अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَإِذْ نَادَىٰ رَبُّكَ مُوسَىٰ: और (हे नबी!) याद करो जब आपके रब ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को पुकारा।
- أَنِ ائْتِ: कि तुम जाओ (और पहुँचो)।
- الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ: अत्याचारी/ज़ालिम लोगों की ओर।
विस्तृत तफ़सीर:
हे नबी! आप अपनी क़ौम (क़ुरैश) को वह समय याद दिलाइए जब अल्लाह तआला ने अपने नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) को पुकारा और उन्हें एक बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी। यह पुकार उस समय हुई जब मूसा (अलैहिस्सलाम) को पवित्र घाटी 'तुवा' में पेड़ की ओर से आवाज़ आई थी। अल्लाह ने उनसे कहा: "तुम ज़ालिम लोगों की ओर जाओ।"
ये ज़ालिम लोग कौन थे? ये फ़िरऔन और उसकी क़ौम थी। उनका ज़ुल्म दो तरह का था: एक तो उन्होंने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया और उसकी इबादत से मुँह मोड़कर फ़िरऔन को अपना रब बना लिया, और दूसरा ज़ुल्म यह कि वे बनी इसराईल को ग़ुलाम बनाकर उन्हें बुरी तरह तकलीफ़ देते थे, उनके बेटों को मार डालते थे और उनकी बेटियों को ज़िंदा रखकर उनसे मुश्किल काम करवाते थे।
अल्लाह तआला ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को यह आदेश दिया कि वे उन ज़ालिमों के पास जाएँ और उन्हें अल्लाह की तरफ़ बुलाएँ, उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराएँ और उनसे कहें कि अपने कुफ़्र और ज़ुल्म से तौबा करें। यह मूसा (अलैहिस्सलाम) के लिए बहुत बड़ी परीक्षा थी, क्योंकि फ़िरऔन अपने ज़माने का सबसे ताक़तवर और सबसे ज़ालिम बादशाह था, और मूसा (अलैहिस्सलाम) उसी के यहाँ पले-बढ़े थे और उन्हें वहाँ से भागकर आना पड़ा था। इसके बावजूद अल्लाह ने उन्हें हुक्म दिया कि वे उसी ज़ालिम के पास जाएँ और उसे सीधे रास्ते पर बुलाएँ।
इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है कि अल्लाह का दीन पहुँचाने में किसी से डरना नहीं चाहिए। जब अल्लाह किसी काम का हुक्म देता है, तो वह अपने बंदे की मदद भी करता है। मूसा (अलैहिस्सलाम) अकेले थे, लेकिन अल्लाह ने उन्हें फ़िरऔन जैसे ताक़तवर ज़ालिम के सामने भेजा, और आख़िरकार सच्चाई की जीत हुई और ज़ुल्म का खात्मा हुआ।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि ज़ालिम लोग चाहे कितने भी ताक़तवर क्यों न हों, अल्लाह की तरफ़ से भेजे गए पैग़ाम के सामने उन्हें झुकना ही पड़ता है। और हे मुसलमानों! जब तुम्हें अल्लाह के दीन की तरफ़ बुलाने का मौक़ा मिले, तो किसी से न डरो, क्योंकि अल्लाह ही सबसे बड़ा मददगार है। जिसने अल्लाह पर भरोसा किया, अल्लाह उसके लिए काफ़ी है।
📜 आयत 8-12 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 10
सूरा अश-शुआरा आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब तुम्हारे परवरदिगार ने…सूरा आयत 10/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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