अश-शुआरा · 8/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ۝٨
Inn fee zaalika la Aayah; wa maa kaana aksaruhum mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
यक़ीनन इसमें (भी क़ुदरत) ख़ुदा की एक बड़ी निशानी है मगर उनमें से अक्सर ईमान लाने वाले ही नहीं
📜

अनुवाद — Tafsir

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है: "इसमें बड़ी निशानी है, और उनमें अधिकतर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे।"

शब्दों के अर्थ:

  • آيَةً (निशानी): यानी अल्लाह की क़ुदरत और वहदानियत की स्पष्ट दलील।
  • مُؤْمِنِينَ (ईमान लाने वाले): यानी अल्लाह और उसके रसूल पर दिल से यक़ीन करने वाले।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों की ओर इशारा कर रहे हैं जिन्होंने नबी की दावत को झुठलाया। वे उस ज़मीन को देखते हैं जिससे तरह-तरह के पेड़-पौधे, फल और अनाज उगते हैं — क्या यह उस अल्लाह की क़ुदरत का ज़ाहिर सबूत नहीं जिसने यह सब पैदा किया? जो अल्लाह मुर्दा ज़मीन को जिला कर हरियाली देता है, वही मुर्दों को क़ियामत के दिन ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है। यह एक ऐसी निशानी है जो अक़्ल और समझ रखने वाले हर इंसान को अल्लाह की तरफ़ बुलाती है।

लेकिन अफ़सोस! उनमें से अधिकतर लोग ईमान नहीं लाए। उनके दिलों पर मुहर लग चुकी थी, वे सच्चाई को देखते हुए भी उसे क़बूल करने के लिए तैयार नहीं थे। अल्लाह तआला को उनके हाल का पहले से इल्म था कि वे हिदायत क़बूल नहीं करेंगे, इसलिए उन्होंने अपनी सुन्नत (क़ानून) के मुताबिक़ उन्हें उनकी हालत पर छोड़ दिया।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सोचने की दावत देती है — जो इंसान अपने चारों ओर देखे, वह अल्लाह की क़ुदरत के नमूने पाएगा। हर पत्ता, हर फल, हर दाना उस रहमान की निशानी है। यही वह रास्ता है जो इंसान को उसके रब की मोहब्बत और पहचान तक पहुँचाता है। जो दिल इन निशानियों पर ग़ौर करेगा, उसका ईमान मज़बूत होगा और वह अल्लाह के करीब आएगा। अल्लाह तआला रहीम और करीम है, वह चाहता है कि इंसान उसकी तरफ़ रुजू करे और उसकी रहमत से भरपूर फ़ायदा उठाए।

🎧 सुनें

📜 आयत 6-10 — अश-शुआरा

6فَقَدْ كَذَّبُوا فَسَيَأْتِيهِمْ أَنبَاءُ مَا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
उन लोगों ने झुठलाया ज़रुर तो अनक़रीब ही (उन्हें) इस (अज़ाब) की हक़ीकत मालूम हो जाएगी जिसकी ये लोग हँसी उड़ाया करते थे
7أَوَلَمْ يَرَوْا إِلَى الْأَرْضِ كَمْ أَنبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوْجٍ كَرِيمٍ
क्या इन लोगों ने ज़मीन की तरफ भी (ग़ौर से) नहीं देखा कि हमने हर रंग की उम्दा उम्दा चीजें उसमें किस कसरत से उगायी हैं
8إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
यक़ीनन इसमें (भी क़ुदरत) ख़ुदा की एक बड़ी निशानी है मगर उनमें से अक्सर ईमान लाने वाले ही नहीं
9وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमें शक नहीं कि तेरा परवरदिगार यक़ीनन (हर चीज़ पर) ग़ालिब (और) मेहरबान है
10وَإِذْ نَادَىٰ رَبُّكَ مُوسَىٰ أَنِ ائْتِ الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ
(ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब तुम्हारे परवरदिगार ने मूसा को आवाज़ दी कि (इन) ज़ालिमों फिरऔन की क़ौम के पास जाओ (हिदायत करो)
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अनुवाद — अश-शुआरा 8

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Tuesday, August 18, 2026

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