अन-नमल · 66/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
بَلِ ادَّارَكَ عِلْمُهُمْ فِي الْآخِرَةِ ۚ بَلْ هُمْ فِي شَكٍّ مِّنْهَا ۖ بَلْ هُم مِّنْهَا عَمُونَ ۝٦٦
Balid daaraka `ilmuhum fil Aakhirah; bal hum fee shakkim minhaa bal hum minhaa `amoon
📖 हिंदी अर्थ
बल्कि (असल ये है कि) आख़िरत के बारे में उनके इल्म का ख़ात्मा हो गया है बल्कि उसकी तरफ से शक में पड़ें हैं बल्कि (सच ये है कि) इससे ये लोग अंधे बने हुए हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ادَّارَكَ: एकत्रित और पूर्ण हो गया, यानी आख़िरत का ज्ञान उन्हें पूरा-पूरा हो जाएगा।
  • عَمُونَ: अंधे, यानी जिनकी आँखें (दिल की आँखें) बंद हैं, वे सत्य को देखने में असमर्थ हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इन आयात में उन लोगों की हालत बयान कर रहे हैं जो आख़िरत (परलोक) और क़यामत के दिन को नहीं मानते या उसके बारे में शक में पड़े हुए हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि क्या उनका ज्ञान आख़िरत तक पहुँच गया है? क्या उन्होंने उसे देख लिया है या उसकी हक़ीक़त को समझ लिया है? हरगिज़ नहीं! बल्कि वे दुनिया में आख़िरत के बारे में संदेह और भ्रम में डूबे हुए हैं। उनके दिलों की आँखें अंधी हो गई हैं, इसलिए वे उस यक़ीनी सच्चाई को नहीं देख पा रहे हैं जो क़ुरआन और रसूल ﷺ की शिक्षाओं में स्पष्ट रूप से बयान की गई है।

जब क़यामत आएगी और वे अपनी क़ब्रों से उठाए जाएँगे, तब उनका ज्ञान पूरा हो जाएगा और वे देख लेंगे कि जो कुछ कहा गया था वह सब सच था। लेकिन उस वक़्त का ज्ञान और ईमान उन्हें कोई लाभ नहीं देगा, क्योंकि ईमान का समय दुनिया ही था। यही वह लोग हैं जिन्होंने दुनिया में आख़िरत को भुला दिया और अपनी ज़िंदगी को केवल इसी दुनिया तक सीमित कर लिया।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें ग़ौर करने की दावत देती है कि हम आख़िरत के बारे में शक में न पड़ें। अल्लाह ने हमें अक़्ल और समझ दी है, और क़ुरआन व सुन्नत में आख़िरत की हर हक़ीक़त को स्पष्ट कर दिया है। हमें चाहिए कि हम अपने दिलों की आँखों को खोलें, अच्छे कर्म करें, और उस दिन के लिए तैयारी करें जब हर इंसान अपने किए का बदला पाएगा। यह दुनिया एक इम्तिहान की जगह है, और आख़िरत हमारी असली मंज़िल है। जो लोग आज सत्य को नहीं देखते, वे कल पछताएँगे, लेकिन पछतावे का वह समय किसी काम नहीं आएगा। अल्लाह हमें सीधी राह दिखाए और हमें उन लोगों में शामिल करे जो आख़िरत पर यक़ीन रखते हैं और उसके लिए अच्छे कर्म करते हैं। आमीन।



📜 आयत 64-68 — अन-नमल

64أَمَّن يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ وَمَن يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ قُلْ هَاتُوا بُرْهَانَكُمْ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
भला वह कौन हैं जो ख़िलकत को नए सिरे से पैदा करता है फिर उसे दोबारा (मरने के बाद) पैदा करेगा और कौन है जो तुम लोगों को आसमान व ज़मीन से रिज़क़ देता है- तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरग़िज़ नहीं) (ऐ रसूल) तुम (इन मुशरेकीन से) कहा दो कि अगर तुम सच्चे हो तो अपनी दलील पेश करो
65قُل لَّا يَعْلَمُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ الْغَيْبَ إِلَّا اللَّهُ ۚ وَمَا يَشْعُرُونَ أَيَّانَ يُبْعَثُونَ
(ऐ रसूल इन से) कह दो कि जितने लोग आसमान व ज़मीन में हैं उनमे से कोई भी गैब की बात के सिवा नहीं जानता और वह भी तो नहीं समझते कि क़ब्र से दोबारा कब ज़िन्दा उठ खडे क़िए जाएँगें
66بَلِ ادَّارَكَ عِلْمُهُمْ فِي الْآخِرَةِ ۚ بَلْ هُمْ فِي شَكٍّ مِّنْهَا ۖ بَلْ هُم مِّنْهَا عَمُونَ
बल्कि (असल ये है कि) आख़िरत के बारे में उनके इल्म का ख़ात्मा हो गया है बल्कि उसकी तरफ से शक में पड़ें हैं बल्कि (सच ये है कि) इससे ये लोग अंधे बने हुए हैं
67وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَإِذَا كُنَّا تُرَابًا وَآبَاؤُنَا أَئِنَّا لَمُخْرَجُونَ
और कुफ्फार कहने लगे कि क्या जब हम और हमारे बाप दादा (सड़ गल कर) मिट्टी हो जाएँगें तो क्या हम फिर निकाले जाएँगें
68لَقَدْ وُعِدْنَا هَٰذَا نَحْنُ وَآبَاؤُنَا مِن قَبْلُ إِنْ هَٰذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
उसका तो पहले भी हम से और हमारे बाप दादाओं से वायदा किया गया था (कहाँ का उठना और कैसी क़यामत) ये तो हो न हो अगले लोगों के ढकोसले हैं
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अनुवाद — अन-नमल 66

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Tuesday, August 18, 2026

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