Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لا قِبَلَ لَهُم بِهَا: उनमें उनका मुकाबला करने की ताकत नहीं होगी।
- أَذِلَّةً: अपमानित होकर, विनम्र होकर।
- صَاغِرُونَ: छोटे और दबे हुए, ज़लील व ख़्वार।
तफ़सीर:
हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने सबा की रानी (बिल्क़ीस) के भेजे हुए दूत से कहा: "जाओ, अपनी क़ौम के पास लौट जाओ और यह संदेश पहुँचा दो कि तुम्हारा तोहफ़ा मुझे स्वीकार नहीं। मैं तुम्हें सिर्फ़ एक ही चीज़ के लिए बुलाता हूँ — अल्लाह की इबादत और उसके दीन की तरफ़। अगर तुमने यह स्वीकार नहीं किया, तो मैं अपनी सेना के साथ तुम्हारे पास आऊँगा, ऐसी फ़ौज जिसका मुक़ाबला करने की ताकत तुममें हरगिज़ नहीं होगी। और मैं तुम्हें तुम्हारी ज़मीन (सबा) से निकाल दूँगा, ऐसी हालत में कि तुम अपमानित और ज़लील होंगे, तुम्हारी सारी इज़्ज़त मिट्टी में मिल जाएगी — बशर्ते कि तुम अल्लाह के आगे सिर झुकाकर उसकी इबादत की तरफ़ न लौटो।"
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई और तौहीद (एकेश्वरवाद) का पैग़ाम किसी भी दुनियावी तोहफ़ों या रिश्तों के आगे नहीं झुकता। हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने दुनिया की सबसे बड़ी सल्तनत पाई थी, लेकिन उन्होंने अपनी ताकत का इस्तेमाल अल्लाह के दीन को बुलंद करने के लिए किया, न कि अपने नफ्स या दुनियावी मक़सद के लिए।
इससे हमें यह सबक मिलता है कि इंसान को चाहिए कि वह हक़ (सच्चाई) के साथ हो, चाहे सामने कितनी भी बड़ी ताकत क्यों न हो। और जो लोग अल्लाह के दीन से मुँह मोड़ते हैं, उनके लिए अंजाम यही है कि वे ज़िल्लत और रुसवाई के साथ अपनी इज़्ज़त खो दें।
लेकिन साथ ही, यह आयत रहमत का पैग़ाम भी देती है — अल्लाह का दीन हमेशा इंसानों को बुलाता है कि वे इस्लाह (सुधार) कर लें, तौबा कर लें, और इज़्ज़त के साथ जिएँ। अल्लाह तआला अपने बंदों की हिदायत चाहता है, और जो लोग हक़ की तरफ़ लौट आते हैं, उनके लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में बेहतरी है।
आओ, हम सब इस पैग़ाम को दिल से सुनें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के दीन के मुताबिक ढालें, ताकि हम दुनिया में इज़्ज़त पाएँ और आख़िरत में कामयाब हों।
📜 आयत 35-39 — सूरा अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 37
सूरा अन-नमल आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (फिर तोहफा लाने वाले ने कहा) तो उन्हीं लोगों के…सूरा आयत 37/93 — सूरा अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नमल सुनें, सूरा अन-नमल अनुवाद, सूरा अन-नमल mp3, सूरा अन-नमल pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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