अन-नमल · 48/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
وَكَانَ فِي الْمَدِينَةِ تِسْعَةُ رَهْطٍ يُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ ۝٤٨
Wa kaana fil madeenati tis`atu rahtiny yufsidoona fil ardi wa laa yuslihoon
📖 हिंदी अर्थ
और शहर में नौ आदमी थे जो मुल्क के बानीये फसाद थे और इसलाह की फिक्र न करते थे-उन लोगों ने (आपस में) कहा कि बाहम ख़ुदा की क़सम खाते जाओ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • रहत (رهط): दस से कम आदमियों के समूह को कहते हैं, जिसमें कोई स्त्री न हो।
  • युफ्सिदून (يُفْسِدُونَ): उपद्रव और बिगाड़ फैलाना।
  • ला युस्लिहून (لَا يُصْلِحُونَ): वे सुधार का कोई काम नहीं करते।

तफसीर:

यह आयत हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम की क़ौम 'समूद' के उस शहर 'अल-हिज्र' (जो वर्तमान में उत्तर-पश्चिम अरब में स्थित है) के बारे में है, जहाँ नौ सरगना लोग रहते थे। ये नौ लोग पूरे इलाके में फ़साद फैलाने वाले थे—वे कुफ़्र, शिर्क और गुनाहों के द्वारा ज़मीन पर बिगाड़ पैदा करते थे, और उनके कामों में भलाई और सुधार का कोई पहलू नहीं था। वे न केवल ख़ुद गुमराह थे, बल्कि दूसरों को भी गुमराह करते थे। यही वे नौ लोग थे जिन्होंने आपस में साज़िश करके उस मु'जिज़ाती ऊँटनी (नाक़ा) को काटने का षड्यंत्र रचा था, जो अल्लाह की तरफ से उनकी सच्चाई की निशानी के रूप में भेजी गई थी।

इन लोगों की हालत यह थी कि वे ज़मीन पर फ़साद फैलाते थे और सुधार के किसी काम में हाथ नहीं डालते थे। उनका जीवन पूरी तरह से अल्लाह की नाफ़रमानी और उसके नबी की मुख़ालफ़त पर आधारित था। उन्होंने हक़ को नकारा, नबी का मज़ाक उड़ाया और आख़िरकार अल्लाह की निशानी को नष्ट करने का गुनाह किया।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि जब किसी समाज में कुछ लोग लगातार फ़साद फैलाते रहें और सुधार से मुँह मोड़ें, तो अल्लाह की यातना उन पर आकर रहती है। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपनी ज़िंदगी में हमेशा इस्लाह (सुधार) को अपनाएँ, अच्छाई का रास्ता चुनें और किसी भी प्रकार के फ़साद से बचें। अल्लाह तआला ने हमें अक़्ल और समझ दी है ताकि हम सही और ग़लत में फ़र्क कर सकें। हमें चाहिए कि हम अपने समाज में भलाई फैलाने वाले बनें, न कि बिगाड़ पैदा करने वाले। याद रखें, अल्लाह की नज़र उन लोगों पर होती है जो सुधार और भलाई के काम करते हैं, और वह फ़साद फैलाने वालों को कभी पसंद नहीं करता।



📜 आयत 46-50 — अन-नमल

46قَالَ يَا قَوْمِ لِمَ تَسْتَعْجِلُونَ بِالسَّيِّئَةِ قَبْلَ الْحَسَنَةِ ۖ لَوْلَا تَسْتَغْفِرُونَ اللَّهَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
सालेह ने कहा ऐ मेरी क़ौम (आख़िर) तुम लोग भलाई से पहल बुराई के वास्ते जल्दी क्यों कर रहे हो तुम लोग ख़ुदा की बारगाह में तौबा व अस्तग़फार क्यों नही करते ताकि तुम पर रहम किया जाए
47قَالُوا اطَّيَّرْنَا بِكَ وَبِمَن مَّعَكَ ۚ قَالَ طَائِرُكُمْ عِندَ اللَّهِ ۖ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ تُفْتَنُونَ
वह लोग बोले हमने तो तुम से और तुम्हारे साथियों से बुरा शगुन पाया सालेह ने कहा तुम्हारी बदकिस्मती ख़ुदा के पास है (ये सब कुछ नहीं) बल्कि तुम लोगों की आज़माइश की जा रही है
48وَكَانَ فِي الْمَدِينَةِ تِسْعَةُ رَهْطٍ يُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ
और शहर में नौ आदमी थे जो मुल्क के बानीये फसाद थे और इसलाह की फिक्र न करते थे-उन लोगों ने (आपस में) कहा कि बाहम ख़ुदा की क़सम खाते जाओ
49قَالُوا تَقَاسَمُوا بِاللَّهِ لَنُبَيِّتَنَّهُ وَأَهْلَهُ ثُمَّ لَنَقُولَنَّ لِوَلِيِّهِ مَا شَهِدْنَا مَهْلِكَ أَهْلِهِ وَإِنَّا لَصَادِقُونَ
कि हम लोग सालेह और उसके लड़के बालो पर शब खून करे उसके बाद उसके वाली वारिस से कह देगें कि हम लोग उनके घर वालों को हलाक़ होते वक्त मौजूद ही न थे और हम लोग तो यक़ीनन सच्चे हैं
50وَمَكَرُوا مَكْرًا وَمَكَرْنَا مَكْرًا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
और उन लोगों ने एक तदबीर की और हमने भी एक तदबीर की और (हमारी तदबीर की) उनको ख़बर भी न हुई
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अनुवाद — अन-नमल 48

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Tuesday, August 18, 2026

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