अश-शुआरा · 143/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ ۝١٤٣
Innee lakum Rasoolun ameen
📖 हिंदी अर्थ
मैं तो यक़ीनन तुम्हारा अमानतदार पैग़म्बर हूँ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • रसूल: संदेशवाहक, जिसे अल्लाह ने अपने बंदों की ओर भेजा हो।
  • अमीन: विश्वसनीय, भरोसेमंद, जो अमानत को पूरी तरह अदा करे और उसमें कोई कमी या अधिकती न करे।

तफ़सीर (व्याख्या):

नबी सालिह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम (समुदाय) से कहा: "मैं तुम्हारे लिए अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूँ, और मैं अपनी इस रिसालत (पैग़म्बरी) में पूरी तरह अमानतदार हूँ।" यानी मैं अल्लाह का संदेश जैसा मुझे मिला है, वैसा ही तुम तक पहुँचाता हूँ—न उसमें कुछ बढ़ाता हूँ, न घटाता हूँ, न छिपाता हूँ। मैं तुम्हें सिर्फ़ अल्लाह की इबादत की दावत देता हूँ, और इस दावत के बदले तुमसे कोई मेहनताना या इनाम नहीं माँगता। मेरा इनाम तो बस अल्लाह के पास है, जो सारे जहानों का रब है।

यह आयत हमें सिखाती है कि नबियों की सबसे बड़ी पहचान उनकी अमानतदारी और सच्चाई है। जिस तरह नबी सालिह ने अपनी क़ौम को यक़ीन दिलाया कि वह अमीन हैं, उसी तरह हमें भी अपने जीवन में सच्चाई और अमानतदारी को अपनाना चाहिए। अल्लाह के रसूलों ने कभी झूठ नहीं बोला, कभी धोखा नहीं दिया, और हमेशा अपनी उम्मत की भलाई चाही।

आज के दौर में जब दुनिया भरोसे की कमी से जूझ रही है, यह आयत हमें याद दिलाती है कि सच्चा मुसलमान वही है जो अमानतदार हो, अपने वादों का पक्का हो, और अपने काम में ईमानदार हो। नबी सालिह की यह दावत हमें बताती है कि दीन की बुनियाद तक़वा (अल्लाह का डर) और अमानतदारी पर खड़ी है। अगर हम इन गुणों को अपना लें, तो न सिर्फ़ दुनिया में इज़्ज़त पाएँगे, बल्कि आख़िरत में भी कामयाब होंगे। अल्लाह हमें सच्चे और अमानतदार बंदे बनाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 141-145 — अश-शुआरा

141كَذَّبَتْ ثَمُودُ الْمُرْسَلِينَ
(इसी तरह क़ौम) समूद ने पैग़म्बरों को झुठलाया
142إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ صَالِحٌ أَلَا تَتَّقُونَ
जब उनके भाई सालेह ने उनसे कहा कि तुम (ख़ुदा से) क्यो नहीं डरते
143إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
मैं तो यक़ीनन तुम्हारा अमानतदार पैग़म्बर हूँ
144فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
तो खुदा से डरो और मेरी इताअत करो
145وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ
और मै तो तुमसे इस (तबलीगे रिसालत) पर कुछ मज़दूरी भी नहीं माँगता- मेरी मज़दूरी तो बस सारी ख़ुदाई के पालने वाले (ख़ुदा पर है)
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अनुवाद — अश-शुआरा 143

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Tuesday, August 18, 2026

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