ
कि जब उनसे उन के भाई नूह ने कहा कि तुम लोग (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते मै तो तुम्हारा यक़ीनी अमानत दार पैग़म्बर हूँ
107إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
तुम खुदा से डरो और मेरी इताअत करो
108فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
और मैं इस (तबलीग़े रिसालत) पर कुछ उजरत तो माँगता नहीं
109وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ
मेरी उजरत तो बस सारे जहाँ के पालने वाले ख़ुदा पर है
110فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
तो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो वह लोग बोले जब कमीनो मज़दूरों वग़ैरह ने (लालच से) तुम्हारी पैरवी कर ली है
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
108आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 108

सूरा अश-शुआरा आयत 108 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मैं इस (तबलीग़े रिसालत) पर कुछ उजरत तो माँगता…

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Saturday, October 3, 2026

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