अन-नमल · 59/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
قُلِ الْحَمْدُ لِلَّهِ وَسَلَامٌ عَلَىٰ عِبَادِهِ الَّذِينَ اصْطَفَىٰ ۗ آللَّهُ خَيْرٌ أَمَّا يُشْرِكُونَ ۝٥٩
Qulil hamdu lillaahi wa salaamun `alaa `ibaadihil lazeenas tafaa; aaallaahu khairun ammmaa yushrikoon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो (उनके हलाक़ होने पर) खुदा का शुक्र और उसके बरगुज़ीदा बन्दों पर सलाम भला ख़ुदा बेहतर है या वह चीज़ जिसे ये लोग शरीके ख़ुदा कहते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अल्हम्दु लिल्लाह: सभी प्रकार की प्रशंसा और स्तुति अल्लाह के लिए है।
  • सलामुन: शांति और सुरक्षा।
  • असतफ़ा: चुन लिया, विशेष रूप से चुन लिया।
  • आल्लाहु ख़ैरुन: क्या अल्लाह बेहतर है?
  • अमा युशरिकून: या वे जिन्हें वे (अल्लाह का) साझीदार बनाते हैं?

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप कह दीजिए कि सारी प्रशंसा और स्तुति अल्लाह के लिए है, जिसने अपने नेक बंदों की सहायता की और अपने दुश्मनों को विनष्ट किया। और उसके चुने हुए बंदों पर शांति और सुरक्षा हो — ये वे बंदे हैं जिन्हें अल्लाह ने अपने पैग़ाम (संदेश) के लिए चुना, अर्थात् नबी और रसूल। यह शांति उनके लिए अल्लाह की ओर से सुरक्षा और सम्मान है।

फिर अल्लाह तआला अपने नबी को निर्देश देता है कि वे मुशरिकों से पूछें: क्या अल्लाह, जो सृष्टि का स्वामी है, जिसके हाथ में सब कुछ है, जो लाभ और हानि पहुँचाने पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है — क्या वह बेहतर है, या वे मूर्तियाँ और देवता जिन्हें ये लोग अल्लाह के साथ साझीदार बनाते हैं? जो न तो अपने लिए लाभ पहुँचा सकते हैं और न हानि दूर कर सकते हैं, और न ही अपने पूजने वालों की कोई सहायता कर सकते हैं।

यह प्रश्न वास्तव में उन्हें उत्तर देने में असमर्थ बनाने के लिए है, क्योंकि हर समझदार व्यक्ति जानता है कि अल्लाह ही सच्चा पूज्य है, और ये मूर्तियाँ केवल पत्थर और लकड़ी हैं जिनमें कोई शक्ति नहीं। यह एक ऐसा तर्क है जो उनके मुँह बंद कर देता है और उन्हें सोचने पर मजबूर करता है।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी शिक्षा है कि हमें हर हाल में अल्लाह की प्रशंसा करनी चाहिए, और उसके नेक बंदों से प्रेम करना चाहिए। यह हमें सिखाती है कि सच्ची इज़्ज़त और कामयाबी केवल अल्लाह की ओर रुजू करने में है, न कि उसके अलावा किसी और की ओर। जो व्यक्ति अल्लाह को अपना रब और मालिक मान लेता है, वह कभी किसी और के आगे सिर नहीं झुकाता, और उसे किसी और से डरने की आवश्यकता नहीं होती।

याद रखिए! अल्लाह ने अपने नबियों को चुना और उन्हें शांति प्रदान की, और हमें भी उनके मार्ग पर चलने का आदेश दिया। जो उनके मार्ग पर चलेगा, वही सफल होगा। और जो अल्लाह के साथ किसी को साझीदार बनाएगा, वह घाटे में रहेगा। अल्लाह ही सबसे बेहतर है, और उसकी राह ही सबसे सीधी राह है।



📜 आयत 57-61 — अन-नमल

57فَأَنجَيْنَاهُ وَأَهْلَهُ إِلَّا امْرَأَتَهُ قَدَّرْنَاهَا مِنَ الْغَابِرِينَ
ग़रज हमने लूत को और उनके ख़ानदान को बचा लिया मगर उनकी बीवी कि हमने उसकी तक़दीर में पीछे रह जाने वालों में लिख दिया था
58وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًا ۖ فَسَاءَ مَطَرُ الْمُنذَرِينَ
और (फिर तो) हमने उन लोगों पर (पत्थर का) मेंह बरसाया तो जो लोग डराए जा चुके थे उन पर क्या बुरा मेंह बरसा
59قُلِ الْحَمْدُ لِلَّهِ وَسَلَامٌ عَلَىٰ عِبَادِهِ الَّذِينَ اصْطَفَىٰ ۗ آللَّهُ خَيْرٌ أَمَّا يُشْرِكُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो (उनके हलाक़ होने पर) खुदा का शुक्र और उसके बरगुज़ीदा बन्दों पर सलाम भला ख़ुदा बेहतर है या वह चीज़ जिसे ये लोग शरीके ख़ुदा कहते हैं
60أَمَّنْ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَنبَتْنَا بِهِ حَدَائِقَ ذَاتَ بَهْجَةٍ مَّا كَانَ لَكُمْ أَن تُنبِتُوا شَجَرَهَا ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ يَعْدِلُونَ
भला वह कौन है जिसने आसमान और ज़मीन को पैदा किया और तुम्हारे वास्ते आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने पानी से दिल चस्प (ख़ुशनुमा) बाग़ उठाए तुम्हारे तो ये बस की बात न थी कि तुम उनके दरख्तों को उगा सकते तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) बल्कि ये लोग खुद अपने जी से गढ़ के बुतो को उसके बराबर बनाते हैं
61أَمَّن جَعَلَ الْأَرْضَ قَرَارًا وَجَعَلَ خِلَالَهَا أَنْهَارًا وَجَعَلَ لَهَا رَوَاسِيَ وَجَعَلَ بَيْنَ الْبَحْرَيْنِ حَاجِزًا ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
भला वह कौन है जिसने ज़मीन को (लोगों के) ठहरने की जगह बनाया और उसके दरमियान जा बजा नहरें दौड़ायी और उसकी मज़बूती के वास्ते पहाड़ बनाए और (मीठे खारी) दरियाओं के दरमियान हदे फासिल बनाया तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) बल्कि उनमें के अकसर कुछ जानते ही नहीं
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अनुवाद — अन-नमल 59

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Tuesday, August 18, 2026

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