अश-शुआरा · 201/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
لَا يُؤْمِنُونَ بِهِ حَتَّىٰ يَرَوُا الْعَذَابَ الْأَلِيمَ ۝٢٠١
Laa yu`minoona bihee hattaa yarawul `azaabal aleem
📖 हिंदी अर्थ
ये लोग जब तक दर्दनाक अज़ाब को न देख लेगें उस पर ईमान न लाएँगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا يُؤْمِنُونَ بِهِ: वे इस (क़ुरआन) पर ईमान नहीं लाते।
  • حَتَّىٰ يَرَوُا الْعَذَابَ الْأَلِيمَ: यहाँ तक कि वे दर्दनाक अज़ाब (यातना) को देख लें।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मक्का के काफ़िरों और मुँह फेरने वालों के बारे में है, जिन्होंने क़ुरआन को सुनकर भी उसे नकार दिया और उस पर ईमान लाने से इनकार कर दिया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग अपनी सख़्त क़िस्मत और हठधर्मी की वजह से क़ुरआन पर ईमान नहीं लाएँगे, यहाँ तक कि जब वे मौत के वक़्त या आख़िरत में उस दर्दनाक अज़ाब को अपनी आँखों से देख लेंगे, जिसका उन्हें डराया गया था। उस वक़्त ईमान लाना उनके किसी काम न आएगा, क्योंकि ईमान का वह दौर — जब अज़ाब आ जाए — क़बूल नहीं होता।

यह एक बड़ी चेतावनी है कि अल्लाह की निशानियों और उसके कलाम (क़ुरआन) से मुँह मोड़ना इंसान को ऐसे अंधेपन में डाल देता है कि वह हक़ को देखते हुए भी नहीं देखता, और सिर्फ़ अज़ाब के सामने आने पर ही उसे होश आता है, लेकिन तब तक सब कुछ ख़त्म हो चुका होता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह के कलाम को खुले दिल से सुनना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए। क़ुरआन हमारे लिए रहमत और हिदायत है, और जो लोग इसे ठुकराते हैं, वे अपने ही नुक़सान का सामान करते हैं। अल्लाह तआला ने हमें अक़्ल और समझ दी है ताकि हम उसकी आयतों पर ग़ौर करें और ईमान की रोशनी से अपने दिलों को मुनव्वर करें। आइए, हम क़ुरआन को अपना साथी बनाएँ, उसे पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, ताकि हम उन लोगों में से न हों जो अज़ाब देखने के बाद पछताएँ। अल्लाह हमें हिदायत की राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 199-203 — अश-शुआरा

199فَقَرَأَهُ عَلَيْهِم مَّا كَانُوا بِهِ مُؤْمِنِينَ
और वह उन अरबो के सामने उसको पढ़ता तो भी ये लोग उस पर ईमान लाने वाले न थे
200كَذَٰلِكَ سَلَكْنَاهُ فِي قُلُوبِ الْمُجْرِمِينَ
इसी तरह हमने (गोया ख़ुद) इस इन्कार को गुनाहगारों के दिलों में राह दी
201لَا يُؤْمِنُونَ بِهِ حَتَّىٰ يَرَوُا الْعَذَابَ الْأَلِيمَ
ये लोग जब तक दर्दनाक अज़ाब को न देख लेगें उस पर ईमान न लाएँगे
202فَيَأْتِيَهُم بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
कि वह यकायक इस हालत में उन पर आ पडेग़ा कि उन्हें ख़बर भी न होगी
203فَيَقُولُوا هَلْ نَحْنُ مُنظَرُونَ
(मगर जब अज़ाब नाज़िल होगा) तो वह लोग कहेंगे कि क्या हमें (इस वक्त क़ुछ) मोहलत मिल सकती है
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अनुवाद — अश-शुआरा 201

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Tuesday, August 18, 2026

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