अन-नमल · 36/93
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नमल
فَلَمَّا جَاءَ سُلَيْمَانَ قَالَ أَتُمِدُّونَنِ بِمَالٍ فَمَا آتَانِيَ اللَّهُ خَيْرٌ مِّمَّا آتَاكُم بَلْ أَنتُم بِهَدِيَّتِكُمْ تَفْرَحُونَ ۝٣٦
Falammaa jaaa`a Sulaimaana qaala atumiddoonani bimaalin famaaa aataakum bal antum bihadiy yatikum tafrahoon
📖 हिंदी अर्थ
तो सुलेमान ने कहा क्या तुम लोग मुझे माल की मदद देते हो तो ख़ुदा ने जो (माल दुनिया) मुझे अता किया है वह (माल) उससे जो तुम्हें बख्शा है कहीं बेहतर है (मैं तो नही) बल्कि तुम्ही लोग अपने तोहफे तहायफ़ से ख़ुश हुआ करो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَتُمِدُّونَنِي: क्या तुम मुझे (धन-दौलत देकर) बढ़ाना चाहते हो? यानी क्या तुम मुझे अपने धन से रिझाना चाहते हो?
  • فَمَا آتَانِيَ اللَّهُ: जो अल्लाह ने मुझे दिया है (नबुव्वत, राज्य, और अपार दौलत)।
  • تَفْرَحُونَ: तुम खुश होते हो (दुनिया के मामूली सामान पर)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब बिल्क़ीस (सबा की रानी) का दूत अपने साथियों के साथ हदिया (उपहार) लेकर हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) के पास पहुँचा, तो सुलेमान ने उस उपहार को देखकर अचरज और इनकार के साथ कहा: "क्या तुम मुझे धन-दौलत से रिझाना चाहते हो? यह कैसी बात है! अल्लाह ने मुझे जो कुछ दिया है—नबुव्वत, विशाल राज्य, और अपार खज़ाने—वह उस सब से कहीं बेहतर है जो उसने तुम्हें दिया है। मुझे तुम्हारे इस हदिये की कोई ज़रूरत नहीं, क्योंकि मेरा भरोसा और मेरी दौलत अल्लाह के दिए हुए पर है, जो किसी भी दुनियावी माल से बढ़कर है।"

फिर सुलेमान ने उन्हें यह समझाया कि असल में तुम्हीं लोग हो जो इस तरह के तुच्छ उपहारों पर खुश होते हो और उन पर फ़ख़्र करते हो, क्योंकि तुम्हारी नज़र दुनिया की चमक-दमक पर है। लेकिन मैं तो उस अल्लाह का नबी हूँ जिसने मुझे वह कुछ दिया है जो दुनिया की किसी भी चीज़ से बड़ा है। मेरी ख्वाहिश तुम्हारे माल से नहीं, बल्कि तुम्हारे ईमान से है। मैं चाहता हूँ कि तुम अल्लाह की इबादत करो और उसके दीन को क़बूल करो, क्योंकि यही असली कामयाबी है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि एक सच्चा मोमिन दुनिया के मामूली सामान और दौलत से नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत और उसके दीन से खुश होता है। हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) ने यह दिखाया कि जब अल्लाह किसी को नबुव्वत और हिदायत जैसी नेमत देता है, तो दुनिया की सारी दौलत उसके सामने हेच है। हमें भी चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में दुनिया की चमक-दमक को असली खुशी का ज़रिया न बनाएँ, बल्कि अल्लाह की इबादत, उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की पैरवी और अच्छे अमल को अपनी सबसे बड़ी पूँजी समझें। याद रखिए, असली इज़्ज़त और खुशी उसी को मिलती है जो अल्लाह से जुड़ा हो, न कि उसको जो माल-दौलत पर इतराता है।



📜 आयत 34-38 — सूरा अन-नमल

34قَالَتْ إِنَّ الْمُلُوكَ إِذَا دَخَلُوا قَرْيَةً أَفْسَدُوهَا وَجَعَلُوا أَعِزَّةَ أَهْلِهَا أَذِلَّةً ۖ وَكَذَٰلِكَ يَفْعَلُونَ
मलका ने कहा बादशाहों का क़ायदा है कि जब किसी बस्ती में (बज़ोरे फ़तेह) दाख़िल हो जाते हैं तो उसको उजाड़ देते हैं और वहाँ के मुअज़िज़ लोगों को ज़लील व रुसवा कर देते हैं और ये लोग भी ऐसा ही करेंगे
35وَإِنِّي مُرْسِلَةٌ إِلَيْهِم بِهَدِيَّةٍ فَنَاظِرَةٌ بِمَ يَرْجِعُ الْمُرْسَلُونَ
और मैं उनके पास (एलचियों की माअरफ़त कुछ तोहफा भेजकर देखती हूँ कि एलची लोग क्या जवाब लाते हैं) ग़रज़ जब बिलक़ीस का एलची (तोहफा लेकर) सुलेमान के पास आया
36فَلَمَّا جَاءَ سُلَيْمَانَ قَالَ أَتُمِدُّونَنِ بِمَالٍ فَمَا آتَانِيَ اللَّهُ خَيْرٌ مِّمَّا آتَاكُم بَلْ أَنتُم بِهَدِيَّتِكُمْ تَفْرَحُونَ
तो सुलेमान ने कहा क्या तुम लोग मुझे माल की मदद देते हो तो ख़ुदा ने जो (माल दुनिया) मुझे अता किया है वह (माल) उससे जो तुम्हें बख्शा है कहीं बेहतर है (मैं तो नही) बल्कि तुम्ही लोग अपने तोहफे तहायफ़ से ख़ुश हुआ करो
37ارْجِعْ إِلَيْهِمْ فَلَنَأْتِيَنَّهُم بِجُنُودٍ لَّا قِبَلَ لَهُم بِهَا وَلَنُخْرِجَنَّهُم مِّنْهَا أَذِلَّةً وَهُمْ صَاغِرُونَ
(फिर तोहफा लाने वाले ने कहा) तो उन्हीं लोगों के पास जा हम यक़ीनन ऐसे लश्कर से उन पर चढ़ाई करेंगे जिसका उससे मुक़ाबला न हो सकेगा और हम ज़रुर उन्हें वहाँ से ज़लील व रुसवा करके निकाल बाहर करेंगे
38قَالَ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ أَيُّكُمْ يَأْتِينِي بِعَرْشِهَا قَبْلَ أَن يَأْتُونِي مُسْلِمِينَ
(जब वह जा चुका) तो सुलेमान ने अपने अहले दरबार से कहा ऐ मेरे दरबार के सरदारो तुममें से कौन ऐसा है कि क़ब्ल इसके वह लोग मेरे सामने फरमाबरदार बनकर आयें
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36आयत

अनुवाद — अन-नमल 36

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Friday, October 2, 2026

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