Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَتُمِدُّونَنِي: क्या तुम मुझे (धन-दौलत देकर) बढ़ाना चाहते हो? यानी क्या तुम मुझे अपने धन से रिझाना चाहते हो?
- فَمَا آتَانِيَ اللَّهُ: जो अल्लाह ने मुझे दिया है (नबुव्वत, राज्य, और अपार दौलत)।
- تَفْرَحُونَ: तुम खुश होते हो (दुनिया के मामूली सामान पर)।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब बिल्क़ीस (सबा की रानी) का दूत अपने साथियों के साथ हदिया (उपहार) लेकर हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) के पास पहुँचा, तो सुलेमान ने उस उपहार को देखकर अचरज और इनकार के साथ कहा: "क्या तुम मुझे धन-दौलत से रिझाना चाहते हो? यह कैसी बात है! अल्लाह ने मुझे जो कुछ दिया है—नबुव्वत, विशाल राज्य, और अपार खज़ाने—वह उस सब से कहीं बेहतर है जो उसने तुम्हें दिया है। मुझे तुम्हारे इस हदिये की कोई ज़रूरत नहीं, क्योंकि मेरा भरोसा और मेरी दौलत अल्लाह के दिए हुए पर है, जो किसी भी दुनियावी माल से बढ़कर है।"
फिर सुलेमान ने उन्हें यह समझाया कि असल में तुम्हीं लोग हो जो इस तरह के तुच्छ उपहारों पर खुश होते हो और उन पर फ़ख़्र करते हो, क्योंकि तुम्हारी नज़र दुनिया की चमक-दमक पर है। लेकिन मैं तो उस अल्लाह का नबी हूँ जिसने मुझे वह कुछ दिया है जो दुनिया की किसी भी चीज़ से बड़ा है। मेरी ख्वाहिश तुम्हारे माल से नहीं, बल्कि तुम्हारे ईमान से है। मैं चाहता हूँ कि तुम अल्लाह की इबादत करो और उसके दीन को क़बूल करो, क्योंकि यही असली कामयाबी है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि एक सच्चा मोमिन दुनिया के मामूली सामान और दौलत से नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत और उसके दीन से खुश होता है। हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) ने यह दिखाया कि जब अल्लाह किसी को नबुव्वत और हिदायत जैसी नेमत देता है, तो दुनिया की सारी दौलत उसके सामने हेच है। हमें भी चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में दुनिया की चमक-दमक को असली खुशी का ज़रिया न बनाएँ, बल्कि अल्लाह की इबादत, उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की पैरवी और अच्छे अमल को अपनी सबसे बड़ी पूँजी समझें। याद रखिए, असली इज़्ज़त और खुशी उसी को मिलती है जो अल्लाह से जुड़ा हो, न कि उसको जो माल-दौलत पर इतराता है।
📜 आयत 34-38 — सूरा अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 36
सूरा अन-नमल आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो सुलेमान ने कहा क्या तुम लोग मुझे माल की…सूरा आयत 36/93 — सूरा अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नमल सुनें, सूरा अन-नमल अनुवाद, सूरा अन-नमल mp3, सूरा अन-नमल pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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