अश-शुआरा · 144/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ ۝١٤٤
Fattaqul laaha wa atee`oon
📖 हिंदी अर्थ
तो खुदा से डरो और मेरी इताअत करो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاتَّقُوا اللَّهَ: अल्लाह से डरो, उसकी अवज्ञा से बचो और उसके आदेशों का पालन करो।
  • وَأَطِيعُونِ: और मेरी आज्ञा का पालन करो (अर्थात् जो मैं तुम्हें अल्लाह की ओर से बताऊँ, उसे मानो)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत नबी सालिह अलैहिस्सलाम की कहानी का हिस्सा है, जो उनकी क़ौम (समुदाय) से उनका आख़िरी और नसीहत भरा पैग़ाम है। इस आयत में सालिह अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम से कह रहे हैं: "तुम अल्लाह से डरो और उसके अज़ाब से बचो, और मेरी आज्ञा का पालन करो।"

यहाँ "तक़वा" (अल्लाह का डर) का मतलब है कि अल्लाह के हुक्मों को मानो, उसकी मना की हुई चीज़ों से बचो, और उसे अकेला ही अपना मालिक और पूज्य मानो। और "मेरी आज्ञा का पालन करो" का मतलब है कि जो मैं तुम्हें अल्लाह की ओर से सिखा रहा हूँ—तौहीद (एकेश्वरवाद), इबादत और अच्छे काम—उसे अपनाओ।

यह नसीहत सिर्फ़ सालिह अलैहिस्सलाम की क़ौम के लिए नहीं थी, बल्कि हर उस इंसान के लिए है जो अल्लाह के रसूलों की पैरवी करता है। इस आयत में दो बड़ी बातें हैं: पहली, अल्लाह का डर (तक़वा) जो इंसान को गुनाहों से रोकता है; दूसरी, नबी की आज्ञा का पालन जो इंसान को सही रास्ते पर चलाता है।

जब इंसान अल्लाह से डरता है और अपने नबी की बात मानता है, तो उसकी ज़िंदगी में बरकत आती है, उसका दिल सुकून पाता है, और उसे दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई मिलती है। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है और जहन्नम की आग से बचाता है।

इसलिए, हमें भी चाहिए कि हम अल्लाह से डरें, उसके हुक्मों को मानें, और अपने प्यारे नबी मुहम्मद ﷺ की सुन्नत पर चलें, क्योंकि यही हमारी कामयाबी की कुंजी है। अल्लाह हमें तक़वा और नबी की पैरवी की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 142-146 — अश-शुआरा

142إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ صَالِحٌ أَلَا تَتَّقُونَ
जब उनके भाई सालेह ने उनसे कहा कि तुम (ख़ुदा से) क्यो नहीं डरते
143إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
मैं तो यक़ीनन तुम्हारा अमानतदार पैग़म्बर हूँ
144فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
तो खुदा से डरो और मेरी इताअत करो
145وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ
और मै तो तुमसे इस (तबलीगे रिसालत) पर कुछ मज़दूरी भी नहीं माँगता- मेरी मज़दूरी तो बस सारी ख़ुदाई के पालने वाले (ख़ुदा पर है)
146أَتُتْرَكُونَ فِي مَا هَاهُنَا آمِنِينَ
क्या जो चीजें यहाँ (दुनिया में) मौजूद है
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अनुवाद — अश-शुआरा 144

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Tuesday, August 18, 2026

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