अनुवाद — Tafsir
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है: "इसमें बड़ी निशानी है, और उनमें अधिकतर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे।"
शब्दों के अर्थ:
- آيَةً (निशानी): यानी अल्लाह की क़ुदरत और वहदानियत की स्पष्ट दलील।
- مُؤْمِنِينَ (ईमान लाने वाले): यानी अल्लाह और उसके रसूल पर दिल से यक़ीन करने वाले।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों की ओर इशारा कर रहे हैं जिन्होंने नबी की दावत को झुठलाया। वे उस ज़मीन को देखते हैं जिससे तरह-तरह के पेड़-पौधे, फल और अनाज उगते हैं — क्या यह उस अल्लाह की क़ुदरत का ज़ाहिर सबूत नहीं जिसने यह सब पैदा किया? जो अल्लाह मुर्दा ज़मीन को जिला कर हरियाली देता है, वही मुर्दों को क़ियामत के दिन ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है। यह एक ऐसी निशानी है जो अक़्ल और समझ रखने वाले हर इंसान को अल्लाह की तरफ़ बुलाती है।
लेकिन अफ़सोस! उनमें से अधिकतर लोग ईमान नहीं लाए। उनके दिलों पर मुहर लग चुकी थी, वे सच्चाई को देखते हुए भी उसे क़बूल करने के लिए तैयार नहीं थे। अल्लाह तआला को उनके हाल का पहले से इल्म था कि वे हिदायत क़बूल नहीं करेंगे, इसलिए उन्होंने अपनी सुन्नत (क़ानून) के मुताबिक़ उन्हें उनकी हालत पर छोड़ दिया।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सोचने की दावत देती है — जो इंसान अपने चारों ओर देखे, वह अल्लाह की क़ुदरत के नमूने पाएगा। हर पत्ता, हर फल, हर दाना उस रहमान की निशानी है। यही वह रास्ता है जो इंसान को उसके रब की मोहब्बत और पहचान तक पहुँचाता है। जो दिल इन निशानियों पर ग़ौर करेगा, उसका ईमान मज़बूत होगा और वह अल्लाह के करीब आएगा। अल्लाह तआला रहीम और करीम है, वह चाहता है कि इंसान उसकी तरफ़ रुजू करे और उसकी रहमत से भरपूर फ़ायदा उठाए।
📜 आयत 6-10 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 8
सूरा अश-शुआरा आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यक़ीनन इसमें (भी क़ुदरत) ख़ुदा की एक बड़ी निशानी है…सूरा आयत 8/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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