अन-नमल · 37/93
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नमल
ارْجِعْ إِلَيْهِمْ فَلَنَأْتِيَنَّهُم بِجُنُودٍ لَّا قِبَلَ لَهُم بِهَا وَلَنُخْرِجَنَّهُم مِّنْهَا أَذِلَّةً وَهُمْ صَاغِرُونَ ۝٣٧
Irji` ilaihim falanaatiyan nahum bijunoodil laa qibala lahum bihaa wa lanukhri jannahum minhaaa azillatanw wa hum saaghiroon
📖 हिंदी अर्थ
(फिर तोहफा लाने वाले ने कहा) तो उन्हीं लोगों के पास जा हम यक़ीनन ऐसे लश्कर से उन पर चढ़ाई करेंगे जिसका उससे मुक़ाबला न हो सकेगा और हम ज़रुर उन्हें वहाँ से ज़लील व रुसवा करके निकाल बाहर करेंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لا قِبَلَ لَهُم بِهَا: उनमें उनका मुकाबला करने की ताकत नहीं होगी।
  • أَذِلَّةً: अपमानित होकर, विनम्र होकर।
  • صَاغِرُونَ: छोटे और दबे हुए, ज़लील व ख़्वार।

तफ़सीर:

हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने सबा की रानी (बिल्क़ीस) के भेजे हुए दूत से कहा: "जाओ, अपनी क़ौम के पास लौट जाओ और यह संदेश पहुँचा दो कि तुम्हारा तोहफ़ा मुझे स्वीकार नहीं। मैं तुम्हें सिर्फ़ एक ही चीज़ के लिए बुलाता हूँ — अल्लाह की इबादत और उसके दीन की तरफ़। अगर तुमने यह स्वीकार नहीं किया, तो मैं अपनी सेना के साथ तुम्हारे पास आऊँगा, ऐसी फ़ौज जिसका मुक़ाबला करने की ताकत तुममें हरगिज़ नहीं होगी। और मैं तुम्हें तुम्हारी ज़मीन (सबा) से निकाल दूँगा, ऐसी हालत में कि तुम अपमानित और ज़लील होंगे, तुम्हारी सारी इज़्ज़त मिट्टी में मिल जाएगी — बशर्ते कि तुम अल्लाह के आगे सिर झुकाकर उसकी इबादत की तरफ़ न लौटो।"

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई और तौहीद (एकेश्वरवाद) का पैग़ाम किसी भी दुनियावी तोहफ़ों या रिश्तों के आगे नहीं झुकता। हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने दुनिया की सबसे बड़ी सल्तनत पाई थी, लेकिन उन्होंने अपनी ताकत का इस्तेमाल अल्लाह के दीन को बुलंद करने के लिए किया, न कि अपने नफ्स या दुनियावी मक़सद के लिए।

इससे हमें यह सबक मिलता है कि इंसान को चाहिए कि वह हक़ (सच्चाई) के साथ हो, चाहे सामने कितनी भी बड़ी ताकत क्यों न हो। और जो लोग अल्लाह के दीन से मुँह मोड़ते हैं, उनके लिए अंजाम यही है कि वे ज़िल्लत और रुसवाई के साथ अपनी इज़्ज़त खो दें।

लेकिन साथ ही, यह आयत रहमत का पैग़ाम भी देती है — अल्लाह का दीन हमेशा इंसानों को बुलाता है कि वे इस्लाह (सुधार) कर लें, तौबा कर लें, और इज़्ज़त के साथ जिएँ। अल्लाह तआला अपने बंदों की हिदायत चाहता है, और जो लोग हक़ की तरफ़ लौट आते हैं, उनके लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में बेहतरी है।

आओ, हम सब इस पैग़ाम को दिल से सुनें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के दीन के मुताबिक ढालें, ताकि हम दुनिया में इज़्ज़त पाएँ और आख़िरत में कामयाब हों।



📜 आयत 35-39 — सूरा अन-नमल

35وَإِنِّي مُرْسِلَةٌ إِلَيْهِم بِهَدِيَّةٍ فَنَاظِرَةٌ بِمَ يَرْجِعُ الْمُرْسَلُونَ
और मैं उनके पास (एलचियों की माअरफ़त कुछ तोहफा भेजकर देखती हूँ कि एलची लोग क्या जवाब लाते हैं) ग़रज़ जब बिलक़ीस का एलची (तोहफा लेकर) सुलेमान के पास आया
36فَلَمَّا جَاءَ سُلَيْمَانَ قَالَ أَتُمِدُّونَنِ بِمَالٍ فَمَا آتَانِيَ اللَّهُ خَيْرٌ مِّمَّا آتَاكُم بَلْ أَنتُم بِهَدِيَّتِكُمْ تَفْرَحُونَ
तो सुलेमान ने कहा क्या तुम लोग मुझे माल की मदद देते हो तो ख़ुदा ने जो (माल दुनिया) मुझे अता किया है वह (माल) उससे जो तुम्हें बख्शा है कहीं बेहतर है (मैं तो नही) बल्कि तुम्ही लोग अपने तोहफे तहायफ़ से ख़ुश हुआ करो
37ارْجِعْ إِلَيْهِمْ فَلَنَأْتِيَنَّهُم بِجُنُودٍ لَّا قِبَلَ لَهُم بِهَا وَلَنُخْرِجَنَّهُم مِّنْهَا أَذِلَّةً وَهُمْ صَاغِرُونَ
(फिर तोहफा लाने वाले ने कहा) तो उन्हीं लोगों के पास जा हम यक़ीनन ऐसे लश्कर से उन पर चढ़ाई करेंगे जिसका उससे मुक़ाबला न हो सकेगा और हम ज़रुर उन्हें वहाँ से ज़लील व रुसवा करके निकाल बाहर करेंगे
38قَالَ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ أَيُّكُمْ يَأْتِينِي بِعَرْشِهَا قَبْلَ أَن يَأْتُونِي مُسْلِمِينَ
(जब वह जा चुका) तो सुलेमान ने अपने अहले दरबार से कहा ऐ मेरे दरबार के सरदारो तुममें से कौन ऐसा है कि क़ब्ल इसके वह लोग मेरे सामने फरमाबरदार बनकर आयें
39قَالَ عِفْرِيتٌ مِّنَ الْجِنِّ أَنَا آتِيكَ بِهِ قَبْلَ أَن تَقُومَ مِن مَّقَامِكَ ۖ وَإِنِّي عَلَيْهِ لَقَوِيٌّ أَمِينٌ
मलिका का तख्त मेरे पास ले आए (इस पर) जिनों में से एक दियो बोल उठा कि क़ब्ल इसके कि हुज़ूर (दरबार बरख़ास्त करके) अपनी जगह से उठे मै तख्त आपके पास ले आऊँगा और यक़ीनन उस पर क़ाबू रखता हूँ (और) ज़िम्मेदार हूँ
अन-नमलकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
37आयत

अनुवाद — अन-नमल 37

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Saturday, October 3, 2026

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