अश-शुआरा · 217/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
وَتَوَكَّلْ عَلَى الْعَزِيزِ الرَّحِيمِ ۝٢١٧
Wa tawakkal alal `Azeezir Raheem
📖 हिंदी अर्थ
और तुम उस (ख़ुदा) पर जो सबसे (ग़ालिब और) मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَوَكَّلْ: भरोसा करो, अपना मामला सौंप दो।
  • الْعَزِيزِ: वह शक्तिशाली जो कभी पराजित न हो, जिसे कोई हरा न सके।
  • الرَّحِيمِ: अत्यंत दयालु, जो अपने बंदों पर असीम रहमत करने वाला है।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप अपने सारे मामलों को अल्लाह तआला के सुपुर्द कर दें, क्योंकि वही अल-अज़ीज़ है—वह शक्तिशाली जिसकी शक्ति के आगे कोई ताकत नहीं टिक सकती, और वही अर-रहीम है—वह दयालु जो अपने वफादार बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता और न ही उन्हें निराश करता है।

जब आप अपना भरोसा उस पर रखेंगे, तो वह आपको दुश्मनों की चालों से बचाएगा और उनके मक्र (षड्यंत्र) को नाकाम करेगा। यह भरोसा खाली ज़बान का नहीं, बल्कि दिल की गहराई से होना चाहिए—यही सच्चा तवक्कुल है।

अल्लाह तआला आपको देखता है जब आप रात के सन्नाटे में अकेले नमाज़ के लिए खड़े होते हैं, और वह आपके उन सजदों को भी देखता है जो आप अपने साथियों के साथ मिलकर करते हैं—क़याम (खड़े होना), रुकू (झुकना), सजदा और बैठना। वह आपकी तिलावत (क़ुरआन पढ़ने) को सुनता है और आपकी नीयत व अमल को जानता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि जीवन की हर परिस्थिति में—चाहे वह खुशी की हो या गम की, चाहे अकेले में हो या जमात में—हमें अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। वह अकेला ही हमारी मदद के लिए काफी है। जब हम उस पर भरोसा करते हैं, तो वह हमारे लिए ऐसे रास्ते खोलता है जिनका हमने सोचा भी नहीं होता।

याद रखिए! तवक्कुल का मतलब यह नहीं कि हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाएं, बल्कि इसका मतलब है—पूरी कोशिश करने के बाद नतीजे को अल्लाह पर छोड़ देना। यही वह चाबी है जो मुश्किलों के ताले खोलती है और दिल को सुकून देती है। अल्लाह तआला अपने बंदों से बहुत प्यार करता है और जो उस पर भरोसा करता है, उसे वह कभी रुसवा नहीं करता।

तो आइए, हम सब अपने अंदर यह गुण पैदा करें—हर काम में अल्लाह पर भरोसा करें, उसकी रहमत से उम्मीद रखें और उसकी शक्ति पर यकीन करें। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है, यही सुकून का ज़रिया है, और यही हमें उसकी मुहब्बत के क़रीब ले जाता है।



📜 आयत 215-219 — अश-शुआरा

215وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ لِمَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
और जो मोमिनीन तुम्हारे पैरो हो गए हैं उनके सामने अपना बाजू झुकाओ
216فَإِنْ عَصَوْكَ فَقُلْ إِنِّي بَرِيءٌ مِّمَّا تَعْمَلُونَ
(तो वाज़ेए करो) पस अगर लोग तुम्हारी नाफ़रमानी करें तो तुम (साफ साफ) कह दो कि मैं तुम्हारे करतूतों से बरी उज़ ज़िम्मा हूँ
217وَتَوَكَّلْ عَلَى الْعَزِيزِ الرَّحِيمِ
और तुम उस (ख़ुदा) पर जो सबसे (ग़ालिब और) मेहरबान है
218الَّذِي يَرَاكَ حِينَ تَقُومُ
भरोसा रखो कि जब तुम (नमाजे तहज्जुद में) खड़े होते हो
219وَتَقَلُّبَكَ فِي السَّاجِدِينَ
और सजदा
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अनुवाद — अश-शुआरा 217

सूरा अश-शुआरा आयत 217 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम उस (ख़ुदा) पर जो सबसे (ग़ालिब और) मेहरबान…

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Tuesday, August 18, 2026

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