अश-शुआरा · 202/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
فَيَأْتِيَهُم بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ ۝٢٠٢
Fayaatiyahum baghtatanw wa hum laa yash`uroon
📖 हिंदी अर्थ
कि वह यकायक इस हालत में उन पर आ पडेग़ा कि उन्हें ख़बर भी न होगी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • बग़्तह (بَغْتَةً): अचानक, एकाएक, बिना किसी पूर्व सूचना के।
  • ला यश्उरून (لَا يَشْعُرُونَ): उन्हें इसका एहसास नहीं होता, वे इसके बारे में जानते नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने क़ुरआन और रसूलुल्लाह ﷺ की दावत को झुठलाया और अल्लाह की निशानियों पर आँखें बंद कर लीं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उनका अंजाम यह होगा कि अज़ाब (यातना) उन पर अचानक आ पड़ेगा, जबकि उन्हें इसका कोई एहसास या अंदाज़ा भी नहीं होगा। वे इसे आते हुए नहीं देखेंगे, न ही उन्हें कोई पूर्व संकेत मिलेगा। यह अज़ाब उन्हें इस तरह घेर लेगा कि वे चौंक जाएँगे और समझ ही नहीं पाएँगे कि क्या हो गया। उस वक़्त वे पछतावे में डूब जाएँगे और कहेंगे: "क्या हमें कोई मोहलत (छूट) मिल सकती है ताकि हम अपने कु़फ्र से तौबा कर लें और जो हमने खोया है उसे पा लें?" लेकिन यह पछतावा उनके किसी काम न आएगा, क्योंकि अज़ाब आ चुका होगा और मौका हाथ से निकल चुका होगा।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त की तरफ इशारा करती है कि अल्लाह का अज़ाब कभी भी आ सकता है, और वह इस तरह आता है कि इंसान को उसका ज़रा सा भी एहसास नहीं होता। इसलिए हमें चाहिए कि हम हर वक़्त अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में रहें, अपने गुनाहों से तौबा करें, और अपने ईमान को मज़बूत करें। क़ुरआन हमें बार-बार यही सिखाता है कि अल्लाह की रहमत और माफ़ी का दरवाज़ा खुला है, लेकिन यह दरवाज़ा हमेशा खुला नहीं रहेगा। जब अज़ाब आ जाएगा, तो पछताने का कोई फ़ायदा नहीं होगा। आज हमारे पास मौका है कि हम अल्लाह की तरफ रुजू करें, उसकी इबादत करें, और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें। यही हमारी कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है, वह चाहता है कि हम उसकी तरफ लौट आएँ, और वह हमारे गुनाहों को माफ कर दे। लेकिन यह मोहलत हमेशा के लिए नहीं है, इसलिए आज ही का दिन है, आज ही तौबा कर लो, आज ही अपनी ज़िंदगी को सुधार लो, क्योंकि कल का भरोसा नहीं।



📜 आयत 200-204 — सूरा अश-शुआरा

200كَذَٰلِكَ سَلَكْنَاهُ فِي قُلُوبِ الْمُجْرِمِينَ
इसी तरह हमने (गोया ख़ुद) इस इन्कार को गुनाहगारों के दिलों में राह दी
201لَا يُؤْمِنُونَ بِهِ حَتَّىٰ يَرَوُا الْعَذَابَ الْأَلِيمَ
ये लोग जब तक दर्दनाक अज़ाब को न देख लेगें उस पर ईमान न लाएँगे
202فَيَأْتِيَهُم بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
कि वह यकायक इस हालत में उन पर आ पडेग़ा कि उन्हें ख़बर भी न होगी
203فَيَقُولُوا هَلْ نَحْنُ مُنظَرُونَ
(मगर जब अज़ाब नाज़िल होगा) तो वह लोग कहेंगे कि क्या हमें (इस वक्त क़ुछ) मोहलत मिल सकती है
204أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ
तो क्या ये लोग हमारे अज़ाब की जल्दी कर रहे हैं
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
202आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 202

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Saturday, October 3, 2026

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