अश-शुआरा · 9/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ ۝٩
Wa inna Rabbaka la Huwal `Azeezur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
और इसमें शक नहीं कि तेरा परवरदिगार यक़ीनन (हर चीज़ पर) ग़ालिब (और) मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • العَزِيزُ: अर्थात वह शक्तिशाली और प्रभुत्वशाली है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता।
  • الرَّحِيمُ: अर्थात वह अपने बंदों पर अत्यंत दयालु और कृपाशील है।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आपका रब निस्संदेह वही है जो सर्वशक्तिमान और अत्यंत दयालु है। उसकी शक्ति का अंदाज़ा इसी से लगाइए कि उसने धरती से हर प्रकार की अच्छी और लाभदायक वनस्पतियाँ उगाईं, जिन्हें उगाना उसके सिवा किसी के बस की बात नहीं। यह उसकी कुदरत की स्पष्ट निशानी है, फिर भी अधिकांश लोग ईमान नहीं लाते।

याद रखिए, आपका रब हर मख़लूक़ पर ग़ालिब और प्रभुत्वशाली है — कोई उसे मात नहीं दे सकता, कोई उसके आगे टिक नहीं सकता। वह काफ़िरों से बदला लेने पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है, और साथ ही वह अपने ईमानवाले बंदों पर बेहद रहम करने वाला है। उसकी रहमत हर चीज़ को घेरे हुए है, और वह अपने बंदों के हाल से पूरी तरह वाक़िफ़ है।

यह आयत हमें दो बातें सिखाती है: पहली, अल्लाह की ताक़त और उसके अधिकार से हमें डरना चाहिए और उसकी नाफ़रमानी से बचना चाहिए; दूसरी, उसकी रहमत से हमें उम्मीद रखनी चाहिए और उसकी ओर रुजू करना चाहिए। जब हमें यक़ीन हो कि हमारा रब इतना शक्तिशाली है कि उसके सामने कोई खड़ा नहीं हो सकता, और इतना दयालु है कि वह हमारी छोटी-छोटी दुआओं को भी सुनता है, तो हमारा दिल उसकी मुहब्बत से भर जाता है। यही ईमान की मिठास है — कि हम उसी से डरें, उसी से उम्मीद रखें, और उसी की इबादत करें। यही सच्ची कामयाबी है, और यही हमारी ज़िंदगी का असली मक़सद है।



📜 आयत 7-11 — सूरा अश-शुआरा

7أَوَلَمْ يَرَوْا إِلَى الْأَرْضِ كَمْ أَنبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوْجٍ كَرِيمٍ
क्या इन लोगों ने ज़मीन की तरफ भी (ग़ौर से) नहीं देखा कि हमने हर रंग की उम्दा उम्दा चीजें उसमें किस कसरत से उगायी हैं
8إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
यक़ीनन इसमें (भी क़ुदरत) ख़ुदा की एक बड़ी निशानी है मगर उनमें से अक्सर ईमान लाने वाले ही नहीं
9وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमें शक नहीं कि तेरा परवरदिगार यक़ीनन (हर चीज़ पर) ग़ालिब (और) मेहरबान है
10وَإِذْ نَادَىٰ رَبُّكَ مُوسَىٰ أَنِ ائْتِ الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ
(ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब तुम्हारे परवरदिगार ने मूसा को आवाज़ दी कि (इन) ज़ालिमों फिरऔन की क़ौम के पास जाओ (हिदायत करो)
11قَوْمَ فِرْعَوْنَ ۚ أَلَا يَتَّقُونَ
क्या ये लोग (मेरे ग़ज़ब से) डरते नहीं है
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
9आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 9

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Monday, September 28, 2026

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