अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُنظَرُونَ: वे लोग जिन्हें मोहलत दी जाए, देर लगाई जाए, यानी आगे के लिए टाल दिया जाए।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अल्लाह का अज़ाब (यातना) इन काफ़िरों पर अचानक आ जाएगा, जबकि उन्हें इसके आने का पहले से कोई इल्म नहीं होगा, तो वे उस वक़्त पछतावे और हैरानी की हालत में कहेंगे: "क्या हमें कुछ मोहलत दी जाएगी? क्या हमें थोड़ा सा वक़्त और मिलेगा?" वे इसलिए यह बात कहेंगे ताकि वे अपने शिर्क (बहुदेववाद) से तौबा कर सकें और जो कुछ उन्होंने खो दिया है, उसे दोबारा हासिल कर सकें। वे दुनिया में लौटने और ईमान लाने की तमन्ना करेंगे, लेकिन यह सिर्फ़ अफ़सोस और पछतावे का वक़्त होगा, जब कोई मौका नहीं बचेगा।
यह वह हालत है जब इंसान अज़ाब को अपनी आँखों से देख लेगा, तो उसे अपनी ग़लती का एहसास होगा, लेकिन वहाँ तौबा और ईमान कबूल नहीं किया जाएगा। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी नसीहत है जो आज इस दुनिया में हैं और उन्हें मोहलत मिली हुई है। अल्लाह तआला ने हमें ज़िंदगी का जो वक़्त दिया है, वह बहुत कीमती है। हमें चाहिए कि इस मोहलत से पहले ही अपने रब की तरफ रुजू करें, अपने गुनाहों से तौबा करें और ईमान की हालत में जिएँ, ताकि उस दिन हमें यह कहने की ज़रूरत न पड़े कि "क्या हमें मोहलत दी जाएगी?" क्योंकि वह दिन आने के बाद कोई मोहलत नहीं मिलेगी।
याद रखिए, अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और रहीम है। उसने इस दुनिया में हमें तौबा करने का दरवाज़ा खुला रखा है। जो भी इंसान सच्चे दिल से उसकी तरफ लौटता है, अल्लाह उसे माफ कर देता है। लेकिन जब अज़ाब आ जाएगा, तो फिर माफी का दरवाज़ा बंद हो जाएगा। इसलिए आज ही का दिन है, आज ही का वक़्त है — अपने रब की तरफ लौट जाइए, अपनी ज़िंदगी को ईमान और नेक अमल से सजाइए, और उस दिन की शर्मिंदगी से बचिए जब हर इंसान सिर्फ़ यही कहेगा: "काश! मुझे और मोहलत मिलती!"
📜 आयत 201-205 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 203
सूरा अश-शुआरा आयत 203 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (मगर जब अज़ाब नाज़िल होगा) तो वह लोग कहेंगे कि…सूरा आयत 203/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 201–205. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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