अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- العَزِيزُ: अर्थात जो सर्वशक्तिमान है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता, जो अपनी इच्छा और आदेश में पूर्ण रूप से प्रभावशाली है।
- الحَكِيمُ: अर्थात जो हर कार्य में पूर्ण ज्ञान और तदबीर (योजना) रखता है, जो अपनी हर रचना, हर आदेश और हर फैसले में गहरी हिकमत (बुद्धिमत्ता) रखता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब मूसा (अलैहिस्सलाम) आग की ओर बढ़े और उसके पास पहुँचे, तो अल्लाह ने उन्हें पुकारा और अपनी पवित्रता एवं महानता से परिचित कराया। यह वह बरकत वाला क्षण था जब अल्लाह ने उस स्थान को अपने कलाम (बातचीत) और रिसालत (पैग़म्बरी) के लिए चुना। अल्लाह ने मूसा को संबोधित करते हुए फ़रमाया: "ऐ मूसा! बेशक मैं ही अल्लाह हूँ।" यानी वही जो अकेला इबादत (पूजा) के योग्य है, जिसके सिवा कोई माबूद नहीं। फिर उन्होंने अपनी दो खूबियाँ बयान कीं:
- العَزِيزُ (अल-अज़ीज़): मैं वह शक्तिशाली हूँ जिसे कोई हरा नहीं सकता, मेरी शक्ति के आगे हर ताकत बेबस है, और मैं अपने दुश्मनों से बदला लेने में पूर्ण सक्षम हूँ।
- الحَكِيمُ (अल-हकीम): मैं अपनी सृष्टि, अपने फैसलों और अपने आदेशों में पूर्ण ज्ञान और हिकमत रखता हूँ। मैं हर चीज़ को उसके सही स्थान पर रखता हूँ, और मेरा हर कार्य गहरी समझदारी पर आधारित है।
यह पहचान मूसा (अलैहिस्सलाम) के लिए एक बड़ी तसल्ली और हिम्मत का कारण बनी। जब अल्लाह ने अपनी इन विशेषताओं से उन्हें परिचित कराया, तो मूसा का दिल मजबूत हुआ और उन्हें यकीन हुआ कि जो उन्हें आदेश दे रहा है, वह सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ है। इसके बाद अल्लाह ने उन्हें अपनी पैग़म्बरी के निशानियाँ दीं — जैसे लाठी का साँप बनना और हाथ का चमकना — ताकि वे फ़िरऔन और उसकी क़ौम के सामने पेश कर सकें।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने बंदों से इस तरह बात करता है जैसे एक प्यार करने वाला रब अपने नेक बंदे से करता है। वह हमें अपनी पहचान इसलिए कराता है ताकि हम उस पर भरोसा करें और उसकी ताकत के आगे सर झुकाएँ। जब हमें पता चलता है कि हमारा रब अज़ीज़ है (सब पर ग़ालिब) और हकीम है (हर काम में समझदार), तो हमारा दिल सुकून पाता है। हमें किसी और से डरने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि हमारा रब सबसे बड़ा है। और जब हम देखते हैं कि वह हकीम है, तो हमें यकीन होता है कि उसके हर हुक्म में हमारी भलाई है, चाहे हम उसे समझें या न समझें।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह से रिश्ता जोड़ने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि हम उसकी सिफ़ात (विशेषताओं) को जानें और उन पर ग़ौर करें। जब हम उसे अज़ीज़ और हकीम के रूप में पहचानते हैं, तो हमारी ज़िंदगी में एक नया उजाला आता है — हम उस पर भरोसा करते हैं, उसकी इबादत में मज़ा पाते हैं, और उसकी रहमत से कभी निराश नहीं होते। अल्लाह हमें भी मूसा (अलैहिस्सलाम) की तरह अपनी पहचान का नूर अता करे और हमें अपने दीन पर साबित क़दम रखने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 7-11 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 9
सूरा अन-नमल आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है- ऐ मूसा इसमें…सूरा आयत 9/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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