Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اطَّيَّرْنَا (अत्तैय्यरना): यह 'تَطَيَّرْنَا' से लिया गया है, जिसका अर्थ है अपशकुन लेना या बुरा शगुन मानना।
- طَائِرُكُمْ (ताइरुकुम): तुम्हारा शगुन, यानी तुम्हारे भाग्य का फैसला, या वह चीज़ जिससे तुम्हारा अच्छा-बुरा आता है।
- تُفْتَنُونَ (तुफ्तनून): तुम्हारी परीक्षा ली जा रही है, तुम्हें आज़माया जा रहा है।
विस्तृत तफ्सीर (व्याख्या):
जब पैग़म्बर सालिह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम (समुदाय) को सच्चाई की ओर बुलाया और उन्हें अल्लाह की इबादत की दावत दी, तो उनकी क़ौम ने हठधर्मी और ज़िद के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा: "हमने तुम्हारे और तुम्हारे साथ के ईमानवालों के कारण अपशकुन लिया है।" उनका मतलब था कि जब से तुम आए हो, हम पर मुसीबतें आईं, सूखा पड़ा, और हमारे बीच फूट पड़ गई। वे यह भूल गए कि ये सब अल्लाह की ओर से है, न कि किसी इंसान की वजह से।
इस पर पैग़म्बर सालिह अलैहिस्सलाम ने उन्हें साफ़ और सच्चा जवाब दिया: "तुम्हारा शगुन (अच्छा-बुरा) अल्लाह के पास है।" यानी जो कुछ भी तुम्हारे साथ होता है, अच्छा हो या बुरा, वह अल्लाह के फैसले और उसकी तक़दीर से होता है। कोई इंसान किसी दूसरे के लिए मुसीबत या बरकत का ज़रिया नहीं बनता, बल्कि सब कुछ अल्लाह के हाथ में है। अल्लाह ही है जो भलाई और बुराई को निर्धारित करता है, और वही हर चीज़ का इल्म रखता है।
फिर उन्होंने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही: "बल्कि तुम एक ऐसी क़ौम हो जिसकी परीक्षा ली जा रही है।" यानी अल्लाह तुम्हें खुशहाली और तंगी, अच्छाई और बुराई के ज़रिए आज़मा रहा है। यह परीक्षा इसलिए है ताकि देखा जाए कि कौन सच्चे दिल से ईमान लाता है और कौन इनकार करता है। जो लोग इन हालात में सब्र और ईमान पर क़ायम रहते हैं, वे कामयाब होते हैं, और जो शगुन और अंधविश्वास में उलझे रहते हैं, वे नाकाम रहते हैं।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि एक मुसलमान को कभी भी शगुन, अपशकुन या अंधविश्वास में नहीं पड़ना चाहिए। हर अच्छी और बुरी चीज़ अल्लाह की तरफ से है, और उसी पर भरोसा रखना चाहिए। जब हम पर मुसीबत आए, तो हमें सब्र करना चाहिए और अल्लाह से दुआ करनी चाहिए, न कि किसी इंसान या चीज़ को बुरा शगुन मानना चाहिए। यह भी याद रखें कि यह दुनिया एक इम्तिहान की जगह है — कभी खुशी, कभी गम; कभी राहत, कभी तकलीफ़। अल्लाह हमें इस इम्तिहान में सब्र और ईमान की दौलत अता करे, और हमें उन लोगों में शामिल करे जो हर हाल में उसके शुक्रगुज़ार और सब्र करने वाले हैं। आमीन।
📜 आयत 45-49 — सूरा अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 47
सूरा अन-नमल आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग बोले हमने तो तुम से और तुम्हारे साथियों…सूरा आयत 47/93 — सूरा अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नमल सुनें, सूरा अन-नमल अनुवाद, सूरा अन-नमल mp3, सूरा अन-नमल pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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