अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَا يُؤْمِنُونَ بِهِ: वे इस (क़ुरआन) पर ईमान नहीं लाते।
- حَتَّىٰ يَرَوُا الْعَذَابَ الْأَلِيمَ: यहाँ तक कि वे दर्दनाक अज़ाब (यातना) को देख लें।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत मक्का के काफ़िरों और मुँह फेरने वालों के बारे में है, जिन्होंने क़ुरआन को सुनकर भी उसे नकार दिया और उस पर ईमान लाने से इनकार कर दिया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग अपनी सख़्त क़िस्मत और हठधर्मी की वजह से क़ुरआन पर ईमान नहीं लाएँगे, यहाँ तक कि जब वे मौत के वक़्त या आख़िरत में उस दर्दनाक अज़ाब को अपनी आँखों से देख लेंगे, जिसका उन्हें डराया गया था। उस वक़्त ईमान लाना उनके किसी काम न आएगा, क्योंकि ईमान का वह दौर — जब अज़ाब आ जाए — क़बूल नहीं होता।
यह एक बड़ी चेतावनी है कि अल्लाह की निशानियों और उसके कलाम (क़ुरआन) से मुँह मोड़ना इंसान को ऐसे अंधेपन में डाल देता है कि वह हक़ को देखते हुए भी नहीं देखता, और सिर्फ़ अज़ाब के सामने आने पर ही उसे होश आता है, लेकिन तब तक सब कुछ ख़त्म हो चुका होता है।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह के कलाम को खुले दिल से सुनना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए। क़ुरआन हमारे लिए रहमत और हिदायत है, और जो लोग इसे ठुकराते हैं, वे अपने ही नुक़सान का सामान करते हैं। अल्लाह तआला ने हमें अक़्ल और समझ दी है ताकि हम उसकी आयतों पर ग़ौर करें और ईमान की रोशनी से अपने दिलों को मुनव्वर करें। आइए, हम क़ुरआन को अपना साथी बनाएँ, उसे पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, ताकि हम उन लोगों में से न हों जो अज़ाब देखने के बाद पछताएँ। अल्लाह हमें हिदायत की राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 199-203 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 201
सूरा अश-शुआरा आयत 201 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये लोग जब तक दर्दनाक अज़ाब को न देख लेगें…सूरा आयत 201/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 199–203. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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