Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अल्हम्दु लिल्लाह: सभी प्रकार की प्रशंसा और स्तुति अल्लाह के लिए है।
- सलामुन: शांति और सुरक्षा।
- असतफ़ा: चुन लिया, विशेष रूप से चुन लिया।
- आल्लाहु ख़ैरुन: क्या अल्लाह बेहतर है?
- अमा युशरिकून: या वे जिन्हें वे (अल्लाह का) साझीदार बनाते हैं?
तफ़सीर:
ऐ नबी! आप कह दीजिए कि सारी प्रशंसा और स्तुति अल्लाह के लिए है, जिसने अपने नेक बंदों की सहायता की और अपने दुश्मनों को विनष्ट किया। और उसके चुने हुए बंदों पर शांति और सुरक्षा हो — ये वे बंदे हैं जिन्हें अल्लाह ने अपने पैग़ाम (संदेश) के लिए चुना, अर्थात् नबी और रसूल। यह शांति उनके लिए अल्लाह की ओर से सुरक्षा और सम्मान है।
फिर अल्लाह तआला अपने नबी को निर्देश देता है कि वे मुशरिकों से पूछें: क्या अल्लाह, जो सृष्टि का स्वामी है, जिसके हाथ में सब कुछ है, जो लाभ और हानि पहुँचाने पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है — क्या वह बेहतर है, या वे मूर्तियाँ और देवता जिन्हें ये लोग अल्लाह के साथ साझीदार बनाते हैं? जो न तो अपने लिए लाभ पहुँचा सकते हैं और न हानि दूर कर सकते हैं, और न ही अपने पूजने वालों की कोई सहायता कर सकते हैं।
यह प्रश्न वास्तव में उन्हें उत्तर देने में असमर्थ बनाने के लिए है, क्योंकि हर समझदार व्यक्ति जानता है कि अल्लाह ही सच्चा पूज्य है, और ये मूर्तियाँ केवल पत्थर और लकड़ी हैं जिनमें कोई शक्ति नहीं। यह एक ऐसा तर्क है जो उनके मुँह बंद कर देता है और उन्हें सोचने पर मजबूर करता है।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी शिक्षा है कि हमें हर हाल में अल्लाह की प्रशंसा करनी चाहिए, और उसके नेक बंदों से प्रेम करना चाहिए। यह हमें सिखाती है कि सच्ची इज़्ज़त और कामयाबी केवल अल्लाह की ओर रुजू करने में है, न कि उसके अलावा किसी और की ओर। जो व्यक्ति अल्लाह को अपना रब और मालिक मान लेता है, वह कभी किसी और के आगे सिर नहीं झुकाता, और उसे किसी और से डरने की आवश्यकता नहीं होती।
याद रखिए! अल्लाह ने अपने नबियों को चुना और उन्हें शांति प्रदान की, और हमें भी उनके मार्ग पर चलने का आदेश दिया। जो उनके मार्ग पर चलेगा, वही सफल होगा। और जो अल्लाह के साथ किसी को साझीदार बनाएगा, वह घाटे में रहेगा। अल्लाह ही सबसे बेहतर है, और उसकी राह ही सबसे सीधी राह है।
📜 आयत 57-61 — सूरा अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 59
सूरा अन-नमल आयत 59 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो (उनके हलाक़ होने पर) खुदा…सूरा आयत 59/93 — सूरा अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नमल सुनें, सूरा अन-नमल अनुवाद, सूरा अन-नमल mp3, सूरा अन-नमल pdf. आयत 57–61. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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